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बिहार की वो सीट, जिसने लहर के खिलाफ दिया था जनादेश

Sat, 24 Oct 2020 04:22 PM IST
कुमार संभव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बिहार चुनाव 2020 - फोटो : अमर उजाला
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बिहार में विधानसभा चुनावों का रण छिड़ चुका है। सभी राजनीतिक दल अपने-अपने स्टार प्रचारकों के माध्यम से मतदाताओं को अपने पाले में खींचने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, चुनाव में मुद्दे, चुनावी लहर, राजनीतिक और जातिगत समीकरण अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन बिहार में एक सीट ऐसी भी थी, जिसने लहर के उलट जनादेश दिया था। वो भी एक नहीं, दो-दो बार। इस विधानसभा सीट का नाम है राजमहल, जो साल 2000 तक बिहार में थी, लेकिन अब झारखंड के साहिबगंज जिले के अंतर्गत आती है। 
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1977 में पहली बार पलटा था जनादेश
जानकारी के मुताबिक, राजमहल सीट ने दो बार लहर के खिलाफ नतीजा दिया है। पहली बार राजमहल विधानसभा सीट ने 1977 में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला जनादेश दिया था। दरअसल, इमरजेंसी के बाद लोगों में इंदिरा गांधी और कांग्रेस के खिलाफ नाराजगी थी। ऐसे में 1977 के दौरान देश के साथ-साथ बिहार में चुनावी माहौल बना तो लहर जनता दल के पक्ष में थी। उस दौरान राजमहल सीट के लोगों ने निर्दलीय उम्मीदवार ध्रुव भगत को जीत का सेहरा पहना दिया। 
1980 में दोहरा दिया इतिहास
इसके बाद 1980 में मध्यावधि चुनाव हुए। उस वक्त लहर कांग्रेस के पक्ष में थी, लेकिन राजमहल के लोगों ने एक बार फिर लहर को दरकिनार कर दिया। उस दौरान ध्रुव भगत बीजेपी के टिकट से मैदान में उतरे, जिन्हें जनता ने दोबारा जीत से नवाज दिया।
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बिहार में तीन चरण में होंगे चुनाव
बता दें कि बिहार में विधानसभा चुनाव तीन चरण में होंगे। पहले चरण का मतदान 28 अक्टूबर को होगा, जबकि दूसरे चरण का मतदान 3 नवंबर और तीसरे चरण का मतदान 7 नवंबर को होगा। वहीं, चुनाव परिणाम 10 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। बता दें कि बिहार में लगातार 15 साल से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार है। ऐसे में एंटी इनकमबैसी हावी हो सकती है, लेकिन जंगलराज की वापसी जैसे मुद्दे विपक्ष पर भारी पड़ सकते हैं।
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