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Chhath Puja 2024 : एम्स दिल्ली में कैंसर से जूझ रहीं शारदा सिन्हा की छठी मइया से गुहार, अब चर्चा में यह रिलीज

Sat, 02 Nov 2024 09:15 AM IST
आदित्य आनंद अंजिता सिन्हा, पटना

सार

Sharda Sinha : लोकपर्व आस्था के महापर्व छठ पर हर जगह शारदा सिन्हा के गाये गीत बज रहे हैं। इस बीच एम्स में कैंसर से जूझ रहीं शारदा सिन्हा ने छठ पर नया एलबम जारी किया है। उनके करीब रहीं लेखिका ने इस बहाने शारदा सिन्हा के 
समर्पण-संघर्ष को याद किया।  
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शारदा सिन्हा कई वर्षोँ से कैंसर से जूझ रहीं, जिसका खुलासा अब जाकर किया है। - फोटो : amar ujala digital
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विस्तार
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दुखवा मिटाईं छठी मईया... स्वर साधिका शारदा सिन्हा ने छठी मईया से गुहार लगाई है। स्वास्थ्य समस्या से जूझ रही 72 वर्षीय शारदा सिन्हा को विश्वास है कि छठी मईया उनकी पुकार सुनेंगी और वे अपने प्रशंसकों के बीच स्वस्थ होकर ज़रूर लौटेंगी। लगभग छह दर्जन छठ के गीतों को अपने स्वरों से सजा चुकीं शारदा सिन्हा हर साल एक नया छठ गीत का वीडियो रिलीज करती हैं। सो, इस सिलसिला को उन्होंने आगे बढ़ाने की इच्छा अपने बेटे अंशुमान से जाहिर की और अंशुमान ने 'दुखवा मिटाईं छठी मईया' का ऑडियो रिलीज किया। अस्वस्थ होने की वजह से गाने का वीडियो नहीं बन पाया, इसलिए इसका ऑडियो फॉर्मेट ही रिलीज किया गया है। शारदा सिन्हा ने जिस श्रद्धा भावना से अभिभूत होकर इस गाने को गाया है, यह उनके प्रशंसकों के लिए नायाब तोहफ़ा है। 

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छठ पर हर जगह बज रहा- 'रुनकी झुनकी बेटी मांगीला, पढ़ल पण्डितवा दामाद  
पटना के घाटे पर देब हम अरघिया ए छठी मईया... सहित अन्य छठ गीतों के स्वर घर-घर में गुंजायमान हैं। स्वर कोकिला पद्मभूषण शारदा सिन्हा के छठ गीतों की लोकप्रियता ऐसी है कि उनकी आवाज से ही माहौल बनता है। शारदा सिन्हा के गाये छठ गीतों के बोल देश के विभिन्न हिस्सों तक ही सीमित नहीं, वरन सात समंदर पार भी बसे बिहार एवं यूपी के छठ व्रतियों के बीच गुंजायमान होते हैं। इस बीच, लोगों की जेहन में रचीं-बसीं सुप्रसिद्ध लोक गायिका शारदा सिन्हा अपनी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण अस्पताल में भर्ती हैं। ऐसे में, उनके लाखों प्रशंसकों के हाथ दुआओं के लिए उठे हैं। वे छठी मईया और सूरज देव से शारदा सिन्हा के शीघ्र स्वस्थ होने की  प्रार्थना कर रहे हैं- हे सुरुज देव, हे आदित नाथ सुन लीं अरजिया हमार...। उन्हें छठी मईया पर पूरा विश्वास है कि उनकी प्रार्थना का असर होगा और शारदा सिन्हा उनके बीच स्वस्थ होकर आएंगी और लोकगीतों के स्वरों को और ऊंचाई मिलेगी।

पिछले महीने पति के देहांत के बाद अपनी बीमारी की जानकारी सार्वजनिक की
पिछले महीने शारदा सिन्हा के पति ब्रजकिशोर सिन्हा का ब्रेन हेमरेज के कारण देहांत हो गया। जीवनसाथी के बिछोह से उन्हें मर्मान्तक पीड़ा हुई और उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ने लगी। उन्हें नई दिल्ली स्थित एम्स में भर्ती कराया गया है और ऑन्कोलॉजी विभाग में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है। उनके पुत्र अंशुमान सिन्हा ने बताया कि शारदा सिन्हा 2017-18 से मल्टीपल मायलोमा से पीड़ित हैं और उनका इलाज लगातार मुंबई और दिल्ली के डॉक्टरों की देखरेख में चल रहा था। बावजूद उन्होंने अपनी संगीत यात्रा जारी रखी है।

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लोक गायिका शारदा सिन्हा के साथ अपने अनुभवों को अंजिता सिन्हा ने 'अमर उजाला' के लिए शेयर किया। - फोटो : amar ujala digital
पति को सारा श्रेय देती रही हैं शारदा सिन्हा, ससुराल का वाकया भी अहम
इन दिनों एम्स में भर्ती हैं, लेकिन इससे पहले पटना में मेरा उनसे अक्सर मिलना होता था। चाहे जितनी बार बात हुई, वह अपनी संगीत यात्रा की लयबद्ध रवानी के लिए पति को सारा श्रेय देती रहीं। वैसे, मैं गवाह भी हूं कि लोकगीतों की परंपरा को पिछले पांच दशक से नित नए आयाम देतीं शारदा सिन्हा को अपार लोकप्रियता यूं ही नहीं मिली। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने संघर्षों का लंबा रास्ता तय किया है। शारदा सिन्हा ने चार-पांच वर्ष की अवस्था से ही गाना शुरू कर दिया था। उनके पिता सुखदेव ठाकुर ने शारदा जी के गायन कला को विस्तृत फलक पर लाने के लिए प्रेरित किया। इस तरह शारदा की प्रारंभिक और विधिवत शिक्षा पंडित रघु झा, पंडित सीताराम हरि दांडेकर और पन्ना देवी के सानिध्य में शुरू हुई। उन्होंने भारतीय नृत्य कला मंदिर पटना से मणिपुरी नृत्य में नृत्य विशारद की परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया।

कला साधना में रत शारदा सिन्हा का विवाह 1971 में समस्तीपुर के एक कॉलेज के व्याख्याता ब्रजकिशोर सिन्हा से हुआ। संगीत की प्रवीण शारदा सिन्हा ने स्टेज पर गाते रहने की ख्वाहिश जाहिर की तो मैथिली भाषा मे उनकी सास ने अपना हुक्मनामा सुनाया और कहा कि 'घर आंगन में दाई-माई जकाँ जेबाक अछि त गाऊं, बाहर में स्टेज पर नहिं जाए देब'। स्टेज पर गाने से स्पष्ट रोक के सास के इस आदेश ने शारदा जी को मायूस कर दिया और अपना ख्वाब धुंधला होता नजर आया। तभी उनके पति ने आगे बढ़कर उनके ख्वाबों को हसीन रंगों से भर देने के अंदाज़ में कहा- "आप ज़रूर गाइएगा।" इसे याद करते हुए शारदा सिन्हा ने अपने दिवंगत हो गए जीवनसाथी के श्राद्ध के दिन उनकी तस्वीर पर माल्यार्पण करते हुए भावुक स्वरों में अपनी स्वरांजलि देते हुए रुंधे गले से पति के पसंदीदा गीतों में शामिल गाना गाया- "लाल सिंदूर बिन मंगियो ना सोभे, सइयाँ रे बिन सेजिया न सोभे राजा।" 
                         
भोजपुरी, बज्जिका, मगही और मैथिली भाषा में गाए गीत
शारदा जी ने बिहार गौरव, भोजपुरी कोकिला, बिहार रत्न, भिखारी ठाकुर सम्मान, मिथिला विभूति सहित कई अन्य सम्मानों के साथ पद्मश्री और पद्मभूषण जैसे सम्मान प्राप्त किए। समस्तीपुर महिला कॉलेज में संगीत विभाग की विभागाध्यक्ष के पद से अवकाश प्राप्त कर चुकीं शारदा सिन्हा ने अब तक भोजपुरी, बज्जिका, मगही और मैथिली भाषा में विवाह औऱ छठ के सैकड़ों पारम्परिक गीत गाये हैं। इतनी व्यस्तता के बावजूद उन्होंने घर-परिवार, पति, बच्चे और प्रोफेशन के बीच संतुलन बनाए रखा। यह सब आसान नहीं था, लेकिन पति और दोनों बच्चों बेटी वंदना और पुत्र अंशुमान के सहयोग ने हर मुश्किलों के दरम्यान एक मुकम्मल रास्ता बना लेंने का उन्हें जज़्बा दिया।                      

पति के कारण पान चखा तो शौकीन हो गई, डॉक्टरी सलाह पर छोड़ा     
पान, दही, करेले का भरवां, पनीर और हरी मिर्च का भरवां खाने की शौकीन शारदा जी ने पिछले कुछ वर्षों से डॉक्टरों की सलाह पर पान खाना छोड़ दिया है। इस क्रम में वे एक वाकया सुनाती हैं। शादी के शुरुआती दिनों में वे अपने पति के पान खाने की आदत से परेशान थीं और इस बात पर अक्सर अपने पति से उनका झगड़ा होता। फिर एक दिन उनके पति ने शारदा जी को मीठा पान खिलाया। पान में डाली गई खुशबू उन्हें भा गई और फिर ज़रदे की खुशबू भी भाने लगी तो पान खाना उनकी भी आदतों में  शुमार हो गया। लेकिन, अब डॉक्टरी सलाह पर पान छोड़ चुकी हैं। बहरहाल, शारदा सिन्हा की लंबे और स्वस्थ जीवन की शुभकामनाएं उनके प्रशंसक उन तक विभिन्न माध्यमों से पहुंचा रहे हैं- ए छठी मईया सुन लीं अरजिया हमार...।
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