बिहार में विधानसभा चुनाव के लिए तीसरे और आखिरी चरण का मतदान होना है। ऐसे में बिहार की राजनीति में सीएए-एनआरसी की एंट्री हो गई है और घुसपैठियों का मुद्दा गरमा गया है। यहां गौर करने वाली बात यह है कि घुसपैठियों को देश से बाहर निकालने के सवाल पर एनडीए के दोनों प्रमुख घटक दल भाजपा और जदयू के सुर एक-दूसरे से अलग हो गए हैं। ऐसे में राज्य में सियासी ड्रामा बढ़ने की आशंका है।
दरअसल, बिहार में एक रैली के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य में एनडीए की सरकार बनते ही घुसपैठियों को बाहर निकाला जाएगा। वहीं, एक अन्य रैली में सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि किसी में दम नहीं कि सीएए और एनआरसी के नाम पर हमारे लोगों को बाहर निकाले। दूसरी तरफ, इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, सभी देश अपने नागरिकों की पहचान करते हैं, इसलिए भारत में भी इसकी शुरुआत हुई है।
योगी ने क्या कहा
कटिहार में एक रैली में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एनडीए की फिर से सरकार बनते ही चुन-चुनकर घुसपैठियों को बाहर निकालेंगे। आदित्यनाथ ने कहा कि कटिहार घुसपैठ की समस्या से त्रस्त है। बिहार में एनडीए की सरकार बनने पर घुसपैठियों को निकाल बाहर करेंगे। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी तार किशोर के लिए समर्थन मांगते हुए कहा, आपके आशीर्वाद से घुसपैठ की समस्या का समाधान होगा।
नीतीश ने क्या कहा
किशनगंज में रैली कर रहे नीतीश कुमार ने कहा, किसी में दम नहीं कि सीएए और एनआरसी के नाम पर हमारे लोगों को बाहर निकाले। कुछ लोग भ्रम फैला रहे हैं। कौन किसे देश से बाहर निकालेगा? किसी के पास किसी को भी बाहर निकालने की शक्ति नहीं है क्योंकि सभी भारत के हैं। हमने हमेशा सद्भाव का वातावरण बनाया है और सभी को एकजुट करने का प्रयास किया है।
सूबे के मुख्यमंत्री ने अल्पसंख्यकों के लिए हुए कामों को गिनाते हुए नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के मुद्दे पर हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी को भी खरी-खरी सुना दी। उन्होंने कहा कि कुछ लोग फालतू बातें कर रह हैं कि लोगों को देश से बाहर कर दिया जाएगा। नीतीश में कहा कि किसी में दम नहीं कि हमारे लोगों को देश से बाहर कर दे।
धर्मेंद्र प्रधान क्या बोले
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नीतीश कुमार के सीएए-एनआरसी बाले बयान को लेकर कहा, किसी भी भारतीय नागरिक के भारत छोड़ने का कोई सवाल ही नहीं है। लेकिन विश्व स्तर पर भी, सभी देश अपने देश में रहने वाले अपने नागरिकों और विदेशियों की पहचान कर रहे हैं। इसलिए, भारत ने भी हाल ही में इस अभ्यास को शुरू किया है।