प्रवर्तन निदेशालय ने भवन निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता तारिणी दास और उनके रिश्तेदारों के ठिकानों पर कार्रवाई की थी। अब तक टीम को 11 करोड़ 64 लाख रुपये मिले हैं। टीम को तारिणी दास के पास से कई अहम साक्ष्य मिले थे। इसमें जमीन के दस्तावेज, जमीन के कागजात चीजे ईडी की टीम ने जब्त की थी। अब ईडी की टीम ने वित्त विभाग के संयुक्त सचिव मुमुक्षु चौधरी, कार्यपालक अभियंता शहरी विकास उमेश कुमार सिंह, बिहार अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के डिप्टी प्रोजेक्ट डायरेक्टर रियाज अहमद, डीजीएम सागर जायसवाल, बीएमएसआईसीएल के डीजीएम विकास झा और कार्यपालक अभियंता साकेत कुमार के ठिकानों पर भी जांच की। इन सभी अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप है।
बिलों को मंजूरी देने के लिए रिश्वत के पैसे मिले थे
सूत्रों के अनुसार, इन लोगों ने पर आरोप है कि इन्होंने टेंडर में खास ठेकेदार को मदद के बदले मोटी रकम रिश्वत ली है। इतना ही नहीं बिल क्लीयरेंस में उगाही की। पटना कई ठेकेदारों के इस तरह की बिलों को मंजूरी देने के लिए रिश्वत के पैसे मिले थे। ईडी की टीम ने पटना में उपरोक्त अधिकारियों के आवासीय परिसरों की भी तलाशी ली। इनमें कई साक्ष्य बरामद हुए। टीम ने इनके मोबाइल, जमीन के कागजात, बैंक पासबुक समेत अन्य कागजातों को जब्त कर लिया।
काली कमाई से रिश्तेदारों के नाम से भी संपत्ति अर्जित की
छापेमारी के दौरान भवन निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता तारिणी दास के आवास के मुख्या द्वार बंद कर दिया, ताकि न कोई अंदर से बाहर जा पाए और न कोई बाहर से अंदर आ सके। फिलहाल तलाशी का कार्य जारी है। उनपर आरोप है कि अपने कार्यकाल के दौरान वह गलत तरीके से संपत्ति अर्जित किया। साथ ही साथ अवैध काली कमाई से अपने रिश्तेदारों के नाम से भी संपत्ति अर्जित की।