हाईटेक पीएमसीएच में 1117 बेड की व्यवस्था की गई है। PMCH की नई इमारत पूरी तरह आधुनिक तकनीकों और सुविधाओं से लैस है। मरीजों को आईसीयू बेड्स से लेकर प्राइवेट रूम की फैसिलिटी मिलेगी। अलग-अलग विभागों के लिए ओपीडी इनडोर के अलावा 65 आईसीयू बेड, 44 आईसीयू बेड के साथ 100 प्राइवेट रूम, 10 डीलक्स रूम, दो सुपर डीलक्स रूम के साथ अल्ट्रा मॉडर्न ब्लड बैंक डिजिटल ओपीडी परफॉरमेंस मेडिकल की सुविधा दी गई है। इस अस्पताल में इसके अलावा हर विभाग के लिए अलग से ओपीडी रूम, ENT, बाल रोग, मेडिसिन, सर्जरी, स्त्री रोग, ऑर्थोपेडिक्स और नेत्र रोग जैसे विभागों की सेवाएं शुरू की जा रही हैं। मरीजों और उनके परिजनों के लिए साफ-सुथरे वेटिंग एरिया, लिफ्ट और रैम्प की भी सुविधा दी गई है।
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PMCH का विकास तीन फेज में किया जा रहा है। पहला फेज आज से शुरू हो रहा है। बाकी दोनों फेज में काम अभी चल रहा है। इन दोनों फेज के पूरे होने के बाद PMCH में कुल 5,460 बेड की सुविधा होगी। साथ ही यह भारत का सबसे बड़ा और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल बन जाएगा। इस प्रोजेक्ट में 5,540 करोड़ लगा है, जिसकी शुरुआत 8 फरवरी 2021 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने की थी। शुरुआत में इसे 7 साल में पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन मुख्यमंत्री ने इसे 5 साल में पूरा करने का निर्देश दिया है। यानी यह अस्पताल पूरी तरह से 2026 तक बनकर तैयार हो जायेगा।
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इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने कहा कि पीएमसीएच दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा अस्पताल होने जा रहा है। 5,540 करोड़ रूपये की लागत से बन रहे इस विश्वस्तरीय अस्पताल में मरीजों के लिए फिलहाल 1117 बेड की व्यवस्था की गई है, लेकिन बहुत जल्द यहां 5,462 बेड की सुविधा उपलब्ध हो पायेगी। वहीं इस अस्पताल के छत पर एक हेलीपैड का प्रावधान किया गया है, जहां एयर एम्बुलेंस उतर सकती है। मंगल पांडे ने कहा इस अस्पताल का विस्तार होने के बाद बिहार सहित कई राज्य के लोग यहां आकर इलाज कर सकते हैं। उन्हें सभी सुविधा मुहैया कराई जाएगी। इलाज में मरीजों की अब कोई परेशानी नहीं होगी। हर तरह का इलाज अब इस अस्पताल में होगा।
22 फुट की ऊंची निरामया शिल्पकला की कलाकृति
- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
पीएमसीएच की नई बिल्डिंग में इमरजेंसी में 22 फुट की ऊंची निरामया शिल्पकला की कलाकृति रखी गई है। मेटल की बनी इस शिल्पकृति को कलाकार मुकुल गोयल ने बनाया है, जिसे दिल्ली से मंगवाया है। इस कलाकृति में हेल्प, होप और हील का संदेश दिया गया है। यह मूर्ति मां की गोद में बच्चा की प्रतिमूर्ति है। मूर्ति की खास बात यह है कि इसे बनाने के लिए मेडिकल से जुड़े शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। इसमें पीएमसीएच, सर्जरी, नेफ्रॉलॉजी, इमरजेंसी, एनाटॉमी यूरोलॉजी, नर्स, डॉक्टर, पैथोलॉजी कॉडियोलॉजी, निकू, पिकू, गाइनी, ड्रर्माटोलॉजिस्ट जैसे दो सौ अधिक मेडिकल शब्दों का इस्तेमाल करके इस मूर्ति को बनाया गया है। शाम होते ही इस मूर्ति से कई तरह की रंगीन रोशनी निकलेगी। एक लाइट नीचे और ऊपर से चार लाइट इस मूर्ति के शब्दों को चरितार्थ करते दिखेंगे। यह मूर्ति मां की आंचल का एहसास कराता है।