243 सदस्यीय बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे मंगलवार देर रात आठ बजे तक साफ नहीं हो सके थे। मतगणना के रुझानों में बहुमत का जादुई 122 का आंकड़ा सुबह नौ बजे के करीब राजद की अगुवाई वाला महागठबंधन के पाले में आया तो अगले एक घंटे बाद ही यह भाजपा-जदयू वाले एनडीए गठबंधन के पाले में आ गया। हालांकि, यह आंकड़ा एनडीए के पक्ष में कुछ घंटे ही रहा। अगले सात घंटे बाद ही यह आंकड़ा घटकर 119-121 पर आ गया। हालांकि, इस दौरान दोनों ही खेमों के समर्थक अपनी-अपनी जीत के दावे करते रहे और जश्न मनाते भी नजर आए।
सीएम चेहरे तेजस्वी यादव की पार्टी राजद ने तो दावा भी कर दिया कि बिहार ने बदलाव कर दिया है और महागठबंधन की सरकार बननी तय है। दरअसल, राजद ने यह दावा उन आंकड़ों के बाद किया, जब 20 सीटों पर वोटों का अंतर एक हजार से कम रह गया था।
मंगलवार सुबह जब रुझान आने शुरू हुए तो तेजस्वी यादव का महागठबंधन आगे बना हुआ था। सुबह नौ बजे तक वह इतनी बढ़त हासिल कर चुका था कि सरकार आसानी से बन जाए, लेकिन एक घंटे बाद तस्वीर बदल गई और नीतीश कुमार ने बाजी पलट दी। एनडीए 120 सीटों के करीब पहुंचता दिखा और अगले आधे घंटे में उसने रुझानों में बहुमत का आंकड़ा छू लिया। भाजपा भी अरसे बाद सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। शाम छह बजे बिहार एक बार फिर बदला, जब एनडीए का आंकड़ा बहुमत से नीचे 120 पर आ गया।
किसी ने जीत के पोस्टर लगाए तो कोई मिठाई लेकर पहुंचा
कई दलों के समर्थक अपनी पार्टी और प्रत्याशी की जीत के लिए मंदिरों में पूजा-अर्चना के लिए सुबह से ही आने लगे थे। मंगलवार होने के नाते हनुमान मंदिरों में ज्यादा भीड़ देखने को मिली। नीतीश कुमार की जीत के तो नए नारे भी दीवारों पर दिखने लग गए थे। फिर से नीतीशे कुमार बा बुझाईल बबुआ...वेलकम पीपल सीएम ऑफ बिहार श्री नीतीश कुमार...के नारे उत्साह को बयां कर रहे हैं। सुबह की मायूसी के बाद एनडीए खेमे में उत्साह की लहर लौटी। जैसे-जैसे वोटों की गिनती आगे बढ़ती रही है और रुझानों में एनडीए की बढ़त दिख रही थी भाजपा और जदयू कार्यालय में समर्थकों की भी जुटने लगी है। शाम को कांटे की टक्कर के अनुमान के बाद दोनों पक्षों के समर्थकों के चेहरे पर उत्साह के रंग दिखने लगे थे। कई समर्थक ढोल-ताशे और मिठाइयां लेकर भी पहुंच गए थे। कई जगहों पर गाने-बजाने का दौर भी रहा।
जदयू कार्यालय में लगे पोस्टर, जनता ने फिर से चुना-24 कैरेट गोल्ड
पटना में जदयू कार्यालय में कई पोस्टर लगाए गए, जिसमें एक पोस्टर में लिखा था-जनता ने फिर से चुना- 24 कैरेट गोल्ड। वहीं, भाजपा कार्यालय में कार्यकर्ता 51 किलो लड्डू लेकर पहुंचे थे। वहीं, रुझानों में बढ़त आने के साथ ही राजद कार्यालय में पटाखे फोड़े गए।
सामाजिक दूरी का कभी भाजपा तो कभी राजद समर्थकों ने उड़ाईं धज्जियां
भाजपा, जदयू, कांग्रेस और राजद के समर्थक बड़ी संख्या में मतगणना केंद्र के बाहर नजर आए। सुबह हरे कपड़े पहने राजद समर्थक ही नजर आ रहे थे। दोपहर होते-होते यह रंग बदलकर केसरिया हो गया और एनडीए समर्थकों की संख्या बढ़ने लगी। सभी दलों के समर्थकों ने सामाजिक दूरी के नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाईं। ज्यादातर कार्यकर्ता और समर्थक बिना मास्क लगाए ही नजर आए। वहीं, कुछ केंद्रों पर ड्यूटी में तैनात पुलिसकर्मियों ने खाना लेते समय सामाजिक दूरी के नियमों का पालन नहीं किया।
2015 में शुरुआत में एनडीए ने बनाई थी भारी बढ़त, बाद में पलटा पास
2015 में बैलेट पेपर की गिनती पर एनडीए काफी बढ़त बनाए हुए था। जिस वजह से एनडीए खेमें में खुशी की लहर दौड़ गई थी। हालांकि, जैसे ही ईवीएम की गिनती शुरू हुई पासा पलटने लगा और उसके बाद महागठबंधन की लीड अंत समय तक बनी रही। पूरी मतगणना के बाद 178 सीटों के साथ बिहार में महागठबंधन की सरकार बनी थी।
कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन ने बिगाड़ा महागठबंधन का खेल
कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन ने महागठबंधन का पूरा खेल बिगाड़ दिया। एग्जिट पोल में जिस बढ़त की बात की जा रही थी उसको पलीता लगाने में कांग्रेस ने अहम भूमिका निभाई। राजद के बाद कांग्रेस सबसे अधिक 70 सीटों से चुनाव लड़ी थी, लेकिन उसे जीत महज 27 फीसदी सीटों पर ही मिला।
चुनाव आयोग के रात एक बजे तक के आंकड़ों के मुताबिक, कांग्रेस ने 70 में से 19 सीटों पर ही जीत दर्ज की जबकि राजद अपनी 144 सीटों में से 75 सीटों पर जीत दर्ज की है। 2015 के आंकड़े देखें तो कांग्रेस ने कुल 41 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और 27 सीटों पर जीत हासिल की थी। पिछले बार की तुलना में कांग्रेस का प्रदर्शन गड़बड़ाया है। महागठबंधन में तेजस्वी यादव ने कांग्रेस को 70 सीटें दीं, लेकिन इस बार उनके फायदे के बजाय इस दरियादिली का खामियाजा भुगतना पड़ा। अगर कांग्रेस भी राजद की तरह प्रदर्शन कर जाती तो तेजस्वी यादव सत्ता के सिंहासन तक पहुंच सकते थे।