नवादा से लोकजनशक्ति पार्टी के सांसद चंदन कुमार सिंह ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की है। सियासी हलकों में इस मुलाकात के अलग-अलग मतलब निकाले जा रहे हैं। माना जा रहा है कि नीतीश कुमार अपना किला 'मजबूत' कर बिहार भाजपा की संभावित चुनौती से निपटने का रास्ता तलाश रहे हैं। इस काम में उनकी मदद लोक जनशक्ति पार्टी के वे बागी विधायक-सांसद कर रहे हैं, जो कथित तौर पर चिराग के नेतृत्व में खुद को असहज महसूस कर रहे हैं। यानी नीतीश एक तीर से दो शिकार करना चाहते हैं। एक तो वे बिहार भाजपा की किसी संभावित चुनौती का इलाज भी करना चाहते हैं तो दूसरे लोकजनशक्ति पार्टी की कमर भी तोड़ना चाहते हैं, जो पिछले विधानसभा चुनाव में कम से कम 32 सीटों पर जेडीयू के हार का कारण बनी थी।
दरअसल, एलजेपी सांसद चंदन कुमार सिंह भूमिहार जाति से आते हैं। भाजपा और जेडीयू दोनों ही ये जानते हैं कि बिहार में भूमिहार वर्ग उनसे काफी नाराज है। विकल्पहीनता की स्थिति में उसने इस विधानसभा चुनाव में एनडीए को वोट दिया है। नीतीश कुमार इसी नाराजगी को दूर करना चाहते हैं और इसके लिए चंदन कुमार सिंह जैसे लोग उनकी मदद कर सकते हैं। कम्युनिस्ट नेता कन्हैया कुमार की जेडीयू मंत्री अशोक चौधरी से मुलाकात को भी इसी नजर से देखा जा रहा है। अगर कन्हैया कुमार जैसे वोकल युवा नेता नीतीश के खेमे से जुड़ जाते हैं, तो इस जमात के लिए यह एक बड़ा संदेश होगा।
बिहार की राजनीति पर पकड़ रखने वाले धीरेंद्र कुमार कहते हैं कि 2011 की जनगणना में बिहार में भूमिहार की आबादी तकरीबन छह फीसदी है। अपनी इस संख्या की बदौलत यह वर्ग बिहार की सियासत में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। अस्सी-नब्बे के दशक की रक्तरंजित राजनीति के कारण यह वर्ग आरजेडी के खेमे के साथ जुड़ने से अब तक असहज महसूस करता रहा है, लेकिन अगर तेजस्वी यादव कोई बड़ा दांव खेलते हैं तो बदली सियासी हवा में युवा भूमिहारों का एक वर्ग आरजेडी से जुड़ सकता है। अगर ऐसा होता है तो राज्य में नीतीश कुमार की स्थिति ज्यादा कमजोर हो जाएगी। इसके उलट अगर यही वर्ग नीतीश के साथ आ जाता है तो यह उनकी ताकत भी बन सकती है। चंदन सिंह और कन्हैया को साधने की कोशिश कर नीतीश कुमार यही संकेत देने की जुगत में हैं।
वहीं, लोकजनशक्ति पार्टी के एक शीर्ष नेता के मुताबिक रामविलास पासवान ने अपने जिंदा रहते ही पार्टी की कमान युवा चिराग पासवान के हाथों में दे दी थी। उन्होंने पार्टी के दिल्ली अधिवेशन में सबके सामने चिराग की यह कहकर तारीफ की थी कि उनके एनडीए में आने के पीछे सबसे बड़े कारण चिराग पासवान ही थे और उन्होंने ही पार्टी का भाजपा से समीकरण बिठाने में अहम भूमिका निभाई थी। मोदी लहर में पार्टी ने 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में अच्छी सफलता दर्ज की जो चिराग पासवान के खाते में गया।