फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दल-बदलुओं के जलवे, लोजपा-वीआईपी में भाजपा के कई चेहरे

Wed, 28 Oct 2020 03:30 AM IST
Jeet Kumar कुमार निशांत, पटना।
विज्ञापन
Bihar Election - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

बेतिया राज की फुटबॉल टीम के खिलाड़ी थे मशहूर गीतकार गोपाल सिंह नेपाली के छोटे भाई बम बहादुर सिंह। खेल में हाफ टाइम के बाद बेतिया राज की टीम अपने एक खिलाड़ी को हटाती थी और बम बहादुर को हाफ टाइम के बाद खेलने का मौका दिया जाता था।

विज्ञापन


कहा जाता है कि हाफ टाइम के बाद टीम में शामिल बम बहादुर ने हर मैच में कम से कम दो गोल किए। बिहार की चुनावी राजनीति में आफ्टर हाफ टाइम एंट्री वाले नेताओं ने इस बार खूब गोल किए हैं। टिकट लेने के मामले में ऐसे नेताओं का रिकॉर्ड बम बहादुर सिंह जैसा ही है।

टिकट बंटवारे के बीच अंतिम दौर में पार्टियों में शामिल हुए नेताओं को टिकट मिलते देर नहीं लगी। लोजपा के सर्वाधिक उम्मीदवार टिकट मिलने से पहले दूसरे दलों के नेता थे। पार्टी 143 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। पार्टी ने सबसे ज्यादा नुकसान भाजपा को पहुंचाया है। भाजपा छोड़कर आए भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह लोजपा कि टिकट पर दिनारा से चुनाव लड़ रहे हैं।
विज्ञापन


इसी तरह टिकट कटने पर भाजपा छोड़ कर लोजपा में शामिल हुए पूर्व विधायक रामेश्वर चौरसिया सासाराम से लोजपा उम्मीदवार हैं। भाजपा की पूर्व विधायक उषा विद्यार्थी पालीगंज से लोजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। श्वेता सिंह, रविंद्र यादव, इंदु कश्यप, मृणाल शेखर, कामेश्वर सिंह मुन्ना, रानी कुमारी, कुमारी शोभा सिन्हा, अर्जुन राम, शशि भूषण और तारकेश्वर सिंह भले ही इस चुनाव में लोजपा उम्मीदवार हैं लेकिन लोजपा का टिकट मिलने से पहले तक ये सभी भाजपा में सक्रिय  थे।

लालू के समधी और श्रेयसी का अचूक निशाना
अंतिम दौर में राजद छोड़कर जदयू में आए कई नेता जदयू के टिकट पर चुनावी मैदान में हैं। लालू प्रसाद यादव के समधी चंद्रिका राय परसा सीट से जदयू उम्मीदवार हैं। जयवर्धन यादव, प्रेमा चौधरी, महेश्वर यादव, फराज फातमी,अशोक कुमार और संजय प्रसाद राजद छोड़ जदयू का उम्मीदवार बने हैं। जमुई से चुनाव लड़ रही अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज श्रेयसी सिंह ने कभी राजनीति नहीं की लेकिन ऐन चुनाव से पहले भाजपा पर निशाना साधा। निशाना सटीक बैठा और टिकट पा कर भाजपाई हो गईं।

बसपा और रालोसपा के प्रदेश अध्यक्षों ने ही पाला बदला
राजद ने ऐसे कई लोगों को उम्मीदवार बनाया है जो हाल ही में दूसरे दलों से पार्टी में आए हैं। लोजपा सांसद रमा सिंह अब राजद नेता हैं और उनकी पत्नी वीणा सिंह महनार से राजद उम्मीदवार। बसपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे भरत बिंद राजद में शामिल हुए और भभुआ से टिकट मिल गया। रालोसपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे भूदेव चौधरी राजद में शामिल हुए और धौरैया से राजद का उम्मीदवार बना दिया गया।

पूर्व सांसद लवली आनंद ने तो दल बदल कर दोनों हाथ में लड्डू ले लिया। राजद में शामिल होकर खुद सहरसा से चुनावी मैदान में हैं तो बेटे चेतन आनंद शिवहर से। चौधरी महबूब अली कैसर कभी कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष थे। कांग्रेस छोड़ लोजपा में आए। अभी लोजपा सांसद हैं। बेटे चौधरी युसूफ कैसर ने राजद का लालटेन थामा और सिमरी बख्तियारपुर से उम्मीदवार बना दिए गए। इसी तरह रालोसपा छोड़कर राजद में आए मोहम्मद कामरान भी अब चुनावी मैदान में हैं।

वीआईपी का टिकट, चेहरा भाजपा का
पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव की बेटी सुभाषिनी यादव तो कांग्रेस में टिकट लेकर ही शामिल हुईं। राजद से नाता तोड़कर आए विजेंद्र चौधरी को पार्टी ने मुजफ्फरपुर से प्रत्याशी बनाया तो जदयू वाले गजानन शाही बरबीघा से। जदयू से आए रवि ज्योति राजगीर से टिकट पा गए और लोजपा से आए काली पांडेय कुचायकोट से। वीआईपी के तो लगभग सभी उम्मीदवार ही दूसरे दलों से हैं। सुगौली से उम्मीदवार रामचंद्र साहनी भाजपा के मौजूदा विधायक हैं। वीरेंद्र ओझा, हरि साहनी, सुमन महासेठ और मिश्री लाल भी वीआईपी उम्मीदवार बनाए जाने से ठीक पहले दूसरे दलों के नेता थे।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें