वोट प्रतिशत के आंकड़ों की कहानी पढ़िए।
- फोटो : अमर उजाला
23 जिलों में 7088 मतदान केंद्र बनाए गए थे। इनमें से करीब 1900 सिर्फ पटना में थे। वह भी सिर्फ पटना नगर निगम क्षेत्र में। गांव-देहात नहीं। खालिस शहरी। मतदान के लिए निकलने की अपील के तमाम वीआईपी प्रचार भी सबसे ज्यादा पटना वालों ने सुने। मगर, ठंड में यहां के वोटरों को जैसे काठ मार गया। जिन जिलों में 28 दिसंबर को नगर निकाय निर्वाचन था, उनमें अममून एक जैसी ही ठंड थी। फिर भी, सबसे खराब वोटिंग पटना में हुई। सबसे ज्यादा बूथ, सबसे ज्यादा सुविधा और सबसे ज्यादा जागरुकता-प्रचार के बावजूद। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी वोटिंग प्रतिशत के आंकड़े और भी ढेर सारी कहानियां सुना रहे हैं, ढर्रे बता रहे हैं।
वोट प्रतिशत के आंकड़ों की कहानी पढ़िए।
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शर्म और गर्व के नजरिए से सबकुछ समझिए
वोट प्रतिशत के आंकड़े बताते हैं कि पटना इस चरण के बाकी 22 जिलों से पिछड़ा ही, यहां के पुरुष भी महिलाओं से वोटिंग में पिछड़ गए। शर्मनाक स्थिति में दूसरे नंबर पर सीतामढ़ी और फिर मुंगेर का नाम है। पटना से थोड़ा ही ज्यादा प्रतिशत सीतामढ़ी का रहा, जबकि मुंगेर कुछ बेहतर स्थिति में रहकर भी खराब वोटिंग के मामले में तीसरा रहा। छोटा और अपेक्षाकृत पिछड़ा जिला खगड़िया इस चुनाव में गर्व के साथ उभरा, क्योंकि वोटिंग प्रतिशत में यह बाकी 22 जिलों से आगे रहा। अगर ठंड की बात ही होती तो पटना से सटे वैशाली में भी वोट प्रतिशत खराब होता। पटना के मुकाबले वैशाली का वोट 24 प्रतिशत ज्यादा था।
महिलाएं सिर्फ मुजफ्फरपुर-समस्तीपुर में पिछड़ी
वोट प्रतिशत का आंकड़ा बताता है कि महिलाओं का वोट प्रतिशत 23 में से 21 जिलों में पुरुषों के मुकाबले अच्छा रहा। महिलाएं मतदान करने में सिर्फ मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर में ही पिछड़ीं। पुरुषों के मुकाबले महिला वोटिंग के प्रतिशत में अंतर सबसे ज्यादा पश्चिम चंपारण में दिखा। यहां पुरुषों के मुकाबले महिला वोट 12.04 प्रतिशत ज्यादा था। इसके बाद खगड़िया में पुरुष वोट प्रतिशत के मुकाबले महिलाओं ने 10.87 प्रतिशत ज्यादा वोटिंग की। बेगूसराय में यह अंतर 9.61 प्रतिशत तो वैशाली में 8.48 प्रतिशत था। मतलब, इन जिलों में महिलाओं ने पुरुषों के मुकाबले वोट देने में खुद को आगे रखा।