गुरुवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पूर्णियां के धमदाहा विधानसभा क्षेत्र में अपनी सभा के दौरान कहा कि यह मेरा आखिरी चुनाव है, अंत भला तो सब भला। इसके ठीक पूर्व उसी दिन पीएम का एक पत्र बिहारवासियों के नाम जारी हुआ जिसमे प्रधानमंत्री ने कहा कि वे बतौर मुख्यमंत्री वे नीतीश कुमार को ही देखना पसंद करेंगे। लोग प्रधानमंत्री के पत्र को एनडीए के दो बड़े दलों के बीच बढ़ती दूरी को कम करने वाले एक डैमेज कंट्रोल कैप्सूल की तरह देख रहे हैं।
मुख्यमंत्री के बयान के बाद पार्टी के लगभग सभी प्रदेश प्रवक्ता हरकत में आ गए। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद का मानना है कि नीतीश कुमार और राज्य के अन्य नेताओं में वही फर्क है जो किसी नेता और राजनेता (स्टेट्समैन) के बीच होता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 तक बिहार को विकसित राज्य बनाने का जो संकल्प है उसको पूरा करने के बाद मुख्यमंत्री ने चुनाव नहीं लड़ने के संबंध में संकेत दिए हैं। यह कहकर उन्होंने बिहार के चुनावी परिदृश्य को एक नई दिशा दी है। जहां छोटे- छोटे समझौते के जरिए लोग कुछ भी हासिल करने के लिए बेचैन हैं वहां उन्होंने इस तरह का ऐलान किया है।
वहीं पार्टी की प्रदेश प्रवक्ता सुहैली मेहता ने कहा कि मुख्यमंत्री ने अपनी भावना को व्यक्त किया है। बिहार की जनता और पार्टी के कार्यकर्ता नहीं चाहेंगे की वो चुनाव को छोड़ें. हम सभी चाहेंगे कि वो बिहार की सेवा करते रहें। हमें गर्व है कि राजनीति में उन्होंने नया इतिहास गढ़ा है। पूरे देश में बिरले ऐसे राजनीतिक सुचिता वाले उदहारण मिलते हैं जो यह कहे कि यह मेरा अंतिम चुनाव है।
हम सभी कार्यकर्ता चाहेंगे कि वो बिहार की सेवा करते रहें। वहीं प्रवक्ता प्रगति मेहता ने कहा कि मुख्यमंत्री के कहने का आशय यही था कि यह अंतिम चुनावी सभा है और अंत भला तो सब भला। वे न थके हैं और न ही रुकने वाले हैं।
वहीं राजद के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद शिवानंद तिवारी ने कहा कि पिछले 15 साल उन्होंने क्या किया है। नीतीश कुमार अब तक सीएए आदि मुद्दों पर मौन रहे हैं। योगी जी का क्या है वह तो उनके एजेंडे में ही है। अंतिम
समय में नीतीश कुमार को लग रहा है कि शायद अंतिम समय में ऐसा बोलने से उन्हें कुछ लाभ हो सकता है। वे समझ चुके हैं कि अब सब कुछ उनके हाथों से निकल चुका है। वे जमीनी हकीकत जानकर हताश हो चुके हैं। इसलिए ऐसी घोषणा की है। कांग्रेस के पूर्व विधायक हरखू झा ने कहा कि मुख्यमंत्री को हार नजर आ रही है।
दोनों गठबंधनों की बयानी खींचातानी के बीच विश्लेषकों का मानना है कि स्थानीय लोगों और ट्रेंड को देखें तो पहले चरण के मतदान में महागठबंधन की बढ़त है तो दूसरे चरण में एनडीए आगे है। ऐसे में तीसरे और अंतिम चरण का मतदान दोनों गठबंधनों के लिए निर्णायक है।
जाहिर है जिसकी बढ़त होगी सरकार उसी की बनेगी। इस परिपेक्ष्य में चुनाव के अंतिम दिनों योगी आदित्यनाथ और नीतीश कुमार के विरोधाभासी बयान, प्रधानमंत्री की चिट्ठी और मुख्यमंत्री नीतीश की घोषणा ये सब कहीं न कहीं सीमांचल- कोसी के चुनाव को प्रभावित करने के लिए ही दिए गए हैं।