बीच का कुछ समय छोड़ दें तो 2005 से अबतक नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री रहे, लेकिन 2015 या उसके बाद आए बजट में भी प्राथमिकताएं नहीं बदलीं। प्राथमिकताएं कुल मिलाकर परिस्थितियों पर निर्भर करती हैं और बजट प्राथमिकताओं में कोई बदलाव नहीं हो रहा है।
वित्त मंत्री बदले, मगर नहीं बदला फोकस
बिहार में 2015 से अबतक 8 बजट पेश हुए हैं। 2015 में जब बजट पेश हुआ तो उस समय इसका आकार 120685.32 करोड़ रुपये था। सात साल बाद यानी 2022 में बजट का आकार दोगुना हो चुका था। इस बार 237691.19 करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया। गौर करने वाली बात यह है कि यह आठ बजट नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही पेश किए गए। हालांकि, 2016 और 2017 में नीतीश कुमार राजद के साथ थे। इन दोनों साल राजद कोटे से मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी ने बजट पेश किया था। इसके बाद 2018 में नीतीश कुमार ने भाजपा के साथ गठबंधन कर लिया। वर्ष 2018, 2019 और 2020 में भाजपा कोटे से मंत्री सुशील मोदी ने बजट पेश किया था। इसके बाद 2021 और 2022 का बजट भी भाजपा कोटे से मंत्री तार किशोर प्रसाद ने पेश किया। इस बार नीतीश कुमार फिर से राजद के साथ हैं। पिछले 8 साल में पहली बार जदयू कोटे से मंत्री विजय कुमार चौधरी बजट पेश करने जा रहे हैं। आइए जानते हैं पिछले आठ साल में बजट का आकार कितना बढ़ा? सरकार का फोकस किन-किन मुद्दों पर रहा?
2016 में तत्कालीन वित्त मंत्री अब्दुल बारी सिद्दकी ने बिहार बजट पेश किया था।
- फोटो : अमर उजाला
2015-16 का बजट
- CM मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में 12 मार्च 2015 को बिहार का बजट पेश किया था गया था। इस बजट का आकार 120685.32 करोड़ रुपये का था। इसमें शिक्षा के लिए 10950.14 करोड़ (बजट का 19%), स्वास्थ के लिए 2372.00 (बजट का 4.15) और कृषि के लिए 2342.35 (बजट का 4.10) दिए गए थे।
2016-17 का बजट
- महागठबंधन की सरकार के साथ CM मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का यह पहला बजट था। यह बजट 26 फरवरी 2016 को पेश किया था। इस बजट का आकार 144696.27 करोड़ रुपये का था। इस बजट में भी शिक्षा के विकास के लिए 14217.89 करोड़ रुपये दिए गए थे। यह कुल आवंटित बजट का 17.58 प्रतिशत था। वहीं स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 3567.42 करोड़ रुपये दिए गए थे। यह कुल बजट का 4.41 प्रतिशत था।
2017-18 का बजट
- महागठबंधन की सरकार के साथ CM मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का यह दूसरा बजट था। वित्त मंत्री अब्दुल बारी सिद्दकी ने 27 फरवरी 2017 को इस बजट को पेश किया था। इस बजट का आकार 160065.69 करोड़ रुपये था। इस बजट में भी शिक्षा पर सबसे अधिक 25251 करोड़ रुपये दिए गए। यह पूरे बजट का 17.93 प्रतिशत था। वहीं स्वास्थ्य पर 7001 करोड़ रुपए दिए गए। यह कुल बजट का 4.93 प्रतिशत था।
2018 से 2020 तक बिहार बजट वित्त मंत्री सुशील मोदी ने पेश किया था।
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2018-19 का बजट
NDA सरकार में CM मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में वित्त मंत्री सुशील मोदी ने 27 फरवरी 2018 को इस बजट को पेश किया था। इस बजट का आकार 176990.27 करोड़ रूपये था। इसमें भी शिक्षा विभाग के लिए सबसे अधिक 32125 करोड़ रूपये दिए गए। यह कुल बजट का 18 प्रतिशत था। इस बजट में भी स्वास्थ्य और कृषि पर विशेष ध्यान दिया था।
2019-20 का बजट
NDA सरकार में इस बजट CM मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में वित्त मंत्री सुशील मोदी ने बजट पेश किया था। इस बजट का आकर 200501.01 करोड़ रुपये का था। इसमें शिक्षा पर 34798 करोड़ रुपये खर्च किए गए। यह कुल राशि का 20.31 प्रतिशत था। स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार ने 5149.45 करोड़ रुपये दिए गए थे।
2020-21 का बजट
NDA सरकार में इस बजट को भी CM मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में वित्त मंत्री सुशील मोदी ने बजट पेश किया था। इस बजट का आकर 211761.49 करोड़ रुपये का था। इसमें भी शिक्षा के लिए सबसे अधिक 35191 करोड़ रुपये दिए गए। यह कुल बजट का 20 प्रतिशत हिस्सा था। इसमें स्वास्थ्य के लिए 10 हजार करोड़ रुपये दिये गए थे। सरकार ने इस बजट को देश का पहला ग्रीन बजट बताया था। इसमें 9 अगस्त को 2 करोड़ 51 लाख पौधे लगाने का संकल्प लिया गया था।
2021 और 2022 में बिहार बजट वित्त मंत्री तार किशोर प्रसाद ने पेश किया था।
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2021-22 का बजट
- 2020 के विधानसभा चुनाव के बाद यह पहला बजट था। NDA गठबंधन की इस सरकार का नेतृत्व भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही कर रहे थे। हालांकि, भाजपा कोटे से मंत्री बने तार किशोर प्रसाद ने 22 फरवरी को बजट पेश किया। कोरोना काल में पेश किए गए इस बजट का आकार 218302.70 था। इसमें भी शिक्षा को ही सबसे अधिक 38 हजार करोड़ दिए गए थे।
2022-23 का बजट
- NDA गठबंधन की सरकार की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नेतृत्व भाजपा कोटे से मंत्री तार किशोर प्रसाद ने बजट पेश किया। यह बजट 237691.19 करोड़ का था। इस बजट में भी शिक्षा के लिए सबसे अधिक 39191 करोड़ रुपये दिए गए। वहीं हेल्थ के लिए 16134 करोड़ की राशि दी गई। इस बजट में इथनॉल के उत्पादन के लिए 151 फैक्ट्रियां लगाने के प्रस्ताव मंजूर किए गए थे।