विधानसभा सत्र की सातवें बैठक की शुरूआत से आशंका था कि आशंका थी कि सीबीआई और ईडी की राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के परिवार से हो रही पूछताछ को लेकर सत्ताधारी राजद विधायकों का हंगामा होगा, लेकिन बवाल विपक्ष ने शुरू किया। बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय कुमार सिन्हा ने उन्हीं मीडिया रिपोर्टों के हवाले से तमिलनाडु हिंसा का मामला उठाया और कहा कि सरकार को सदन में इसपर वक्तव्य देना होगा। विधानसभा अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी उन्हें पूरक प्रश्न पूछने के लिए कहते रहे, लेकिन विजय सिन्हा तमिलनाडु केस को लेकर राज्य सरकार को घेरते हुए तेज आवाज में बोलते रहे। इस बीच, भाई वीरेंद्र ने मांग उठाई कि राज्य में सीबीआई-ईडी आदि की जांच के लिए राज्य सरकार से अनुमति का प्रावधान किया जाए।
अपराध के सवाल पर विपक्ष का हंगामा
जो लोग धर्म मानते हैं, वह भी मंदिर से मूर्ति चोरी हो जाती है। ब्रिटेन, अमेरिका में भी अपराध होते हैं। मुख्यमंत्री भी कई बार कह चुके हैं कि हर आदमी ठीक नहीं हो सकता है।….गृह मंत्री के तौर पर मंत्री विजेंद्र यादव ने यह जवाब दिया तो विपक्षी सदस्य हंगामा करने लगे। विपक्षी सदस्यों ने कहा कि अपराध पर यह जवाब किसी हालत में स्वीकार्य नहीं है। BJP के MLC ने प्रजापति हत्याकांड और जेठूली कांड की न्यायिक जांच कराने की मांग की।
विधान परिषद में भी जमकर हंगामा
इधर, विधान परिषद में भी विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। विधान परिषद का कार्यवाही शुरू होने से पहले विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी की। BJP के सभी MLC ने एक साथ हंगामा करने लगे। उनकी मांग थी कि EBC और OBC आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। MLC प्रमोद चंद्रवंशी ने कहा कि EBC और OBC कमेटी गठित कर नगर निकाय चुनाव में आरक्षण दिया गया। राज्य सरकार पहले तो चुनाव कराया इसके बाद उसकी रिपोर्ट भी अब तक सार्वजनिक नहीं की गई। सुप्रीम कोर्ट इसको लेकर कई बार बिहार सरकार को निर्देश दे चुकी है कि रिपोर्ट सार्वजनिक करें लेकिन बिहार सरकार इसपर ध्यान नहीं दे रही।