बिहार में महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव के लिए खुद की सीट पर जीत की राह आसान नहीं होगी। राघोपुर विधानसभा सीट से तेजस्वी का सामना भाजपा के अनुभवी सतीश कुमार से है। हालांकि 2015 में तेजस्वी ने लालू का गढ़ कही जाने वाली राघोपुर सीट से ही चुनावी मैदान में कदम रखा था और जीत दर्ज की थी। राघोपुर सीट यादव बहुल है और लालू यादव यहां से 1995, 2000 और राबड़ी देवी 2005 में चुनाव जीत चुकी हैं।
दूसरे चरण के दंगल से साफ होगा सत्ता का रास्ता
दूसरे चरण में 17 जिलों की 94 सीटों पर मतदान है। इस चरण के दंगल से तय होगा कि राज्य में किसकी सरकार बनने जा रही है। पहले और दूसरे चरण को मिलाकर दो तिहाई उम्मीदवारों की किस्मत तय होने वाली है। तीसरा चरण में जीत-हार का अंतर तय होगा।
दूसरे चरण में जिन 94 सीटों पर चुनाव हैं, उन सीटों पर 2015 में राजद ने 33, जदयू ने 30 और भाजपा ने 20 सीटें जीती थीं। कांग्रेस को सात सीटों, तो लोजपा को दो और माले व निर्दलीय को एक-एक सीट मिली थी। इस बार महागठबंधन की ओर से राजद 56, कांग्रेस 24, भाकपा माले छह, माकपा चार और भाकपा चार सीटों पर लड़ रही है। राजग की ओर से भाजपा 45, जदयू 43 और वीआईपी छह सीटों पर चुनावी मैदान में है।
जदयू ने 15 नए चेहरों पर लगाया दांव
दूसरे चरण में जदयू ने 15 नए चेहरों पर दांव लगाया है। नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा में पार्टी ने राजगीर सीट से हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य के बेटे कौशल कुमार को मैदान में उतारा है। हिलसा से जदयू ने कृष्ण मुरारी शरण को मैदान में उतारा है। केसरिया से शालिनी मिश्रा तो फुलपरास से शीला मंडल मैदान में हैं।
पिछले चुनाव में जदयू का कांग्रेस और राजद के साथ गठबंधन था। इस चुनाव में जदयू का भाजपा से गठबंधन है और राजद और कांग्रेस से मुकाबला है। जाहिर है न सिर्फ गठबंधन बदला है बल्कि वोट का समीकरण भी पूरी तरह से बदल गया है। ऐसे में दूसरे चरण का रण सबके लिए करो या मरो जैसी स्थिति वाला है।