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Bihar Election: दूसरे चरण में सियासी समीकरण पेचीदा, कई सीटों पर बहुकोणीय मुकाबला; मैदान में 1,302 प्रत्याशी

Sat, 25 Oct 2025 08:26 AM IST
लव गौर कुमार निशांत, अमर उजाला, पटना

सार

विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में 122 सीटों पर 1,302 प्रत्याशी मैदान में हैं। कहीं 22 प्रत्याशी आमने-सामने हैं, तो कहीं सिर्फ पांच उम्मीदवारों में टक्कर तय है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि इस बार मुकाबला न सिर्फ रोचक बल्कि कई जगहों पर बहुकोणीय और अप्रत्याशित होने वाला है। इन सीटों पर मतों का बिखराव एक बड़ा फैक्टर बनेगा, जो कई बड़े राजनीतिक चेहरों की किस्मत का फैसला करेगा।
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समस्तीपुर की रैली में पीएम मोदी के आह्वान पर युवाओं ने मोबाइल की लाइट जलाई। एजेंसी - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
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विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में 122 सीटों पर 1,302 प्रत्याशी मैदान में हैं। कहीं 22 प्रत्याशी आमने-सामने हैं, तो कहीं सिर्फ पांच उम्मीदवारों में टक्कर तय है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि इस बार मुकाबला न सिर्फ रोचक बल्कि कई जगहों पर बहुकोणीय और अप्रत्याशित होने वाला है। इन सीटों पर मतों का बिखराव एक बड़ा फैक्टर बनेगा, जो कई बड़े राजनीतिक चेहरों की किस्मत का फैसला करेगा।
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चैनपुर, सासाराम और गयाजी टाउन हॉट सीटें
11 नवंबर को होने वाले चुनाव में चैनपुर, सासाराम और गयाजी टाउन विधानसभा क्षेत्रों में 22-22 प्रत्याशी मैदान में हैं, जहां मुकाबला सबसे कठिन है। इसके विपरीत, चनपटिया, रक्सौल, सुगौली और बनमनखी जैसी सीटों पर केवल पांच-पांच प्रत्याशी हैं। गयाजी, सासाराम और औरंगाबाद जैसे जिलों में जातीय समीकरणों और स्थानीय मुद्दों की हवा चलेगी। यहां चुनाव सिर्फ दलों के बीच नहीं, बल्कि सामाजिक समूहों के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई भी बन चुका है।

विकास-रोजगार बनाम बेरोजगारी-भ्रष्टाचार
एनडीए विकास व रोजगार के वादों के साथ मैदान में है, वहीं महागठबंधन बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और महंगाई जैसे मुद्दों को उठाकर जनता का ध्यान खींचने की कोशिश में है। निर्दलीय उम्मीदवारों और छोटे दलों की भागीदारी ने मुकाबला और कठिन बना दिया है। इनकी भूमिका किंगमेकर जैसी हो सकती है। गौरतलब है कि, दोनों चरणों को मिलाकर कुल 2,616 प्रत्याशी मैदान में हैं।
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नतीजा तय करेगा स्थिरता या परिवर्तन
14 नवंबर को नतीजा तय करेगा कि बिहार की जनता स्थिरता को चुनेगी या परिवर्तन को। पहले चरण में जहां माहौल बनेगा, वहीं दूसरा चरण यह तय करेगा कि राजनीतिक हवा किस ओर बहेगी। दूसरे चरण का चुनावी संग्राम न सिर्फ प्रत्याशियों की परीक्षा होगी, बल्कि दलों की रणनीति और मतदाताओं के मूड का असली संकेतक भी। बिहार की राजनीति एक बार फिर दिखा रही है कि हर चुनाव, हर सीट और हर वोट एक नई कहानी लिखता है।
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