बिहार का विधानसभा चुनाव अब अपने अवसान की ओर है। चार चरण संपन्न हो चुके हैं और लोगों की निगाहें अब अंतिम चरण पर हैं। चुनाव का यह चरण सबसे महत्वपूर्ण भी माना जा रहा है क्योंकि मुस्लिम और यादव बहुल इस सीमांचल इलाके में दोनों महागठबंधनों के अलावा तीसरे खिलाड़ी माने जा रहे एमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी की एंट्री ने सबकी दिलचस्पी इसमें बढ़ा दी है।
सबसे ज्यादा 57 सीटों वाले इस चरण में यूं तो अन्य चरणों की तरह ही मुख्य मुकाबला नीतीश कुमार के जेडीयू और लालू यादव के राजद वाले महागठबंधन और भाजपा नेतृत्व वाले राजग के बीच ही है लेकिन ओवैसी ने इस संघर्ष को त्रिकोणीय बना दिया है।
ऐसे में अभी तक चारों चरणों में महागठबंधन के पीछे खड़े नजर आ रहे मुस्लिम वोटरों का पांचवे चरण में रुख ही लालू-नीतीश का भविष्य तय करेगा।
ओवैसी से मिल सकती है कड़ी टक्कर
अगर ओवैसी मुस्लिम वोटरों में सेंध लगाने में कामयाब हो गए तो महागठबंधन को इसका खामियाजा उठाना पड़ सकता है, जिसका सीधा सीधा फायदा भाजपा को मिलेगा।
लेकिन अगर ओवैसी बेअसर रहते हैं तो इसमें शायद ही कोई शक रह जाए कि महागठबंधन भाजपा के मुकाबले इस चरण में अच्छी बढ़त ले सकता है। अंतिम चरण में लालू यादव का वो माय (MY) मुस्लिम-यादव फार्मूला एक बार फिर कसौटी पर है जिसके दम पर लालू यादव ने बिहार में 15 सालों तक राज किया।
बाद में भाजपा और जेडीयू ने इसमें सेंध लगाकर लालू का अभेद माना जा रहा किला ध्वस्त किया था। वहीं भाजपा की सारी उम्मीदें इस बात पर टिकी होंगी कि ओवैसी के कारण यहां वोटों का ध्रुवीकरण हो पाता है या नहीं, जैसा कि महाराष्ट्र चुनावों में हुआ था।
ध्रुवीकरण की संभावनाओं पर टिकी भाजपा की उम्मीदें
अगर ओवैसी की तल्ख जुबान और उनकी कट्टर छवि के चलते हिंदु वोटों का ध्रुवीकरण हुआ तो वो भाजपा की किस्मत बदल सकता है। इस बात का अंदाजा भाजपा नेताओं को भी है, यही कारण है कि पिछले कुछ दिनों से उनके बयानों में पाकिस्तान और आरक्षण के मुद्दे पर अल्पसंख्यकों का जिक्र लगातार हो रहा है।
भाजपा का पूरा प्रयास यहां वोटरों को ध्रुवीकृत करने पर ही है। हालांकि भाजपा के लिए उम्मीद की और किरण ये भी है कि पांचवे चरण की 57 सीटों में से कुछ सीटें कोसी क्षेत्र में भी हैं जहां अगड़ी जातियों में उसकी अच्छी पैंठ है।
कुल मिलाकर माना यही जा रहा है कि पांचवे चरण में जो बढ़त बनाने में सफल रहा वही बिहार की गद्दी पर काबिज भी हो सकता है। इसलिए अब हर किसी को इंतजार 5 नवंबर का ही है।