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Bihar: सुपौल के अंकित ने यूपीएससी की IES परीक्षा में हासिल किया 16वां रैंक, चौथे प्रयास में हासिल की सफलता

Sun, 24 Nov 2024 12:41 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

UPSC Exam: अंकित ने बताया कि इंजीनियरिंग फर्स्ट ईयर के दौरान यूपीएससी से सिविल इंजीनियरिंग सविर्सेस में जाने का संकल्प लिया। कॉलेज के ही उनके सीनियर छात्र प्रमितदेव मल्लिक ने वर्ष 2019 में यूपीएससी से सिविल इंजीनियरिंग की परीक्षा ऑल इंडिया रैंक 2 हासिल किया था।
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अंकित आनंद। - फोटो : सोशल मीडिया।
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विस्तार
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संघ लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा आयोजित इंजीनियरिंग सर्विसेज एग्जामिनेशन (आईईएस) का परीक्षा फल शुक्रवार की शाम जारी किया गया। जिसमें जिला मुख्यालय के वार्ड-8 निवासी अंकित आनंद (26 वर्ष) ने ऑल इंडिया 16वां रैंक हासिल किया है। उनकी सफलता से परिवार के सदस्य और शुभचिंतकों सहित शहरवासियों में खुशी व्याप्त है। अंकित अपनी सफलता का श्रेय माता दर्शना सिंह, पिता मनोज कुमार सिंह सहित परिजनों और दोस्तों को देते हैं। अंकित आनंद बताते हैं कि चौथे प्रयास में सफलता मिली है। जिला मुख्यालय स्थित आरएसएम पब्लिक स्कूल से दसवीं तक की पढ़ाई की। जहां से 95 प्रतिशत अंकों के साथ दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण किया।

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इंटर की परीक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्णता हासिल की
आगे की पढ़ाई लाल बहादुर शास्त्री स्मारक सीनियर सेकेंडरी स्कूल आरकेपुरम नई दिल्ली से की। जहां मैथ से इंटर की परीक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्णता हासिल की। इसके बाद जादवपुर यूनिवर्सिटी कोलकाता से सिविल इंजीनियरिंग में 82.41 अंक के साथ प्रथम श्रेणी से स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की। बता दें कि अंकित आनंद के पिता मनोज कुमार सिंह बिजनेसमैन हैं। जबकि माता दर्शना सिंह गृहिणी हैं। अंकित दो भाई में बड़े हैं। छोटा भाई आयुष आनंद भी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं।

इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान आईईएस बनने का लिया संकल्प
अंकित ने बताया कि इंजीनियरिंग फर्स्ट ईयर के दौरान यूपीएससी से सिविल इंजीनियरिंग सविर्सेस में जाने का संकल्प लिया। कॉलेज के ही उनके सीनियर छात्र प्रमितदेव मल्लिक ने वर्ष 2019 में यूपीएससी से सिविल इंजीनियरिंग की परीक्षा ऑल इंडिया रैंक 2 हासिल किया था। अंकित ने  प्रमितदेव से अपने करियर को लेकर मार्गदर्शन लिया। जिसके बाद पहली बार वर्ष 2021 और फिर 2022 में दूसरी बार प्रयास किया, लेकिन असफल रहे। हालांकि तीसरे प्रयास में वर्ष 2023 में सफलता मिली, लेकिन वह रैंक से संतुष्ट नहीं थे। इस कारण चौथी बार 2024 में पुन: परीक्षा दी और ऑल इंडिया 16वां रैंक हासिल किया। अंकित कहते हैं कि बेहतर रैंक के लिए आगे भी प्रयास करेंगे। वह रेलवे में जाना चाहते हैं।
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पढ़ाई के दौरान दिन में कमरे से केवल दो बार निकलते थे, वह भी केवल खाने के लिए
अंकित आनंद ने बताया कि इससे पहले जब भी असफल हुए तो निराशा होती थी, लेकिन परिवार के सदस्य हौसला बढ़ाते रहे। तैयारी को लेकर कमरे से दिनभर में केवल दो बार ही बाहर निकलते थे, वो भी खाने के लिए। शुरू से मन में इच्छा थी कि कुछ अलग किया जाए, खुद की अपनी पहचान हो। पढ़ाई के दौरान अकेला ही रहता था, दोस्तों से दूरी बनाए रखी। रोजाना औसतन 12 घंटे पढ़ाई करते थे। अच्छी नींद भी जरुरी थी। इसलिए 24 घंटे में 10 घंटे की नींद लेते थे। पहले दो प्रयास में असफलता का मुख्य कारण सिलेबस समय पर पूरा नहीं हो पाना और पाठ्यक्रम का  सही से रिविजन नहीं हो पाना रहा। जिसे बाद में पूरा किया और उसके बाद दोनों ही प्रयास में सफलता भी मिली।

सिलेबस पूरा करना अनिवार्य, रिविजन भी उतना ही जरूरी
अंकित कहते हैं कि दिन में रोजाना औसतन चार घंटे ऑनलाइन क्लास करता था। शेष समय सेल्फ स्टडी करता था। वे बताते हैं कि किसी भी परीक्षा में सफलता हासिल करने के लिए सिलेबस पूरा करना अनिवार्य है। इसका नियमित रिविजन भी करना जरुरी है। पिछले वर्ष में पूछे गए प्रश्नों का रिविजन और परीक्षा के पूर्व टेस्ट सीरीज जरूरी है। जरूरी नहीं है कि पहले प्रयास में ही सफलता मिले, असफलता से घबराना नहीं चाहिए। बल्कि पिछली गलतियों को सुधार कर पहले से बेहतर तैयारी के साथ प्रयास करें। सच्ची लगन और कड़ी मेहनत कभी विफल नहीं होती।

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