मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट सिमुलतला आवासीय विद्यालय से इस बार टॉप-5 में दो समेत टॉप 10 नंबर वाले 90 परीक्षार्थियों में कुल 10 परीक्षार्थी आए हैं। दोनों मूल रूप से बेगूसराय जिले के हैं। दोनों डॉक्टर बनना चाहते हैं और, दोनों ही इंटर में सिमुलतला आवासीय विद्यालय में नहीं पढ़ेंगे, जिस समय बिहार बोर्ड इन्हें टॉपर घोषित कर रहा था, दोनों बिहार से बाहर निकल चुके थे। अमर उजाला से दोनों ने बताया कि वह क्या-कैसे बनेंगे। क्या करेंगे और क्या नहीं करेंगे।
500 में 483 नंबर लाकर टॉप-4 में रहे शुभम ने कहा कि उन्होंने अभी तय नहीं किया है कि इंटरमीडिएट कहां से करेंगे। सिमुलतला से ही पढ़ेंगे? इस सवाल के जवाब में शुभम ने कहा कि सिमुलतला से इंटर करना नहीं संभव होगा। क्योंकि वहां NEET के लिए माहौल नहीं है। उन्होंने बताया कि नीट की तैयारी के लिए कोटा जा रहे हैं और अभी ट्रेन में हैं। बेगूसराय के छोटी बलिया निवासी शुभम ने कहा कि सिमुलतला में रहकर मेडिकल की तैयारी नहीं की जा सकती है और इंटर वहां से करने के बाद तैयारी का कोई अर्थ नहीं रहेगा।
पढ़ाई ने आधार बनाया, अब छोड़ना होगा स्कूल...
500 में 481 नंबर लाकर टॉप-5 में आए सुधांशु शेखर ने कहा कि वह दिल्ली जा रहे हैं। क्यों? पूछे जाने पर कहा कि डॉक्टर बनना है। इसकी तैयारी के लिए दिल्ली जा रहा हूं। बेगूसराय जिले के चंद्रपुरा निवासी सुधांशु शेखर ने कहा कि वह बिहार बोर्ड से इंटर की पढ़ाई करेंगे, लेकिन सिमुलतला में रहते हुए यह संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि सिमुलतला आवासीय विद्यालय है। पढ़ाई ने आधार बना दिया है, लेकिन आगे वहां रहकर पढ़ने पर डॉक्टर बनना संभव नहीं हो पाएगा। उन्होंने बताया कि टॉपर्स वेरीफिकेशन के पहले ही दिल्ली जाना तय हो गया था।