नीलगाय को हैदराबाद से आए शूटर कर रहे ढेर
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नीलगाय जिसे स्थानीय भाषा में घोर, गधा या घोड़परास कहा जाता है। यह एक जंगली पशु है, जो दर्जनों की संख्या में झुंड बनाकर एक साथ किसानों के खेतों में यत्र-तत्र विचरण करते हैं। इस दौरान थोड़ी फसल को खाते हैं तो बहुत ज्यादा फसलों को अपने पैरों से कुचलकर बर्बाद कर देते हैं। इससे इन दिनों किसान को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। किसानों की माने तो कभी-कभी निहत्थे किसानों पर नीलगाय वार भी कर देती हैं, जिससे कई बार किसान घायल भी हुए हैं।
इस समस्या को लेकर वन विभाग के अधिकारियों को लगातार आवेदन दिया जा रहा था, जिसके बाद किसानों की समस्या को दूर करने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों की पहल पर सरकार के द्वारा आतंक मचाने वाले नीलगाय को मारने के लिए आदेश दिया गया। सरकार के आदेश प्राप्त होने के बाद हैदराबाद से आए शूटरों की टीम के द्वारा स्थानीय जनप्रतिनिधि और वन विभाग के अधिकारी व किसानों के साथ समन्वय बनाकर नीलगाय को मारने का अभियान शुरू किया गया।
साहूगढ़ में चला अभियान...
इस अभियान के तहत पहले दिन दोपहर तक एक दर्जन नीलगाय के नर को ढेर कर दिया गया। इस मामले की अधिक जानकारी देते हुए फॉरेस्टर किरण कुमारी ने बताया कि वन एवं पर्यावरण विभाग की ओर से प्राप्त आदेशानुसार, मधेपुरा सदर प्रखंड के साहूगढ़ एक पंचायत के बहियार में यह अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत तीन-चार दिनों तक इस क्षेत्र में कैंप किया जाएगा और किसानों को नुकसान पहुंचाने वाले नीलगाय को मार गिराया जाएगा।
मुख्य शूटर सोहेल फारुकी ने क्या कहा...
वहीं, इस मामले में अधिक जानकारी देते हुए मुख्य शूटर सोहेल फारुकी ने बताया कि वह हैदराबाद से आए हैं। उन्हें वन एवं पर्यावरण विभाग के द्वारा मधेपुरा में फसलों को लगातार नुकसान पहुंचा रहे घोड़परास को ढेर करने के लिए निर्देश प्राप्त हुआ है। उसके तहत तीन-चार दिन तक इस क्षेत्र में कैंप किया जा रहा है। बुधवार दोपहर तक एक दर्जन नीलगाय अर्थात घोड़परास को ढेर किया गया।
उन्होंने आगे बताया कि अगर इस जिले के अन्य किसी क्षेत्र में इस तरह की परेशानी है, जहां नीलगाय के झुंड के द्वारा किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाया जाता है और किसान परेशान हैं तो वह वन विभाग में इसकी शिकायत दर्ज करवाकर हमसे संपर्क कर सकते हैं। उसके बाद हम उस स्थान पर पहुंचकर किसानों को नीलगाय के आतंक से मुक्ति दिलाएंगे।
नीलगाय को मारने की अभियान शुरू होने से स्थानीय किसानों ने राहत की सांस ली है। किसानों ने बताया कि बीते 10 साल से लगातार फसलों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। खेती के समय में कर्ज लेकर जोर-शोर से खेती तो करते हैं। लेकिन फसल तैयार होते-होते अधिकांश फसल नील गायों के कारण बर्बाद हो जाती है। इससे हम किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है। लेकिन सरकार और वन विभाग प्रशासन के द्वारा किए जा रहे इस अभियान से हम लोगों को काफी राहत मिलेगी और अब हम लोगों की फसल बर्बाद होने से बच जाएगी।