दारू बंद होने से खुश शमीना और कैशियर की नौकरी छूटने के बाद पेड़ के नीचे चाय की दुकान चलाती गुड़िया
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नाव लोगों के आने-जाने का अहम हिस्सा है। पिछले 25 साल से पटना के दीघा घाट पर नाव चलाने वाले मुताव राय कहते हैं कि सबसे बडी जरूरत एक पुल की है, जिससे उनके गांव के लोग शहर की ओर आसानी से आ-जा सकें। गंगा नदी पार कराने के बाद नाव को किनारे लगाकर लोगों से उतराई में पांच-पांच रुपया वसूलते हुए मुताव राय बोलते हैं, अगर पुल बन जाए तो हमारे गांव की दिक्कत दूर हो जाए। नेता लोगों को सिर्फ चमचों से मतलब है, जनता की कोई नहीं सुनता।
शराब बंदी से महिलाएं खुश पर पुरुष नाराज
बिहार में शराब बंदी एक बड़ा मुद्दा रहा है, नीतीश कुमार इसे अपनी बड़ी उपलब्धि मानते हैं और महिलाएं खुश भी हैं, तो पुरुषों को लगता है इससे कोई फर्क नहीं पड़ा है। सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है और आम आदमी को अधिक पैसे खर्च करने पड़ते हैं। धनगढ़ा गांव में रहने वाले श्याम बाबू कहते हैं, दारू बंद कहां है, बाहर से आती है, गरीब आदमी देशी पीकर मर रहा है, सरकार को इसे शुरू कर देना चाहिए। इससे सरकार और जनता दोनों को नुकसान है।
वहीं शमीना कहती हैं कि 'दारू बंद होने से हम लोगों की जिंदगी बढ़िया हो गई है, गांव-घर के लड़ाई झगड़े बंद हो गए हैं।’ पटना में चाय की दुकान चलाने वाली गुड़िया अपनी सभी दिक्कतों के बावजूद खुश हैं कि बिहार में दारू नहीं बिक रही। पटना में ही सब्जी और फल की दुकान पर बैठी राधा दारू बंद होने से अपनी जिंदगी में आए सुकून को बताते हुए थोड़ी और मांग करती हैं, जैसे दारू बंद हो गई वैसे ही गांजा-भांग भी बंद होनी चाहिए। इससे और सुधार होगा। राधा देवी के पास ही खड़े विकास कुमार कहते हैं, आज के 15-20 साल पीछे जाएं तो जो मेरी बहन और मां दस बजे के बाद पटना की रोड पर नहीं दिखती थीं, अब 12 बजे तक दिखती हैं, लिहाजा हालात तो सुधरे हैं।