नये राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और बिहार के पूर्व गवर्नर राजेंद्र आर्लेकर।
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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की आहट अब तेज हो रही है। बिहार के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर की जगह केंद्र ने अल्पसंख्यक चेहरे को चुनावी राज्य में भेजा है। केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को बिहार लाया जा रहा है, जबकि यहां से अर्लेकर वहां भेजा जा रहा। लंबे समय के बाद बिहार में किसी अल्पसंख्यक चेहरे को राज्यपाल बनाया गया है। यह राजनीतिक पद नहीं, लेकिन इससे सरकार की छवि को सहजता जरूर मिलती है। इससे पहले, 1993-1998 तक यहां डॉ. अखलाक-उर-रहमान किदवई बिहार के राज्यपाल रहे थे।
जानिए राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर कैसे रहे हैं खास
राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर 14 फरवरी 2023 को बिहार के राज्यपाल की जिम्मेदारी संभाली थी और अब उन्हें केरल का 23वां राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वह बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े रहे। वे 1989 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए। वे 1980 के दशक से गोवा भाजपा के सक्रिय सदस्य रहे हैं। वे गोवा सरकार में कैबिनेट मंत्री और गोवा विधान सभा के पूर्व अध्यक्ष भी रहे हैं। वह हिमाचल प्रदेश के भी राज्यपाल रह चुके हैं। बिहार के बाद अब केरल के राज्यपाल की जिम्मेदारी संभालेंगे।
सत्याग्रह आंदोलन पर दिया था बयान
बिहार के पूर्व राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने शनिवार को गोआ में सत्याग्रह आंदोलन को लेकर एक विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि ब्रिटिश शासकों ने सत्याग्रह की वजह से नहीं बल्कि भारत के लोगों के हाथ में हथियार देखकर भारत छोड़ दिया था। उन्होंने आगे कहा कि अंग्रेजों को इस बात का एहसास हो गया था कि अब भारत के लोग किसी भी हद तक जा सकते हैं। हालांकि उनके इस बयान पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड ने आपत्ति भी जताई थी।
आरिफ मोहम्मद खान भी बयानों की वजह से रहे हैं चर्चित
बिहार के नये राज्यपाल बने आरिफ मोहम्मद खान अपने बयानों की वजह से चर्चित रहे हैं। इनके नाम की चर्चा सीएए को लेकर भी खूब हुई थी। आरिफ मोहम्मद खान ने अपने एक बयान में कहा था कि “सीएए का उद्देश्य पड़ोसी देशों में धार्मिक अल्पसंख्यकों को सम्मानजनक जीवन प्रदान करना है। यह कानून भारतीय नागरिकों के अधिकारों को प्रभावित नहीं करता और संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों के अनुरूप है।”