एक दिन में 15-17 जनसभा, आखिर तेजस्वी को मुख्यमंत्री जो बनना है
राष्ट्रीय जनता दल के नेता और महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव की सुनिए। फोन पर बताते हैं कि एक दिन में 15-17 तक जनसभाएं की हैं। वायरल हुए वीडियो में तेजस्वी यादव हेलीकॉप्टर से उतरकर संबोधित करने के लिए भागते और संबोधन के बाद लोगों से बचकर भागते हुए हेलीकॉप्टर तक पहुंचते कई बार देखे गए हैं। कांग्रेस के आईटी सेल के प्रमुख रोहन गुप्ता बताते हैं कि तेजस्वी यादव ने सहयोगी दल कांग्रेस के प्रत्याशियों के समर्थन में भी 50 से अधिक विधानसभाओं को कवर किया। ताकि राष्ट्रीय जनता दल के साथ-साथ वामदल और कांग्रेस के उम्मीदवारों को भी जिताया जा सके। इसके लिए तेजस्वी यादव के कार्यालय और चुनाव प्रचार का जिम्मा संभाल रहे लोगों ने कांग्रेस तथा वाम दल के नोताओं, शीर्ष नेताओं से बराबर तालमेल बनाए रखा। राजद के दिग्गज नेता शिवानंद तिवारी का भी कहना है कि यह चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है। यह पूरे बिहार को नई दिशा देने वाला है। राजद के प्रमोद यादव का कहना है कि बिहार विधानसभा चुनाव ने 2015 में देश की राजनीति को नया आयाम दिया था और इस बार भी बिहार इसे दोहराएगा।
जीते तो जय नीतीश कुमार और पिछड़े तो...
अभी तक बिहार के मुख्यमंत्री बिहार की राजनीति में भाजपा के बड़े भाई की भूमिका निभाते आए हैं। भाजपा 121 तो जद(यू) ने बड़े भाई का रुतबा कायम रखने के लिए 122 सीटों पर चुनाव लड़ा है। राजनीति के पंडितों का मानना है कि यदि भाजपा से जद(यू) की सीटें कम आई और राजद से भी कदाचित पार्टी पिछड़ गई तो इसका असर नीतीश कुमार के राज्य में राजनीतिक दबदबे पर पड़ना तय है। बिहार चुनाव प्रचार करके प्रयागराज लौटे भाजपा और संघ के काशी प्रांत के बड़े नेता का कहना है कि जद(यू) की सीटें भाजपा से काफी कम आएंगी।
सूत्र का कहना है कि जद(यू) के कुछ नेताओं ने भाजपा का प्रचार करने में संकोच किया। वहीं इसी तरह के आरोप जद(यू) के नेता भी लगा रहे हैं। सूत्र का कहना है कि राज्य में सरकार एनडीए ही बनाएगा। मुख्यमंत्री भी भाजपा का ही हो सकता है और अब बिहार में जद(यू) छोटे तो भाजपा बड़े भाई के रूप में आ जाएगी। एक प्रमुख टीवी चैनल के पटना स्थित सूत्र की मानें तो इस बार के चुनाव प्रचार में भाजपा और जद(यू) में चुनाव प्रचार से लेकर राजनीतिक संदेश देने के मामले में भ्रम की स्थिति बनी बनी रही। भाजपा, जद(यू) दोनों ही दलों के कई नेता अंदरखाने में मान रहे हैं लोजपा के चिराग पासवान ने जद(यू) की उम्मीदों पर बड़े पैमाने पर पानी फेर दिया है। वहीं कांग्रेस के संजीव सिंह कहते हैं कि भाजपा का ही दांव नीतीश कुमार के लिए उल्टा पड़ गया। रोहन गुप्ता के अनुसार भाजपा के दांव ने इस बार बिहार में नीतीश कुमार के अहंकार को जहां समेटा, वहीं एनडीए के लिए उल्टा पड़ चुका है।
...लेकिन जनता प्रधानमंत्री मोदी और नीतीश कुमार को भुला पाएगी?
शलभ श्रीवास्तव काफी युवा हैं। पिछले डेढ़ महीने से बिहार के विभिन्न जिलों में कैंप कर रहे हैं। शलभ का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता में अभी कोई उनके टक्कर में नहीं है। बिहार का पढ़ा-लिखा, अगड़ा तबका भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अच्छा मानता है। गांवों में नीतीश कुमार की छवि को तगड़ा झटका लगा है, वहां जातिवाद काफी प्रभावी है। सोशल इंजीनियरिंग के लिहाज से नीतीश कुमार का गणित कहीं से कमजोर नहीं है। वह कहते हैं मतदान बूथ तक जाने में जनता का काफी मानस बदल जाता है। शलभ का भी कहना है कि कल देर शाम से आने वाला चुनाव पूर्वानुमान काफी कुछ खुद स्पष्ट कर सकता है।