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Kishor Kunal : नीतीश सरकार ने पद्म विभूषण मांगा था, आचार्य किशोर कुणाल को मरणोपरांत पद्मश्री; IPS अफसर थे वह

Sat, 25 Jan 2025 11:03 PM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

Padma Awards 2025 : आईपीएस के रूप में चर्चित रहे किशोर कुणाल बाद में धर्माचार्य बन गए। आचार्य किशोर कुणाल का पिछले महीने निधन होने के बाद राज्य सरकार ने उनके लिए पद्म विभूषण मांगा था, हालांकि अब पद्मश्री देने की घोषणा हुई है।
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आचार्य किशोर कुणाल की फाइल फोटो। - फोटो : सोशल मीडिया।
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विस्तार
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 पूर्व आईपीएस अधिकारी किशोर कुणाल ने 29 दिसंबर की सुबह अंतिम सांस ली। उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया था। आननफानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया। 74 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन के बाद उन्हें अब पद्मश्री देने की घोषणा हुई है। हालांकि आचार्य किशोर कुणाल को मरणोपरांत बिहार सरकार ने उन्हें देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित करने की सिफारिश की थी। यह फैसला कैबिनेट सचिवालय विभाग की ओर से जारी किये गये बयान के अनुसार सर्वसम्मति से लिया गया था। इसके बाद मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग की तरफ से गृह मंत्रालय को पत्र लिखा गया था। सरकार के अपर सचिव सुमन कुमार ने गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव गोपालस्वामी पार्थसारथी को पत्र लिखा था, जिसमें यह मांग की गई थी कि  पूर्व आईपीएस अधिकारी आचार्य किशोर कुणाल को पद्म विभूषण पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया जाय। इस बात को लेकर उस समय काफी बयानबाजी भी हुई थी। 

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जीतन राम मांझी - फोटो : अमर उजाला
जीतनराम मांझी ने भारत रत्न देने की मांग की थी 
 हम पार्टी के संरक्षक और भारत सरकार में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी ने आचार्य किशोर कुणाल को भारत रत्न देने की सिफारिश की थी। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को इस संबंध में पत्र लिखकर कहा था कि  किशोर कुणाल ने इस समाज को बहुत कुछ दिया है। उनके योगदान को बिहार की जनता उन्हें हमेशा याद रखेगी। इसलिए समाज में उनके  द्वारा किये गये व्यापक योगदान के लिए आचार्य किशोर कुणाल को भारत रत्न देना चाहिए। जीतनराम मांझी ने कहा था कि किशोर कुणाल के कुशल नेतृत्व में महावीर मंदिर ट्रस्ट के द्वारा महावीर कैंसर संस्थान की स्थापना हुई। महावीर कैंसर संस्थान में आज गरीब और वंचित लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं। इतना ही नहीं किशोर कुणाल ने कैमूर की पहाड़ियों पर गुप्त काल के एकलौते विद्यमान मंदिर मुंडेश्वरी भवानी का भी जीर्णोद्धार किया। पटना में उन्होंने ज्ञान निकेतन विद्यालय की स्थापना की। फिलहाल वह पूर्वी चंपारण में दुनिया के सबसे बड़े विराट रामायण मंदिर का निर्माण कार्य शुरू करवाया है। उनके द्वारा इस समाज में इतने बड़े-बड़े कार्य किये गये हैं, जो अभूतपूर्व हैं। इसलिए उन्हें भरता रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिए और मैं इसकी मांग करता हूं।
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