दिनारा से राजेन्द्र सिंह, सासाराम से रामेश्वर चौरसिया, पालीगंज से उषा विद्यार्थी, संदेश से श्वेता सिंह, अमरपुर से मृणाल शेखर, झाझा से रवीन्द्र यादव, जहानाबाद से इंदु कश्यप, एकमा से कामेश्वर सिंह, मखदुमपुर(सु) से रानी कुमारी, घोसी से राकेश कुमार सिंह, इमामगंज(सु) से कुमारी शोभा, राजौली(सु) से अर्जुन रामनवादा से शशि भूषण, गोविंदपुर से रंजीता यादव बनियापुर से तारकेश्वर सिंह, फुलवारी प्रखंड से सतीश पासवान। सूत्र बताते हैं कि अभी यह संख्या और बढ़ने के पूरे आसार हैं। ये सभी नेता पहले भाजपा में थे और अब लोजपा टिकट पर चुनाव मैदान में हैं।
चिराग के सलाहकार हैं प्रशांत किशोर
जद(यू), भाजपा और लोजपा के नेता प्रशांत किशोर की भूमिका पर कोई इनकार नहीं कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि चिराग पासवान जद(यू) के नेता नीतीश कुमार की आंख के तारे रहे चुनाव प्रचार अभियान के रणनीतिकार प्रशांत किशोर की सलाह पर काम कर रहे हैं। प्रशांत किशोर का जद(यू) से नाता खत्म हो चुका है। वह पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को भी राजनीतिक सलाह दे रहे हैं। पीके की सलाह पर गौर करने के बाद पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को भाजपा के राजनीतिक अभियान को काबू में रखने में काफी मदद मिली है।
समझा जा रहा है कि नीतीश कुमार द्वारा एनडीए में जीतन राम माझी की हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा(हम) को जोड़ने की पहल से ही चिराग के कान खड़े हो गए थे। इसके बाद पीके की सलाह पर उन्होंने लोजपा को 143 सीटों पर चुनाव में उतारने का फैसला किया। इसमें संदेश दिया कि उनकी पार्टी बिहार में एनडीए से बाहर है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर एनडीए के साथ है। चिराग की इस पहल के पीछे अंदरखाने में भाजपा को लाभ पहुंचाना, जद(यू) की जड़ कमजोर करना और लोजपा को मजबूत करना है। यह भाजपा के लिए असमंजस की घड़ी है, जहां वह पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत राम विलास पासवान के दिवंगत होने के बाद दलित वोटों की सहानुभूति बनाए रखना चाहती है।
बिहार में पिछले 15 साल से सत्ता और गठबंधन की धुरी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने अजीबो-गरीब स्थिति पैदा हुई है। पहली बार वह जरूरत से ज्यादा रक्षात्मक होने पर मजबूर हो रहे हैं। 2015 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन में रहकर चुनाव लड़ने पर राजद की सीटें जद(यू) से ज्यादा आई थी, हालांकि समझौते के अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही बने थे।
2020 के चुनाव में भी भाजपा को सफाई में कहना पड़ रहा है कि सीटें भले ही ज्यादा आएं, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही बनेंगे। दिलचस्प है कि यह भरोसा सुशील कुमार मोदी के बाद केंद्रीय गृहमंत्री और पूर्व भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को देना पड़ रहा है।
इस भरोसे से जहां जद(यू) के नेता भरोसा करने का कारण ढूंढ रहे हैं, वहीं भाजपा और संघ के नेताओं में उत्साह बढ़ रहा है। भाजपा के नेता पहले से कह रहे हैं 2020 के विधानसभा चुनाव में विधायकों की संख्या के लिहाज से भाजपा नंबर वन पार्टी बनने वाली है।