बिहार सरकार की एक महिला पदाधिकारी पर राज्य बाल संरक्षण समिति, पटना ने कार्रवाई की है। कार्रवाई के तहत विभाग ने उक्त महिला अधिकारी का न सिर्फ वेतन रोक दिया है बल्कि उसके करतूत को देखते हुए उससे 24 घंटे के अंदर स्पष्टीकरण की मांग भी कर दी है। महिला फिलहाल शेखपुरा जिला में अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण विभाग में पदस्थापित सरोज पासवान है और मामला कटिहार जिला से जुड़ा है।
माता-पिता की पहचान होने के बाद पर भी की गई लापरवाही
सरोज पासवान अपने कटिहार पदस्थापन के दौरान वर्ष 2022 में जिला बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक थी। उस वक्त विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान को फीस देकर एक महिला ने नवजात को गोद लिया था। हालांकि कुछ दिनों के बाद उसके माता-पिता की पहचान होने पर विभाग ने विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान, कटिहार में आवासित बालक को बेल्जियम की दत्तक ग्राही माता को गोद दिये गये न्यायालय आदेश को निरस्त करवाते हुए दत्तक ग्राही फीस को वापस करने एवं बालक को जैविक माता-पिता के सुपुर्द करने हेतु सरोज पासवान को निर्देश दिया गया था। लेकिन इस महिला अधिकारी सरोज पासवान ने विभाग के आदेश के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की। जिसके बाद राज्य कार्यालय एवं केन्द्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण, नई दिल्ली ने पत्र के माध्यम से बार-बार निर्देशित किया, लेकिन सरोज पासवान ने कोई कार्रवाई नहीं की। आदेश का उल्लंघन करने के बाद राज्य बाल संरक्षण समिति, पटना ने उनके वेतन निकासी पर रोक लगाते हुए स्पष्टीकरण का जबाब मांगा है। विभागीय जानकारी के अनुसार समाज कल्याण विभाग बिहार पटना से इस संबंध में एक पत्र कटिहार और शेखपुरा के डीएम को भी भेजा गया है। उक्त महिला अधिकारी शेखपुरा के अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के अलावा सामान्य शाखा के भी प्रभार में हैं।
जानिए विभाग ने क्या लिखा पत्र में
राज्य बाल संरक्षण समिति बिहार पटना ने पत्र के माध्यम से कहा कि "विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान, कटिहार में आवासित बालक को बेल्जियम की सत्ता ग्राही माता को गोद दिये गये न्यायालय आदेश को निरस्त करवाते हुए दत्तक ग्राही फीस को वापस करने एवं बालक को जैविक माता-पिता के सुपुर्द करने हेतु आपको नियमित रूप से निर्देश दिया गया था। 13 जनवरी 2022 को बच्चे के जैविक माता-पिता की पहचान होने के बावजूद भी अभी तक न ही दत्तक ग्रहण आदेश जिला पदाधिकारी से निरस्त करवाते हुए बालक को जैविक माता-पिता को सुपुर्द किया गया और न ही दत्तक ग्रहण हेतु प्राप्त राशि को वापस करवाया गया है। इसको लेकर राज्य कार्यालय एवं केन्द्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण, नई दिल्ली द्वारा पत्र के माध्यम से बार-बार निर्देशित किये जाने के बावजूद आपके द्वारा इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं किया जाना, यह आपके अवज्ञा पूर्ण आचरण तथा कर्तव्य की अवहेलना का द्योतक है। आपके द्वारा कर्तव्य निर्वहन में की गई लापरवाही के कारण आपका वेतन तत्काल प्रभाव से स्थगित करते हुए निर्देश दिया जाता है कि पत्र प्राप्ति के 24 घंटे के अंदर अपना स्पष्टीकरण समर्पित करें। आप बताएं कि उक्त मामले का निष्पादन आपके द्वारा ससमय क्यों नहीं किया गया और आपके इस कार्य के लिए आप पर क्यों नहीं अनुशासनिक कार्रवाई आरंभ करने की अनुशंसा की जाए"।