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Bihar: धराली त्रासदी में लापता हुए पिता-पुत्रों का पुतला बनाकर अंतिम संस्कार, रक्षाबंधन पर गांव में मातम छाया

Sat, 09 Aug 2025 05:55 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेतिया

सार

अचानक पहाड़ से काले बादल उतरे और फिर ऐसा मूसलधार पानी व मलबा आया कि पूरी बस्ती बह गई। जो बाहर थे, उन्होंने अपनी आंखों से देखा कि कैसे पलक झपकते ही मकान पानी में समा गया।
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बिहार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रक्षाबंधन के दिन जहां सुबह-सुबह घरों में पूजा की थाल सजती है, बहनें भाइयों के माथे पर तिलक लगाती हैं, रसोई से मिठाइयों की खुशबू फैलती है लेकिन इस बार पुरुषोत्तमपुर में न मिठास थी, न हंसी, बस आंसू और सन्नाटे की आवाज। उत्तराखंड के धराली में बादल फटने के बाद लापता हुए 55 वर्षीय देवराज शर्मा और उनके बेटे अनिल कुमार (20) व सुशील शर्मा (18) की कोई खबर पांच दिन तक नहीं मिली। इंतजार लंबा होता गया, उम्मीद की डोर पतली पड़ती गई और आखिरकार परिवार ने टूटे दिल से मान लिया कि वे अब कभी लौटकर नहीं आएंगे। शनिवार को गांव के लोगों ने पुतला बनाकर उनका अंतिम संस्कार किया।

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देवराज की पत्नी, लक्ष्मीना देवी का दुख शब्दों में बयान करना मुश्किल है। रक्षाबंधन के दिन जब हर बहन अपने भाई को राखी बांध रही थी, लक्ष्मीना देवी अपने पति और बेटों की तस्वीरें सीने से लगाए बार-बार बेहोश हो रही थीं। पास में डॉक्टर इलाज के लिए बैठे थे लेकिन उनकी आंखों का दर्द किसी दवा से कम नहीं हो सकता था।

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परिवार के सदस्य सुनील शर्मा ने धराली जाकर वहां की स्थिति देखी तो उनकी आंखें भर आईं। उन्होंने बताया कि हमारे पिता और दोनों भाई उत्तराखंड में 11 लोगों के साथ एक घर में रह रहे थे। उस दिन मेरे मामा श्याम शर्मा और मेरे ममेरा भाई आनंद कुमार बाहर काम से गए थे, बाकी नौ लोग घर के अंदर थे। अचानक पहाड़ से काले बादल उतरे और फिर मूसलधार पानी व मलबा आया, जिसने पूरी बस्ती बहा दी। जो बाहर थे उन्होंने अपनी आंखों से देखा कि कैसे पलक झपकते ही मकान पानी में समा गया।
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पुरुषोत्तमपुर गांव में अब न त्योहार का माहौल है, न कोई उत्साह। गलियां सूनसान हैं, चूल्हे ठंडे पड़े हैं। हर घर का दरवाजा आधा खुला है, मानो कोई परिचित आवाज दे और लापता लोग लौट आएं लेकिन हकीकत यह है कि अब वे सिर्फ यादों में लौटेंगे, भारी और दर्द से भरी यादों में। गांव के एक बुजुर्ग रविन्द्र बाबा ने आंसू पोंछते हुए कहा कि राखी के दिन पहली बार देखा कि एक साथ पिता और दो बेटों की आरती उठी, ये हादसा गांव कभी नहीं भूल पाएगा।

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