गया डीएम पहुंचे भू-अर्जन कार्यालय।
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बिहार के एक जिले में डीएम ने भू-अर्जन विभाग के लिपिक को सस्पेंड कर दिया। इस संबंध में बताया गया कि भू-अर्जन विभाग के द्वारा सारे कागजातों को जमा करने के बावजूद मुआवजा भुगतान की संचिका को काफी समय से लंबित रखा गया था। इस बात की लोगों ने डीएम शशांक शुभंकर से शिकायत की, जिसके बाद डीएम शशांक शुभंकर खुद भू अर्जन विभाग पहुंच गए। वह भू-अर्जन विभाग के लिपिक के पास जाकर उन्हें जल्द काम कर देने की बात कही। इस दौरान लिपिक के पास डीएम शशांक शुभंकर एक घंटे तक रुके रहे। तब उन्होंने कार्रवाई करते हुए लिपिक को सस्पेंड कर दिया। मामला गया जी का है।
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इस संबंध में आवेदक बालमुकुंद सिंह वजीरगंज ऐरू के निवासी हैं। इन्होंने गया जी के डीएम शशांक शुभंकर से एनएच 82 सड़क परियोजना में जमीन अधिग्रहण के एवज में अबतक मुआवजा भुगतान नही होने संबंधित शिकायत की। आवेदक ने कहा कि ज़िला भूअर्जन कार्यालय का कई बार चक्कर लगाया, लेकिन मुआवके भुगतान नही किया जा रहा है। इस शिकायत पर डीएम शशांक शुभंकर खुद आवेदक के साथ भूअर्जन कार्यालय पहुँच गये। वहां उन्होंने पूछा कि किस कारण से यह फाइल किस कर्मी के पास लंबित है? इस दौरान डीएम लगभग एक घंटे तक भूअर्जन कार्यालय में खड़े रहे और पीड़ित व्यक्ति के फाइल की तलाश करवाते रहे।
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ऐसी थी लापरवाही
लगभग एक घंटे के बाद फाइल खोजकर निकाली गई और फिर फाइल मिलने के बाद जिलापदाधिकारी शशांक शुभंकर ने पूरी कागजातों की जांच पड़ताल की। जांच के दौरान मुआवजे के भुगतान के लिये आवेदक के द्वारा दिए गये सारे कागजातों की जांच की गई। उन्होंने बताया कि पिछले 29 मार्च 2025 को सभी कागजात जमा कर दिए गये है, लेकिन इसके बाद भी मुआवजे की राशि अब तक नहीं मिली। इसके लिए भूअर्जन कार्यालय के लिपिक राजेश कुमार को आरोपी बनाया गया। इसके साथ-साथ कानूनगों धीरेंद्र कुमार पर बी ही लापरवाही करने का आरोप लगा है। उनपर आरोप है कि उन्होंने आवेदक के कागजातों को बिना देखे और बिना जांच किये ही यह रिपोर्ट दे दिया कि ख़ातियानी जमीन के साथ-साथ अन्य कागज एवं अन्य कागजात जमा नही किये गये हैं, जब कि जांच में सरे कागजात फाइल मेंशामिल थे।
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डीएम से दिए सख्त निर्देश
सारे मामले की जांच के बाद जिलापदाधिकारी शशांक शुभंकर ने लिपिक राजेश कुमार को तुरंत सस्पेंड कर दिया। जिलापदाधिकारी शशांक शुभंकर ने ज़िला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी की अध्यक्षता में कमिटी बनाया है, जिसमें डीसीएलआर सदर, ज़िला भूअर्जन पदाधिकारी एवं आवेदक को शामिल किया गया है। कमिटी पूरे मामले की बारीकी से जांच कर डीएम को जांच रिपोर्ट देगी। साथ ही कानूनगो के संदिग्ध कार्यशैली की भी जांच की जाएगी। डीएम ने जिला भूअर्जन पदाधिकारी से स्पष्टीकरण करते हुए पूछा है कि किन कारणों से अब तक मुआवजा भुगतान लंबित रखा गया है। उन्होंने जिला भूअर्जन पदाधिकारी एवं अन्य सभी कर्मियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि यदि कागजात जमा रहने के बावजूद मुआवजे का भुगतान नहीं हो पाता है, तो अगले 7 दिनों में उन सभी मामलों में मुआवजा भुगतान करवाना सुनिश्चित करे।