Bihar : जरा सोचिये, एक महिला अपने 14 नवजात की मौत देख चुकी थी, क्यों कि उसके सभी बच्चे 5 या 6 महीने में ही हो गये थे। इस बार भी वही स्थिति थी, लेकिन आज शायद चमत्कार होना था। अब डॉक्टर सभी को मिठाई खिला रहे हैं।
बिहार के रोहतास जिले से एक ऐसी मां की कहानी सामने आई है, जिसने अब तक 15 बच्चों को जन्म दिया है। इसे दुर्भाग्य ही कहिये कि उस महिला के सभी 14 बच्चे आज जिंदा नहीं हैं। इस बार सदर अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती महिला के 15 वें बच्चे को भी बड़ी मुश्किल से बचाया जा सका है, जिससे सदर अस्पताल के डॉक्टर एवं बच्चे के परिवार में काफी खुशी है।
सदर अस्पताल में हुआ बेहतर इलाज
दिनारा प्रखंड अंतर्गत गोपालपुर की रहने वाली सैफुल खातून ने बताया कि वह अबतक 15 बच्चों को जन्म दे चुकी है, लेकिन सभी बच्चों की मौत हो गई। इस संबंध में महिला ने बताया कि अब तक जन्म लेने वाले सभी बच्चे पांच या 6 महीने में ही हुए हैं। इस वजह से सभी कुपोषण व कमजोरी के चलते 14 बच्चों की मौत हो गई। अब जब 15वां बच्चे ने जन्म लिया है तो उसकी भी स्थिति काफी नाजुक थी, लेकिन सदर अस्पताल में डॉक्टरों ने इसका बेहतरीन इलाज किया, जिसके बाद उसकी स्थिति में काफी सुधार हुआ है।
जन्म के समय बच्चे का वजन 500 ग्राम
महिला ने बताया कि सासाराम के एक निजी अस्पताल में हुए बच्चे का जन्म के समय उसका वजन मात्र 500 ग्राम था। कई दिनों तक निजी अस्पताल में रखने के बावजूद नवजात की स्थिति में जब कोई सुधार नहीं हुआ तो अपने बच्चे को लेकर सदर अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती कराया, जहां एक सप्ताह में ही बच्चे का वजन लगभग 700 ग्राम हो गया। वहीं बच्चे के स्वास्थ्य में सुधार के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
सिविल सर्जन ने स्वास्थ्य कर्मियों का बढ़ाया हौसला
वहीं बच्चे को जब अस्पताल से छुट्टी दी जा रही थी, तो सिविल सर्जन खुद एसएनसीयू पहुंचे और बच्चें की देखरेख करने वाले डॉक्टर व सभी स्वास्थ्य कर्मियों को मिठाई खिलाई। साथ हीं उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों को गुलाब का फूल भेंट कर उनका हौसला भी बढ़ाया। इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ मणिराज रंजन ने बताया कि सदर अस्पताल में नवजात बच्चों के इलाज के लिए तमाम व्यवस्थाएं हैं। अभी फिलहाल 10 रेडिएंट वार्मर उपलब्ध है, जिसमें नवजात बच्चों का इलाज होता है। रेडिएंट वार्मर के अलावा उच्च प्रशिक्षित डॉक्टर एवं स्वास्थ्य कर्मी बेहतर सेवा दे रहे हैं, जिसका परिणाम है कि बच्चों की मृत्यु दर में भी कमी आई है। सदर अस्पताल स्थित मातृ शिशु अस्पताल में जच्चा तथा बच्चा दोनों को बेहतर इलाज मुहैया कराया जा रहा है।