फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bihar Election 2020: बाहुबलियों के बीच आया असली 'सिंघम', डेढ़ घंटा युवाओं का साथ करता है बिना पैसे के प्रचार

Fri, 23 Oct 2020 05:40 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पूर्व डीएसपी अखिलेश कुमार ने बताया, हमारे पास पैसा तो है नहीं। उतना भी नहीं कि चुनाव आयोग ने खर्च की जो सीमा तय है, वही पूरा हो जाए। एक गाड़ी है, जो मेरी अपनी है। उसी में तीन दोस्तों को बैठाकर चुनाव प्रचार के लिए निकलता हूं...
विज्ञापन
Dr Akhilesh Kumar - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बिहार चुनाव में अपनी ताकत दिखा रहे 'धन कुबेर' और 'बाहुबलियों' के बीच असल जिंदगी में 'सिंघम' का रोल अदा करने वाला एक शख्स आ गया है। बिहार पुलिस सेवा की मेरिट सूची में टॉप रैंक हासिल कर डीएसपी की नौकरी ज्वाइन की। उसके बाद किशनगंज में पोस्टिंग हुई तो लोगो को दिखा दिया कि असली 'सिंघम' कौन होता है, कैसा होता है। धार्मिक और जातीय दंगे होने से रोके तो दूसरी ओर पुलिस में ही घर द्वार कार्यक्रम शुरू कर दिया। इसके बाद लगा कि ये सब काफी नहीं है। कुछ अलग करना होगा। पटना साइंस कालेज में प्रोफेसर की नौकरी मिल गई, लेकिन अनसुलझे सवाल सामने खड़े रहे।

विज्ञापन


व्यवस्था परिवर्तन का ख्याल आया तो चुनाव में कूद पड़े। कई पार्टियों ने टिकट की पेशकश की, लेकिन 'सिंघम' ने नरपतगंज सीट से बतौर निर्दलीय प्रत्याशी, पर्चा दाखिल कर दिया। जीरो बजट प्रचार शुरू किया। दूसरी पार्टियां, 24 घंटे भीड़ जुटाने वाले तंत्र पर आगे चल रही हैं तो वहीं पूर्व डीएसपी अखिलेश कुमार, युवाओं को मात्र डेढ़ घंटा साथ रखते हैं। उसके बाद बोलते हैं, घर जाओ और पढ़ाई करो।

युवा हल्लाबोल आंदोलन के संस्थापक अनुपम और उनकी टीम भी इस 'सिंघम' के जीरो बजट प्रचार का हिस्सा बनी है। अनुपम, बोल बिहारी मुहिम के तहत फणीश्वरनाथ रेणु की धरती फॉरबिसगंज पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों के साथ जीरो बजट चुनावी अभियान चला रहे नरपतगंज विधानसभा से 'निर्दलीय' उम्मीदवार पूर्व डीएसपी अखिलेश कुमार, पारंपरिक पार्टियों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। उन्होंने अपने जनसंवाद कार्यक्रम में लोगों से कहा, आज बिहार चुनाव का सबसे जरूरी नारा होना चाहिए, 'पढ़ाई, कमाई और दवाई, हर बिहारी के हक की लड़ाई'।

यह है असल सिंघम के चुनाव प्रचार का तरीका

पूर्व डीएसपी अखिलेश कुमार ने शुक्रवार को फोन पर बताया कि 2013 से 2019 तक उन्होंने डीएसपी की नौकरी की है। उनका 9वां रैंक आया था। वे दो-तीन माह से जीरो बजट प्रचार कर रहे हैं। बिहार के कई इलाकों में धन कुबेरों और बाहुबलियों ने चुनाव प्रचार को अपनी मनमर्जी के तरीके में ढाल रखा है। हमारे पास पैसा तो है नहीं। उतना भी नहीं कि चुनाव आयोग ने खर्च की जो सीमा तय है, वही पूरा हो जाए। एक गाड़ी है, जो मेरी अपनी है। उसी में तीन दोस्तों को बैठाकर चुनाव प्रचार के लिए निकलता हूं। सभी बारी-बारी से ड्राइविंग करते हैं। कभी मैं घर से उनके लिए खाना ले आता हूं तो कभी वे मेरे लिए। दोपहर का खाना, विधानसभा क्षेत्र में किसी के घर भी खा लेते हैं।

विज्ञापन


गाड़ी में तेल डलवाने का भी यही तरीका है। एक बार मैं तो दूसरी दफा दोस्त। बहुत से युवा और उनके परिजन हमारी बात ध्यान से सुनते हैं। वे कहते हैं कि हम 24 घंटे साथ रहेंगे। मैं उन्हें केवल डेढ़ घंटा अपने साथ रखता हूं। इसके बाद उन्हें वापस घर भेज देता हूं। उन्हें पढ़ाई करनी है, उनका वह समय मैं क्यों बर्बाद करूं। कोई पंपलेट नहीं है, बैनर पोस्टर भी कहीं नहीं दिखेंगे। माइक भी नहीं है। लोगों के पास जाता हूं और मिलता हूं। सुबह छह बजे से रात दस बजे तक प्रचार चलता है।

अखिलेश कुमार ने कहा, मैं दूसरी पार्टी वालों की सारी खबर रखता हूं। एक सवाल के जवाब वे बोले, लोगों को अभी तक आजादी का सही मतलब नहीं पता चल सका है। कई लोगों की प्रवृति अभी आजादी वाली नहीं है। कहां वोट देना है, ये समझ अभी विकसित नहीं हुई है। यही वजह है कि चुनाव में अपराधी और धनकुबेर ताल ठोक रहे हैं। राष्ट्र और राष्ट्रवाद जवान-किसान से बनता है। पढ़ाई, कमाई और दवाई के व्यवस्था को सुधारना और उस पर आंदोलन करना ही सच्चा राष्ट्रवाद है।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें