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Interview: 'वह बच्चे हैं, 10 साल काम करें तो मौका मिलेगा', बिहार के मंत्री का तेजस्वी पर तंज; पढ़ें खास बातचीत

Tue, 14 Jan 2025 03:49 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया

सार

Bihar Minister Santosh Suman : बिहार के आईटी, आपदा और लघु जल संसाधन मंत्री संतोष कुमार सुमन उर्फ संतोष सुमन मांझी ने 'अमर उजाला' से बातचीत में विभाग से लेकर बिहार की राजनीति पर क्या कुछ कहा, जानने के लिए पढ़ें पूरा इंटरव्यू।
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बिहार के मंत्री संतोष कुमार सुमन ने विभाग से लेकर राजनीति तक के सवालों का विस्तार से जवाब दिया। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
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खरमास आज खत्म हो रहा है। बिहार की राजनीति पहले से गरम है। बिहार सरकार निवेशक सम्मेलन से लेकर रोजगार तक की बात कर रही है, जबकि विपक्ष कभी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पाला बलदने तो कभी अफसरशाहों के हाथ में सरकार होने की बात कह राजनीति को गरमाए हुए है। इस बीच मंत्रिमंडल विस्तार और बदलाव की भी तैयारी चल रही है। ऐसे में, 'अमर उजाला' ने एक्सक्लूसिव इंटरव्यू की शृंखला को आगे बढ़ाते हुए राज्य के आईटी, आपदा और लघु जल संसाधन मंत्री संतोष कुमार सुमन से हर मुद्दे पर विस्तार से बात की।

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बिहार के सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री आप पहली बार बने हैं। लगभग एक साल का कार्यकाल हो गया। बिहार को आईटी हब जैसा कुछ बनाने का प्लान है? है तो वह कहां अटका है?
आईटी मंत्री पहले भी लोग बने हैं। जब हम बने तो विभाग फोकस में आया है। मुझे कहते हुए गर्व हो रहा है कि बहुत सारे निवेशक आए हैं। बहुत निवेशकों के साथ एमओयू साइन हुआ है। पांच-छह कंपनियों के साथ 600 करोड़ रुपये से ज्यादा का इकरारनामा हुआ है। आने वाला समय में इस सेशन के अंत तक 4000 करोड़ का निवेश होगा। बिहार सरकार ने आईटी पॉलिसी बनाई है। मुख्यमंत्री के निर्देशन में आईटी पॉलिसी के तहत सभी जगह बिजली के क्षेत्र में सब्सिडी देते हैं। बिहार पहला राज्य होने जा रहा है, जहां जीएसटी में भी सब्सिडी मिलेगी। सब मिलाकर 24 नीतियां हैं, जिससे निवेशकों के लिए बिहार में निवेश आसान होगा। हम जमीन मुहैया कराएंगे। बिजली की सुविधा देंगे। जो लोग 1000 करोड़ से ज्यादा का निवेश करना चाहते हैं या 1000 लोगों को रोजगार देना चाहते हैं, उनके हिसाब से योजनाओं को लाएंगे। बिहार इस क्षेत्र में बहुत आगे बढ़ रहा है। पटना में आईटी टावर बनाने जा रहा है। बहुत जगह पर आईटी पार्क बनाने का विचार आया है। हम लोग ग्रीन सेक्टर में भी काम कर रहे हैं। यह साल आईटी क्षेत्र का रहेगा। आईटी में बड़े-बड़े निवेशक आएंगे। पांच साल बाद बिहार बेंगलुरु, हैदराबाद की तरह आईटी हब बन जाएगा। बिहार के बच्चे वापस यहां आकर काम करना चाहेंगे। आईटी कंपनियों को भी फायदा होगा। 
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पिछले दिनों निवेशकों का सम्मेलन हुआ, उसमें क्या संभवनाएं लगीं? चुनाव के पहले कुछ जमीन पर दिखेगा?
यह एक शुरुआत है। बहुत से कंपनियां आ रही है। इस साल के अंत तक 4000 करोड़ का निवेश आईटी के क्षेत्र में होगा। अगले 5 साल में 1.80 लाख करोड़ का निवेश का प्रस्ताव आया है। बिहार इस क्षेत्र में भी बहुत आगे बढ़ रहा है। उद्योग विभाग हो या अन्य विभाग, सब मिलकर काम कर रहे हैं। क्योंकि कोई भी आईटी के लोग आते हैं। बिहार सरकार सीएम नीतीश कुमार के निर्देशन में बहुत आगे बढ़ रहा है। यह क्षेत्र अछूता था, लेकिन अब नहीं रहेगा। 

आपदा प्रबंधन विभाग भी आपके पास है। हर साल वज्रपात से इतनी मौतें हो रही हैं। आपका इलाका भी अति प्रभावित है। इस दिशा में सरकार क्या कर रही है?
जो भी आपदाएं होती हैं, सूचना के लिए एक लेयर बना हुआ है। डीएम और सीओ के माध्यम से जो भी बातें विभाग में आती है, सभी में मुआवजा मिलता है। सब का नियम बना हुआ है। मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि राज्य के खजाने पर आपदा पीड़ितों का पहला हक है। बिहार में जब बाढ़ आती है तो हम लोग त्वरित कार्रवाई करते हैं। साथ ही उनका घर बसाने के लिए पैसा दिया जाता है। कृषि की क्षति पूर्ति और पशु नुकसान पर बिहार सरकार ने 1000 करोड़ से ज्यादा राशि का वितरण किया है। सरकार ससमय फायदा पहुंचाती है। 

आपदा प्रबंधन के तहत बाढ़ से बचाव को लेकर क्या हो रहा है? कोसी का इलाका पूरे साल परेशान रहता है। आपदा भले बाढ़ के समय आती है, लेकिन उसके बाद भी संकट बना रहता है। इस दिशा में कोई काम आप बता सकेंगे?
जब नेपाल के इलाकों में भारी बारिश होती है, तब कोसी में पानी छोड़ा जाता है। कोसी क्षेत्र निचला इलाका है। दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, सीतामढ़ी समेत 12 से 16 जिला है, जो इससे पीड़ित हो जाते हैं। खगड़िया जाकर अंतिम होता है। एक तो आपदा है, जब प्राकृतिक आपदा आती है तब किसी के नियंत्रण में नहीं रहता है। हम लोग कोशिश कर रहे हैं कि ज्यादा से ज्यादा मुहैया कर सके। बिहार सरकार की तरफ से कोई कमी नहीं छोड़ी जाती है। इंटरनेशनल स्तर पर दो देशों का मामला है। बातें चल रही हैं कि कैसे इसके कम कर सकते हैं। भारी बारिश होता है तो नेपाल के पास भी मजबूरी होती है।

कल्याण विभाग की जगह आपने जिद कर ऐसे विभाग लिए थे, ताकि दूसरे बड़े विभागों में काम करने का मौका मिले। क्या सहजता से काम कर पा रहे हैं?
जिद नहीं कर सकते हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का विशेषाधिकार है कि किसके पास कौन-सा विभाग रहेगा। जो विभाग आपको मिलता है, उसमें आपको काम करना है। एससी-एसटी कल्याण विभाग मेरे पास था। वहां भी मैंने काम किया। अब जो विभाग मुझे मिले हैं, उसके लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद देता हूं। कोई विभाग खराब और अच्छा नहीं होता है। हर विभाग की अपनी खूबसूरती है। आप पर निर्भर करता है कि आप कैसे काम करते हैं। क्योंकि आप जनता के प्रति उत्तरदायी है। जनता आपको वोट देती है। चाहे मुख्यमंत्री हो या मंत्री, जनता के प्रति उत्तरदायी हैं। जनता के हितों के लिए काम करते हैं। बिहार के विकास के लिए काम करते हैं। 

विभागों में मंत्रियों की पूछ नहीं होने और अफसरों की चलती के बारे में बार-बार बात हो रही है। आपका क्या अनुभव है? तीन विभागों में कहीं अफसरों की चलती है या जन प्रतिनिधि के रूप में मंत्री ही सर्वेसर्वा हैं?
यह सब ही गलत है। चल रहा है या नहीं चल रहा है, इस शब्द का चयन नहीं होना चाहिए। लोकतंत्र है, लोकतंत्र में चार स्तंभ होते हैं। यह संविधान की खूबसूरती है। हरेक का एक-दूसरे पर नियंत्रण रहता है, ताकि कोई भ्रष्टाचार नहीं हो। विभाग में सबकुछ एक-दूसरे के समन्वय से चलता है। प्रधान सचिव भी मुख्यमंत्री व मंत्री के समन्वय से ही चलते हैं। नियमों से चलते हैं। यहां सुशासन की सरकार है। यहां शांति है, रोजगार मिल रहा है। समन्वय स्थापित नहीं रहेगा तो काम नहीं होगा। बाहर में बातें आती रहती है। कहीं कुछ ना कुछ ऐसी बातें आ जाती है, जिसमें मतभिन्नता आती है।
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तेजस्वी यादव डीके टैक्स की बात कर रहे हैं। कभी बिहार में दूसरे नाम से टैक्स की बात होती थी। क्या सीएम नीतीश कुमार के सामने कोई अधिकारी या दूसरा नेता इतना महत्वपूर्ण है कि वह टैक्स वसूल सके या उसकी मनमानी चले?
तेजस्वी यादव से ही एक सवाल है। जब वह सत्ता में  डिप्टी सीएम थे तो क्या उन्हें टैक्स मिलता था? अगर टैक्स मिलता है तो सत्ता में रहकर चुप क्यों रहते हैं। इसका मतलब टैक्स था तो वह भी वसूलते होंगे। वह भी टैक्स लेते रहे हैं। वह भी उसमें लिप्त हैं। पहले अपने गिरेबान में झांक कर देखें। आप आरोप-प्रत्यारोप लगाए और नामकरण कर दीजिए। कभी आरसीपी टैक्स कर दीजिए, कभी डीके टैक्स कर दीजिए। सत्ता में रहिए तो चुप रहिए। इसका मतलब है कि आप भी टैक्स लेते हैं। यह सब फालतू बातें हैं। विपक्ष में हैं तो कुछ ना कुछ बोलना है। जनता को बरगलाना है। क्षमता है नहीं और कह देते हैं कि माई बहन सम्मान योजना देंगे। तेजस्वी यादव अभी बच्चा हैं। अभी और सीखना है उन्हें। अभी परिपक्व नहीं हुए हैं। बिहार में 10 साल और घूमेंगे। 10 साल बाद जनता का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। तब मौका मिल सकता है। घबराहट नहीं होनी चाहिए। क्योंकि जल्दी और बेचैनी से कुछ नहीं होता है। सपने देखने से हर सपना साकार नहीं होता है। इसके लिए काम और मेहनत करनी पड़ती है। तेजस्वी यादव को मेहनत करनी चाहिए। फालतू की बातें छोड़ दें। उन्हें भी दो बार डिप्टी सीएम बनने का मौका मिला। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के रहमोकरम पर बने। जब कुर्सी पर होते हैं तो चुप क्यों हो जाते हैं? वहां पर बोलते ना। उनका कहना है कि जब हम रहते हैं तो सब साफ-सुथरा हो जाता है। जब हम निकल जाते हैं तो सरकार बदनाम हो जाती है। पहले अपने पिताजी के जंगल राज की बात करें।
(इनपुट- रंजन सिन्हा, गया)

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