हमारे यहां शादी-बारात में एक चीज़ होती है जिसे कहते हैं 'सहबाला'। घर में ब्याह के दिन जब दूल्हा सजता है तो कोई नन्हा बालक भी सजाया जाता है। दूल्हे को मेहंदी लगती है, तो उसको भी लगती है। दूल्हा सूट पहनता है तो सहबाले को भी सूट पहनाया जाता है।
दूल्हे को पगड़ी बंधती है, तो उसको भी पहनाई जाती है। जब दूल्हे को तलवार दी जाती है, तो अगर वो नन्हा बालक बेहद बदमाश न हो, तो उसे भी नन्ही सी कटार दी जाती है। फिर दूल्हा और सहबाला दोनों को सजा-धजाकर घोड़ी पर बैठा दिया जाता है।
लेकिन जब बारात दुल्हन के यहां पहुंचती है, तो सहबाला बेचारा मारा-मारा फिरने लगता है। मां-बाप की गोद में मुंह बनाए पड़ा रहता है। सोचता रहता है कि यार अब कोई पूछ क्यों नहीं रहा। मंडी में सड़े सेब की तरह भाव मिनटों में अचानक क्यों गिर गए?
अचानक इस सहबाला की याद आई मुझे बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी का विधानसभा में एक बयान देख कर। उन्होंने कुछ दिन पहले विधानसभा में कहा था कि उनके डीएम-कलेक्टर उनसे ''झूठ बोलते हैं''।
'वे हँस रहे होंगे'
मांझी जी महाराज डीएम झूठ बोलते रहेंगे। और अगर संभलकर न चले, तो हो सकता है कि पड़ोसी राज्य झारखंड के सीएम रहे मधु कोड़ा की तरह उम्र का एक बड़ा हिस्सा जेल में भी बितवा देंगे।
अब मधु कोड़ा और उनके दो-चार संगी साथी तो जेल में हैं पर न जाने कितने डीएम, कलेक्टर, अफ़सर जिन्होंने उन तक छाछ पहुंचाने में न जाने कितना मक्खन मार लिया होगा, वे सब जाने कहां, किस नई बारात में नए दूल्हे और नए सहबाले के सामने झूम-झूमकर नाच रहे होंगे। पीछे बज रहा होगा 'ये देश है वीर जवानों का'।
और महाराज आपको अपने छिछले अनुभव से एक बात बताऊं जब आपने यह झूठ बोलने वाला बयान दिया होगा तो आप जिनके सहबाला बने हैं वह आपकी नादानी पर मुस्कराए होंगे। जिन पर आपने यह बयान दिया होगा, वे ठहाका मारकर हँसे होंगे और आपकी जाति से संबंधित कुछ बातें कही होंगी।
या तो श्रीमान सहबाला बने रहो या पिछड़ी जाति और उन महिला मुख्यमंत्रियों से व्यवस्था रूपी सांड को नाथने के गुर सीखो जिन्होंने अधिकारियों से खैनी छंटवाई या जूते उठवाए या तिनगी का नाच नचाने का कोई और रास्ता निकाल लिया।