अपने समर्थकों के साथ वंदना सिंह।
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2019 में भी की थी कोशिश
वंदना सिंह 2019 में भी बिस्कोमान के अध्यक्ष के चुनाव में उतरी थीं, लेकिन उस समय उन्हें सफलता हाथ नहीं लगी थी। उस समय उनके पति डॉक्टर सुनील कुमार सिंह निर्विरोध निर्वाचित हो गये थे। इसलिए अपने पति के मुकाबले वंदना को उस समय मैदान छोड़ना पड़ा था। उस समय उन्होंने कहा था कि मैं यह प्रयास छोडूंगी नहीं और नारी सशक्तिकरण के बल पर यह पद हासिल करके रहूंगी। आज वह प्रयत्न सफल हो गया और वह बिस्कोमान की नयी अध्यक्ष बन गई।
चुनाव के दौरान हुई थी मारपीट
बिस्कोमान निदेशक मंडल के चुनाव के दौरान जमकर मारपीट हो गई थी। चुनाव के दौरान ही दो पक्ष आपस में भिड़ गए। दोनों ओर से मारपीट हुई। इधर, पटना पुलिस ने फौरान दोनों पक्षों को शांत करवाया। तनाव बढ़ते देख वोटिंग स्थल को सील कर दिया। किसी भी व्यक्ति को अंदर जाने नहीं दिया जा रहा था। गांधी मैदान थाना प्रभारी सहित डीएसपी 2 के साथ कई अधिकारी वहां पहुंचे। पटना जिला प्रशासन की ओर से 10 मजिस्ट्रेट और 60 सहायक निर्वाचन पदाधिकारी की तैनाती की गई थी। बताया जा रहा है कि प्रत्याशी और विधायक के समर्थकों के बीच पहले तो अंदर जाने के लिए बहस होने लगा इतने में विधायक जी के बॉडी गार्ड ने एक व्यक्ति के ऊपर हाथ चला दिया इतने में मामला तूल पकड़ लिया और जमकर मारपीट शुरू हो गई। वही मौके पर पुलिस पहुँच मामले को शांत कराया।
बिस्कोमान के निदेशक मंडल और अध्यक्ष पद के लिए श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल में चुनाव हुआ। मतदान सुबह शुक्रवार आठ बजे से शुरू हुआ, जो दो बजे तक चला। शाम में रिजल्ट जारी किया गया। वोटों की गिनती भी एसके मेमोरियल में ही हुई। इस चुनाव में कुल 33 उम्मीदवार खड़े थे। इसमें सामान्य श्रेणी ग्रुप ‘ए’ में विशाल सिंह, विनय कुमार शाही, महेश राय, दिनेश सिंह, नवेंद्र झा, मनोज कुमार, जितेंद्र कुमार, धनंजय गुप्ता, अमानुल्लाह, अयोध्या प्रसाद चौधरी, सुरेश चंद्र सिंह व हरेंद्र नाथ सिंह चौधरी शामिल थे। वहीं बिस्कोमान के पूर्व अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह के गुट में खुद सुनील कुमार सिंह, वंदना सिंह, रमेश चंद्र चौबे, नेहा चौबे, विनय कुमार, रामकलेवर सिंह, रामविशुन सिंह, आदि शामिल हैं। इस चुनव में विशाल सिंह और राजद नेता व पूर्व अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह के बीच कड़ी टक्कर थी।
जानिए सुनील सिंह और विशाल सिंह के बारे में
सुनील सिंह राष्ट्रीय जनता दल के वरीय नेताओं में से एक और लालू परिवार के सबसे करीबी है। वह लंबे समय तक बिस्कोमान के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। कुछ माह पहले ही उन्हें विधान परिषद् से निष्कासित कर दिया गया है। इसके बाद उन्हें सदस्यता गंवानी पड़ी थी। इस बार वह फिर से बिस्कोमान के अध्यक्ष पद के लिए चुनावी मैदान में हैं। वहीं दूसरी ओर उनके प्रतिद्वंदी माने जाने वाले विशाल सिंह बिस्कोमान के संस्थापक तपेश्वर सिंह के पोते हैं। इनके पिता अजीत सिंह भी लंबे समय तक सहकारिता क्षेत्र से जुड़े रहे और वह सांसद भी रह चुके हैं। इनकी मां भी सांसद रह चुकी हैं। विशाल सिंह भारतीय सहकारी उपभोक्ता संघ लिमिटेड के अध्यक्ष हैं।