जन सुराज अभियान के तहत बिहार की पदयात्रा पर निकले चुनावी राजनीतिकार प्रशांत किशोर मधेपुरा जिले में अपनी पदयात्रा पूरी कर शनिवार को सुपौल के त्रिवेणीगंज पहुंचे। जहां पीके ने छह अलग अलग कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इस दौरान लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया। शनिवार को पीके ने त्रिवेणीगंज प्रखंड क्षेत्र में करीब छह किलोमीटर की पदयात्रा की। वही जन सुराज संवाद के दौरान प्रशांत किशोर ने लोगों को जन सुराज के उद्देश्यों की जानकारी दी। इस दौरान वह परंपरागत राजनीति को लेकर हमलावर नजर आए। संवाद के दौरान उन्होंने सीएम नीतीश कुमार, राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव सहित कई शीर्ष नेताओं पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि जन सुराज का प्रयास है कि बिहार में जनता का राज स्थापित हो, ताकि यहां की जनता को पलायन करके गुजरात, महाराष्ट्र या दिल्ली मजदूरी करने नहीं जाना पड़े।
किसी नेता के बेटे को राजा बनाने के नहीं दीजिएगा वोट
प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार की जनता को अपने वोट की ताकत का अंदाजा नहीं है। आपके ही वोट की ताकत है कि एक चाय बेचने वाले मोदी जी को आपने देश का प्रधानमंत्री बना दिया। भैंस चराने वाले लालू जी को आपने तीस वर्षों से बिहार का राजा बनाया हुआ है। इसलिए एक बार आप भी स्वार्थी होकर अपने बच्चों के लिए वोट दीजिए, अपने बच्चों के लिए स्वार्थी बनिए। नेता आपसे कहेंगे कि देश के लिए वोट करें, बिहार के विकास के नाम पर आपसे वोट मांगेंगे। कोई आपसे आपकी जाति के नाम पर वोट मांगेगा, लेकिन याद रखना चुनावों के बाद नेता जी तो हेलीकॉप्टर में उड़ जाएंगे, आपके बच्चे ऐसे ही बिना कपड़े और बिना चपल के घूमते रहेंगे। जिन नेताओं को आपने राजा बनाया उन्होंने न तो आपके बच्चों की शिक्षा के लिए कुछ किया है और न ही रोजगार के लिए। इसलिए अब समय आ गया है कि आप स्वार्थी बनकर अपने बच्चों के लिए वोट दें ताकि आपके बच्चों को पलायन न करना पड़े, बच्चों को गांव में ही अच्छी शिक्षा मिले और इस महंगाई के दौर में अपने पालन पोषण के लिए 2000 की पेंशन मिल सके। लालू जी को अपने बेटे को राजा बनाना है। लेकिन आप किसी नेता के बेटे को राजा बनाने के लिए वोट मत दीजिएगा, अगली बार अपने बच्चों के लिए वोट दीजिएगा।
मेरा साथ मत दीजिए, अपने स्वार्थ के लिए कीजिए वोट
प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार के कई जिलों में लंबे अरसे से एक ही व्यक्ति या परिवार के लोग सांसद और विधायक हैं। लेकिन विकास कार्यों में उनकी उपलब्धि कुछ नहीं है। यह सब आपकी बेपरवाही का नतीजा है और फिर आप ही विकास कार्यों से अछूता रहने का रोना रोते हैं। कोई मंदिर बनवाने के नाम पर तो कोई जात और कोई पार्टी के नाम पर वोट ले जाता है। कोई कुछ पैसे खिलाता है और कोई चुनाव में मुर्गा भात खिला देता है। फिर अगले पांच साल के आप मुर्गा बन जाते हैं। आपको अपने परिवार और अपनी गरीबी की चिंता नहीं है। लोग कह रहे हैं कि प्रशांत किशोर का हाथ मजबूत कीजिए। हमको आपका साथ नहीं चाहिए। आपके 500 बच्चे कोसी में बह गए। फिर भी आप उसी जदयू को वोट दीजिएगा। आप अपने बच्चों के साथ खड़े नहीं हो पाए, मेरा साथ क्या दीजिएगा।