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Bihar Budget 2023: महागठबंधन में JDU कोटे के मंत्री का यह पहला बजट, RJD के दो बजट का क्या रहा...यह भी जानें

Tue, 28 Feb 2023 06:11 AM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

Bihar Budget: बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के बाद यह तीसरा बजट है, लेकिन असल में यह तीसरा बजट महागठबंधन सरकार का भी है। महागठबंधन सरकार- 1 में दो बार बजट राजद कोटे से तत्कालीन वित्त मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी ने पेश किया था।
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बिहार विधानसभा - फोटो : Bihar
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विस्तार
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बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के बाद यह तीसरा बजट है, लेकिन असल में यह तीसरा बजट महागठबंधन सरकार का भी है। महागठबंधन सरकार- 1 में दो बार बजट राजद कोटे से तत्कालीन वित्त मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी ने पेश किया था। महागठबंधन सरकार- 2 में वित्त मंत्री का प्रभार जदयू कोटे के मंत्री विजय कुमार चौधरी के पास है। तेजस्वी यादव के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए यह तीसरा बजट है। आइए जानते हैं कि महागठबंधन सरकार- 1 के दोनों बजट में क्या घोषणाएं की गई थीं, क्या पूरी हुईं और क्या सपना रह गया?
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26 फरवरी 2016
महागठबंधन की सरकार बनने के बाद पहली बार राजद और जदयू ने मिलकर बजट पेश किया था। उस बजट को वित्त मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी ने विधानसभा में पेश किया था। बजट का आकार 1,44,696.27 करोड़ रुपये का था। इस बजट में महागठबंधन की सरकार ने गरीब युवा और महिलाओं को केंद्र में रखा था और बिहार में शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, आधारभूत संरचना, कौशल विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाने की भी प्रतिबद्धता जताई थी। उस बजट में ही बिहार में महिलाओं को नौकरी में 35% आरक्षण देने की घोषणा की गई थी। तब वित्त मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सात निश्चय योजना का खूब बखान किया था। सरकार ने रोजगार बढ़ाने की बात कही थी और राज्य में तकनीकी संस्थानों की संख्या बढ़ाने पर भी जोर दिया था।

2017-18 का बजट तत्कालीन वित्त मंत्री अब्दुल बारी सिद्दकी ने पेश किया था। - फोटो : अमर उजाला
2016-17 के बजट की 4 प्रमुख घोषणाएं

1. बिहार में 5 नए मेडिकल कॉलेज और 5 प्राइवेट यूनिवर्सिटी खोले जाएंगे
  • पड़ताल- मधेपुरा में 2020 में मेडिकल कॉलेज बनकर तैयार हुआ। पूर्णिया मेडिकल कॉलेज 2022 में ही तैयार होना था। अब तक 40 फीसदी काम ही हो पाया है। सूत्रों की मानें तो कंस्ट्रक्शन कंपनी ने बिहार सरकार द्वारा राशि भुगतान नहीं करने के कारण काम रोक दिया है। समस्तीपुर में मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास 2019 में हुआ था। अब तक 50% काम ही हो पाया है। सारण के जेपी विवि कैंपस में बन रहा मेडिकल कॉलेज का काम करीब 75 फीसदी पूरा हुआ है। 

2. हर जिले में पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग कॉलेज खोले जाएंगे
  • 2005 से अब तक बिहार में 38 इंजीनियरिंग क़ॉलेज और 31 पॉलिटेक्निक संस्थानों की स्थापना की गई है। कई जिलों में कॉलेज के लिए भवन निर्माण का कार्य जारी है। महागठबंधन की सरकार का दावा है कि अब राज्य के प्रत्येक जिले में कम से कम एक इंजीनियरिंग संस्थान स्थापित है।

3.  सभी यूनिवर्सिटी में छात्रों को मुफ्त वाई-फाई की सुविधा मिलेगी
  • पटना समेत कई यूनिवर्सिटी में मुफ्त वाई-फाई की सुविधा इस वक्त उपलब्ध नहीं हुई। कुछ यूर्निवर्सिटी में मुफ्त वाई-फाई की सुविधा दी गई थी, लेकिन एक समय बाद तकनीकी या अन्य खामियों के कारण बंद हो गई।

4.  प्रवासी मजदूरों को स्लीपर क्लास में मुफ्त टिकट उपलब्ध कराएंगे
  • प्रवासी मजदूरों के लिए अब तक स्लीपर क्लास में मुफ्त टिकट उपलब्ध नहीं करवाया जा सका है। इसका प्रस्ताव भी आगे बढ़ा या नहीं, इस बारे में किसी को कुछ नहीं पता।  
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2017 में महागठबंधन की सरकार ने बजट पेश किया था। - फोटो : अमर उजाला
27 फरवरी 2017
जदयू और राजद की गठबंधन वाली सरकार का इस साल दूसरा बजट था। इसे भी वित्त मंत्री अब्दुल बारी सिद्दकी ने पेश किया। वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए 1,60,085.69 करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया था। यह बजट 2016-17 के मुकाबले 15,389.42 करोड़ रुपये अधिक था।

इस बजट में विकास, गरीबी उन्मूलन और वित्तीय स्थायित्व को प्राथमिकता दी गई थी। महिलाओं और अल्पसंख्यकों वर्ग पर खास फोकस किया गया था। इस बजट में भी सात निश्चय योजना के बखान किए गए। दावा किया गया कि एक साल के अंदर इस योजना के अधिकतर कार्यक्रम धरातल पर दिखने लगेंगे, जबकि भाजपा का दावा है कि सात निश्चय योजना अब तक पूर्ण रूप से सफल नहीं हो सकी है। वित्तीय वर्ष 2017-18 के बजट में ही महागठबंधन की सरकार ने बिहार में राज्य कर्मियों को सातवां वेतनमान भी देने की घोषणा की थी। सातवें वेतन आयोग की अनुशंसा लागू करने के वित्त विभाग साढ़े 9 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ वहन करने की बात कही थी। 

2017-18 के बजट में प्रमुख घोषणाएं

चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के लिए आवास की व्यवस्था
  • पड़ताल : महागठबंधन की सरकार द्वारा विधानसभा में जब यह घोषण की गई तो चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों में खासा उत्साह देखा गया था। लेकिन, 6 साल बीतने के बावजूद चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों को आवास का लाभ नहीं मिल पाया है। सरकार का दावा है कि आवास निर्माण का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। जल्द ही आवास उपलब्ध करवा दिया जाएगा। जबकि, हकीकत यह है कि पटना में भी अभी इसके लिए खाली कराई गई जमीन में से ज्यादा हिस्सा खाली ही है। पिछली कैबिनेट बैठक में सरकार ने सुपौल में सरकारी कर्मियों के लिए आवासन की व्यवस्था के लिए राशि का प्रावधान किया। सभी जिलों में इस सपना का पूरा होना सपने जैसा ही है।
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