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Bihar News: बिहार के कई जिलों में दवा दुकानें बंद, केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन की हड़ताल से मरीज परेशान

Wed, 20 May 2026 12:17 PM IST
Aditya Anand न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

Chemist Druggist Association Strike: ई-फार्मेसी के विरोध में केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर मंगलवार को बिहार में करीब 35 हजार दवा दुकानों का शटर डाउन कर दिया गया है। दवा कारोबारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर राज्यव्यापी हड़ताल और प्रदर्शन किया। राजधानी पटना समेत कई जिलों में सुबह से ही मेडिकल दुकानें बंद रहने से मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
 
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पटना में दवा दुकानें बंद। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार में दवा कारोबारियों की हड़ताल का असर मंगलवार को पूरे राज्य में देखने को मिल रह है। केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के बैनर तले दवा विक्रेताओं ने अपनी मांगों के समर्थन में दुकानों का शटर गिरा गया है। वह ई-फॉर्मेसी के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। राजधानी पटना के अशोक राजपथ, जीएम रोड, बेली रोड, आईजीआईएमएस के बाहर दवा दुकानें बंद हैं। यही हाल मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, गया, भागलपुर, दरभंगा और अन्य जिलों का भी है। यहां भी सुबह से ही मेडिकल स्टोर बंद रहे। बिहार केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष परसन कुमार सिंह ने कहा कहा कि 20 मई को रात 12 बजे तक राष्ट्रीय स्तर पर दुकानों को बंद करने का हमलोगों ने फैसला लिया है। सरकार से हमलोगों की मांग पर ध्यान दें। 

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बिहार केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के महासचिव प्रभाकर कुमार ने कहा कि ऑनलाइन दवा बिक्री से छोटे व्यवसाय प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने सरकार से ऑनलाइन दवा बिक्री पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। साथ ही बाजार में नकली दवाओं की बढ़ती शिकायतों को लेकर भी नाराजगी जताई और इस पर सख्त कार्रवाई की मांग की। पटना केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने सरकार से संबंधित अधिसूचनाओं को वापस लेने और दवा बिक्री के लिए नई नियामक व्यवस्था लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे दवा कारोबार में पारदर्शिता आएगी और मरीजों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी।

मजबूर होकर लेना पड़ा हड़ताल का फैसला
पटना में दवा कारोबारियों ने कहा कि उनकी मांगों पर लंबे समय से ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में मजबूर होकर राज्यव्यापी हड़ताल का फैसला लिया गया। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार जल्द समाधान नहीं निकालती है तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इधर, अचानक दवा दुकानें बंद होने से मरीजों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ गई। कई लोग जरूरी दवाओं के लिए इधर-उधर भटकते नजर आए। हालांकि, पटना समेत कई जगहों जन औषधी केंद्र खुल हैं। आम लोग यहां से दवा ले सकते हैं।
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मुजफ्फरपुर में 400 से अधिक दवा दुकानें बंद
मुजफ्फरपुर में ऑनलाइन दवा बिक्री और ई-फार्मेसी के विरोध में अखिल भारतीय दवा विक्रेता संगठन के आह्वान पर बुधवार को दवा दुकानों की 24 घंटे की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। जिले में 2500 से अधिक दवा दुकानें बंद रहीं, जबकि शहर की प्रमुख दवा मंडी जूरन छपरा में 400 से अधिक मेडिकल स्टोर पूरी तरह बंद रहे। केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि वर्तमान में ऑनलाइन दवा बिक्री पूरी तरह गैरकानूनी तरीके से संचालित हो रही है, जिससे खुदरा दवा दुकानदारों का कारोबार प्रभावित हो रहा है। संगठन का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में कई विसंगतियां हैं, जिन्हें दूर करने की आवश्यकता है।इधर, जिलेभर में मेडिकल स्टोर बंद रहने से मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि आपात स्थिति में मरीजों को राहत देने के लिए जिला प्रशासन ने शहर की पांच दवा दुकानों को खुला रखने का निर्देश दिया है। प्रशासन के अनुसार ब्रह्मपुरा, जूरन छपरा, माड़ीपुर और गौशाला रोड स्थित चयनित मेडिकल स्टोर खुले रहेंगे, ताकि जरूरतमंद मरीज आपात स्थिति में वहां से दवाएं खरीद सकें।

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