पूरे इलाके में अफरातफरी की स्थिति है।
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कोई भी बात पक्की नहीं, अफवाह पर हंगामा
कोई भी जानकारी पक्की नहीं थी, मगर लोगों का गुस्सा ऐसा था कि सड़क पर अंधाधुंध पथराव करते रहे। गुरुवार सुबह करीब 11 बजे से जबरदस्त हंगामा शुरू हुआ और इधर से आवाजाही करने वालों को भी नहीं बख्शा गया। करीब साढ़े 12 बजे तक यह हंगामा चला।
बच्चों के नहीं मिलने से परिवारजनों के बीच चीत्कार मची है।
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आधा दर्जन से ज्यादा सिलेंडर धमाके
आग की शुरुआत कहां से हुई, यह बताने वाला कोई नहीं। लोग बता रहे हैं कि झोपड़ियों में आग लगनी शुरू हुई और फिर अंदर रखे गैस सिलेंडरों के फटने से यह आग बहुत तेजी के साथ बढ़ गई। आधा दर्जन से ज्यादा सिलेंडर धमाके बताए जा रहे हैं। दमकल की छह गाड़ियों ने दोपहर बाद करीब एक बजे आग की राख को ठंडा किया।
अग्निशमन दस्ते को भी भीड़ के बीच घुसने में हुई परेशानी।
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हंगामे के बीच महिलाओं के रोने की आवाज
नेपाली नगर के आसपास के इस हिस्से में सड़क किनारे झोपड़ियां थीं। आग की वजह भले कोई नहीं बता पा रहा, लेकिन अपने दर्द की कहानियां सभी की जुबान पर है। महिलाएं रोती रहीं, क्योंकि उनका पूरा आशियाना उजड़ गया। जिन दो परिवारों के बच्चे नहीं मिल रहे थे, वह जली झोपड़ियों के साथ भीड़भाड़ में भी उन्हें तलाशते रहे। एक बच्चा करीब एक घंटे की खोज के बाद दूर नाला पार खेलता मिला। कुछ देर बाद दूसरा भी मिल गया।
आग ठंडी हुई तो लोग अपनी झोपड़ियों की जगह पर पहुंचे और जले सामानों में काम की चीजें ढूंढ़ते दिखे।
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दमकल के देर से पहुंचने का भी गुस्सा दिखाया
सूचना मिलते ही राजीव नगर थाने की पुलिस दल-बल के साथ मौके पर पहुंच गई थी, लेकिन पथराव के कारण उसे भी स्थिति संभालने में वक्त लगा। अग्निपीड़ित लोगों का कहना है कि इन झोपड़ियों में करीब 90 से अधिक लोग रहते थे। अगलगी में हमारा सब कुछ जलकर राख हो गया। दमकल की गाड़ी अगर समय से आ गई रहती तो इतना नुकसान नहीं हुआ होता।
प्रत्यक्षदर्शियों ने आग और उसके बाद की स्थितियों की जानकारी दी।
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पीड़ित परिवारों की सूची बनाई जा रही
दोनों बच्चों के मिलने के बाद हंगामा शांत हुआ तो पुलिस-प्रशासन के कहने पर लोग पीड़ित लोगों की सूची बनाने में जुटे। घटनास्थल पर मिली फूलकुमारी देवी ने कहा कि बेटा-बहू काम पर निकल गए थे और मैं पोते को खाना खिला रही थी कि अचानक घर में आग लग गई। जब तक कुछ समझ पाती, तब तक आसपास के घरों में भी आग फैली दिखी। किसी तरह वहां से जान बचाकर भागी। करीब 1 घंटे के अंदर सबकुछ जलकर राख हो गया। सभी के सिलेंडर फट गए। पिंटू दास का बेटा
और उसके पड़ोस का एक बच्चा गायब था। दोनों मिल गए।