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Bihar News : जानें कौन बने बेगूसराय के पहले दधीचि; जलाने की जगह क्यों लिया परिजनों ने देहदान का फैसला

Mon, 28 Aug 2023 05:16 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

Body Donation : बिहार के मेडिकल छात्रों को प्रैक्टिकल करने के लिए मानव का मृत शरीर बहुत कम मिल पाता है। ऐसे में बेगूसराय जिले के एक परिवार ने परिवार के मुखिया के निधन पर देहदान का फैसला किया और पटना पहुंचकर प्रक्रिया पूरी की।
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श्रद्धांजलि देने पहुंचे लोग। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बेगूसराय के वरीय अधिवक्ता अवधेश कुमार लाल आज हमलोगों बीच नहीं हैं। उन्होंने देहदान की घोषणा की थी। इसलिए उनकी सांसें थमने के बाद परिजनों ने उनके शरीर को दान कर दिया। करीब 99.99 फीसदी केस में मौत के बाद परिजन शव का अंतिम संस्कार अपने रीति-रिवाज से करते हैं। लेकिन, उस मृत शरीर से प्रैक्टिकल कर मेडिकल की पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट दूसरों की जिंदगी बचाना सीखते हैं। इसी सोच के साथ वरीय अधिवक्ता अवधेश कुमार लाल ने देहदान करने का संकल्प लिया था। सोमवार को निधन के बाद वरीय अधिवक्ता की बॉडी को दान के लिए इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) लाया गया। यहां देहदान की प्रक्रिया संपन्न हुई। इस दौरान कई जाने माने लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे। समाजसेवियों ने एक स्वर में कहा कि अवधेश कुमार लाल के जाने से समाज की अपूरणीय क्षति हुई है। 

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20 की जगह 300 मेडिकल छात्रों को परीक्षण के लिए एक देह
बिहार के 'ब्लड मैन' के नाम से मशहूर समाजसेवी मुकेश हिसारिया ने कहा कि वरीय अधिवक्ता अवधेश कुमार लाल के देह का इस्तेमाल मेडिकल की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी कर सकेंगे। प्रत्येक 20 विद्यार्थी पर एक देह की आवश्यकता होती है, लेकिन बिहार में मृत शरीर नहीं मिल पाने के कारण यह औसत 300 विद्यार्थी पर एक देह की है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में हर देहदानी का परिवार न सिर्फ अपने जिले के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए एक मिसाल है। वरिष्ठ अधिवक्त लाल के बेटे निरंजन सिन्हा ने बताया कि रविवार रात अचानक उनके पिता का निधन हो गया। वह रोजाना 4 बजे सुबह उठ जाते थे और नित्य क्रिया से निवृत होकर करीब ढाई घंटे तक ध्यान और पूजा करते थे। योग और ईश्वर के प्रति उनकी असीम आस्था थी। उनकी देहदान प्रक्रिया कराने के लिए पटना आए समाजसेवियों ने कहा- "यदि किसी के व्यक्तित्व को मापने का पैमाना सफलता हो तो वे सामान्य से भी कम माने जाएंगे। किंतु यदि मापदंड नैतिकता हो तो वे एक महान व्यक्ति माने जाएंगे। उनका जीवन पूरी तरह निष्कलंक था। पता नहीं ईश्वरीय न्याय कब होता है। सफलता उन्हें बहुत कम मिली, लेकिन सारे कष्टों के बावजूद उनकी आस्था कभी डिगी नहीं।"

पत्नी बेगूसराय की मशहूर शायर हैं
समाजसेवियों ने कहा कि वरीय अधिवक्ता अवधेश कुमार लाल बेगूसराय जिले के पहले देहदानी बने हैं। उनकी पत्नी मुकुल लाल मशहूर शायर हैं। जो उनकी प्रतिभा है, उस लिहाज से उनकी ख्याति पूरे देश में होनी चाहिए। दूरदर्शन के कोलकाता जोन के अपर महानिदेशक रहे वरिष्ठ पत्रकार सुधांशु रंजन ने सोशल मीडिया पर लिखा- "आज सुबह अवधेश जी के बेटे निरंजन ने घटना की जानकारी दी। मुझे लगा कि वह बोलेगा कि वह मुझे लेने आ रहा है, शायद पिताजी ने मुझे बुलवाने को कहा है। लेकिन उसने अवधेश जी के निधन की सूचना दी तो मैं दंग रहा गया। प्रणाम करने तो जाना था लेकिन अंतिम प्रणाम के लिए जाना होगा, ऐसी कल्पना भी नहीं की थी।" दधीचि समिति बेगूसराय के सहसंयोजक सुनील राय और दिलीप सिन्हा के अथक प्रयास से यह देहदान सफल हुआ। इस मौके पर विनीता मिश्रा, अरुण सत्यमूर्ति, शैलेश महाजन ,आनंद प्रधान, पवन केजरीवाल एवं बड़ी संख्या में परिवार के लोग उपस्थित रहे ।

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