मौतों का कारण अबतक सरकार जहरीली शराब नहीं बता रही, लेकिन गिरफ्तार धंधेबाजों के इकबालिया बयान से इसकी पुष्टि हो चुकी है। इस जानकारी के साथ ताजा खबर यह है कि सीवान में राजेश प्रसाद और धुरेंद्र मांझी नाम के दो लोगों की मंगलवार को भी जहरीली शराब ने जान ले ली, जबकि सुदर्शन महतो की पटना में मौत की खबर आ चुकी है। तीन नई मौतों से ज्यादा चौंकाने वाली घटना मंगलवार शाम करीब छह से साढ़े छह के बीच हुई। लोग चौंक गए कि मोतीलाल मांझी का बेटा जितेंद्र मांझी और स्व. मथुरा मांझी के बेटे शंकर मांझी व लोरिक मांझी ठीक हो रहे थे तो एम्बुलेंस उसे पटना के नाम पर लेकर कहां भागी। अस्पताल प्रशासन ने रिलीज करने की जानकारी दी, एम्बुलेंस वालों ने कहा कि पटना ले जाने कहा गया है और मरीज के परिजन इन दोनों के बीच हक्काबक्का दौड़ते रहे। कुछ देर बाद पता चला कि विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय कुमार सिन्हा के आने की सूचना पर यह किया गया। सदर अस्पताल के एक अधिकारी ने बताया कि भाजपा नेता ठीक हुए मरीजों से जहरीली शराब के बारे में बात करते, इसलिए ऐसा किया गया। इस बात में दम इसलिए है, क्योंकि रविवार को जब केस आने शुरू हुए थे तो 12 घंटे के लिए सदर अस्पताल का मुख्य द्वार भी बंद कर दिया गया था। अस्पताल से बाहर जहरीली शराब की बात जाने से रोकने के लिए यह किया गया था।