बहुचर्चित टेंडर घोटाले में विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने जांच को निर्णायक मोड़ पर पहुंचाते हुए मुख्य आरोपी रिशु श्री, आईएएस अधिकारी संजीव हंस समेत सात लोगों के खिलाफ विशेष अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। SVU का दावा है कि सरकारी टेंडरों को प्रभावित करने, बिचौलियों के जरिए ठेके दिलाने और अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर पूरी प्रक्रिया को प्रभावित करने के पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं। एसवीयू के एडीजी पंकज दराद ने बुधवार को प्रेस वार्ता में बताया कि यह कार्रवाई प्रवर्तन निदेशालय (ED) से प्राप्त सूचनाओं और विस्तृत जांच के आधार पर की गई है। उनके अनुसार मामले में जिन लोगों की भूमिका जांच के दौरान सामने आई, उनके खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। अब आरोपियों को न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना होगा।
जांच एजेंसी के मुताबिक, रिशु श्री इस पूरे नेटवर्क का प्रमुख चेहरा था। उसके साथ मुमुक्ष चौधरी, तारिणी दास, उमेश कुमार सहित अन्य आरोपी कथित तौर पर सरकारी ठेकों को प्रभावित करने और पसंदीदा कंपनियों को लाभ पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। आरोप है कि बिचौलियों और अधिकारियों के गठजोड़ के जरिए टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित किया गया, जिससे सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए। एडीजी ने स्पष्ट किया कि फिलहाल जांच के आधार पर जिन लोगों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं, उन्हीं के विरुद्ध आरोप पत्र दायर किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में किसी नए अधिकारी के खिलाफ फिलहाल जांच का दायरा नहीं बढ़ाया जा रहा है।
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आईएएस संजीव हंस और पवन कुमार फिलहाल फरार हैं
एसवीयू ने यह भी बताया कि मामले के आरोपी आईएएस संजीव हंस और पवन कुमार फिलहाल फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए प्रयास जारी हैं और जल्द ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एडीजी पंकज दराद के अनुसार, ईडी से प्राप्त इनपुट के आधार पर मामला दर्ज कर विस्तृत जांच की गई। अब तक एकत्रित साक्ष्यों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि आरोप पत्र दाखिल होने के बावजूद मामले की जांच पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और जरूरत पड़ने पर आगे भी तथ्यों की जांच जारी रहेगी।