उत्तर बिहार का बड़ा मेडिकल हब कहलाने वाले मुजफ्फरपुर में 60 से ज्यादा छोटे अस्पताल, नर्सिंग होम और निजी क्लिनिक हैं, जो कि हर महीने 10 हजार रुपये क्यूआरटी के लिए देते हैं। इस क्यूआरटी में ज्यादातर लोग सेना और अर्द्धसैनिक बलों के रिटायर जवान हैं।
स्थानीय खबरों के अनुसार, क्यूआरटी के जवान बहुत शांत होते हैं और बिना विवाद के भीड़ को नियंत्रित कर लेते हैं। गनमैन और लाठी से लैस जवान केवल ताकत दिखाने और मनोवैज्ञानिक रूप से दबाव डालने के लिए होते हैं।
क्यूआरटी की स्थापना साल 2017 में नेवी से रिटायर होने वाले सदन मोहन ने की थी। स्थानीय खबरों के अनुसार, उन्हें अब तक एक बार भी मुजफ्फरपुर में बल का प्रयोग नहीं करना पड़ा है। जवानों को बाइक प्रोवाइड की गई है, ताकि फोन आने के 5 से 10 मिनट के अंदर वे मौके पर पहुंच सकें।