खेत को बचाने के लिए शुरू हुआ विरोध
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मामले को लेकर के एक स्थानीय किसान संजीव कुमार ने बताया कि हम लोग यहां अपनी खेती की उपजाऊ जमीन बचाने आए हैं। सरकार अगर फैक्ट्री लगाएगी तो हम और यहां के सैकड़ों लोग कहां जाएंगे। इससे तो हमारी पूर्व से चली आ रही खेती भी खत्म हो जाएगी। हम सब ग्रामीण पीढ़ी दर पीढ़ी से यहां पर अलग-अलग किस्म की फसलों को लगाने का काम करते हैं। फैक्ट्री के लगने से हमारी जमीन की उर्वरता खत्म हो जाएगी हम लोग यहां फैक्ट्री नहीं चाहते हैं। किसान मो अब्दुल समद ने बताया कि हम लोगो के यहां पर आलू, प्याज, लहसुन, गेहूं, मकई और धान उपजता हैं और यह प्रति वर्ष उगता है। इसे अगल बगल के जिलों में भी बेचा जाता है। उनका कहना है कि यह सरकार हम लोगों से मजाक कर रही है। हम ग्रामीण ने यह सामूहिक रूप से तय कर लिया है कि यहां किसी भी कीमत में औद्योगिक क्षेत्र नहीं बसने देंगे और अब इसे बचाने के लिए हम लोग अपनी जान दे देंगे।