2017-18 का बजट तत्कालीन वित्त मंत्री अब्दुल बारी सिद्दकी ने पेश किया था।
- फोटो : अमर उजाला
2017 में महागठबंधन की सरकार ने बजट पेश किया था।
- फोटो : अमर उजाला
27 फरवरी 2017
जदयू और राजद की गठबंधन वाली सरकार का इस साल दूसरा बजट था। इसे भी वित्त मंत्री अब्दुल बारी सिद्दकी ने पेश किया। वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए 1,60,085.69 करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया था। यह बजट 2016-17 के मुकाबले 15,389.42 करोड़ रुपये अधिक था।
इस बजट में विकास, गरीबी उन्मूलन और वित्तीय स्थायित्व को प्राथमिकता दी गई थी। महिलाओं और अल्पसंख्यकों वर्ग पर खास फोकस किया गया था। इस बजट में भी सात निश्चय योजना के बखान किए गए। दावा किया गया कि एक साल के अंदर इस योजना के अधिकतर कार्यक्रम धरातल पर दिखने लगेंगे, जबकि भाजपा का दावा है कि सात निश्चय योजना अब तक पूर्ण रूप से सफल नहीं हो सकी है। वित्तीय वर्ष 2017-18 के बजट में ही महागठबंधन की सरकार ने बिहार में राज्य कर्मियों को सातवां वेतनमान भी देने की घोषणा की थी। सातवें वेतन आयोग की अनुशंसा लागू करने के वित्त विभाग साढ़े 9 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ वहन करने की बात कही थी।
2017-18 के बजट में प्रमुख घोषणाएं
चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के लिए आवास की व्यवस्था
- पड़ताल : महागठबंधन की सरकार द्वारा विधानसभा में जब यह घोषण की गई तो चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों में खासा उत्साह देखा गया था। लेकिन, 6 साल बीतने के बावजूद चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों को आवास का लाभ नहीं मिल पाया है। सरकार का दावा है कि आवास निर्माण का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। जल्द ही आवास उपलब्ध करवा दिया जाएगा। जबकि, हकीकत यह है कि पटना में भी अभी इसके लिए खाली कराई गई जमीन में से ज्यादा हिस्सा खाली ही है। पिछली कैबिनेट बैठक में सरकार ने सुपौल में सरकारी कर्मियों के लिए आवासन की व्यवस्था के लिए राशि का प्रावधान किया। सभी जिलों में इस सपना का पूरा होना सपने जैसा ही है।