फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bihar Board Matric Result : सिर्फ नंबरों से ही नहीं बन गए टॉपर, सूची में 250 नाम थे, फिर ऐसे चुने गए 90

Fri, 31 Mar 2023 01:47 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

Bihar Board Toppers : बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (Bihar Board) की ओर से शुक्रवार को जारी मैट्रिक रिजल्ट में किन परीक्षार्थियों को क्यों टॉपर्स की सूची में रखा गया, यह जानना भी रोचक है। 'अमर उजाला' ने पूरी प्रक्रिया को जैसे समझा, वैसा दिखाने की कोशिश इस स्टोरी में।
विज्ञापन
बिहार बोर्ड मैट्रिक रिजल्ट 2020 - फोटो : self
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (Bihar Board) की ओर से शुक्रवार को जारी मैट्रिक रिजल्ट में किन परीक्षार्थियों को क्यों टॉपर्स की सूची में रखा गया, यह जानना भी रोचक है। सिर्फ ज्यादा प्राप्तांक लाने भर से टॉपर नहीं बने, उन्हें भौतिक परीक्षण से भी गुजरना पड़ा कि वह टॉपर कहलाने लायक हैं। बोर्ड ने कुल 90 परीक्षार्थियों को टॉप 10 में रखा है। वहीं टॉप 5 में 21 परीक्षार्थी आए हैं। इसमें शेखपुरा के मो. रुम्मान अशरफ पहले नंबर पर, भोजपुर की नम्रता दूसरे पर और औरंगाबाद की ज्ञानी अनुपमा तीसरे नंबर पर रही।इस बार 81 प्रतिशत छात्र पास किए हैं। इनमें टॉप 5 में सबसे ज्यादा जमुई के परीक्षार्थी हैं। सिमुलतला आवासीय विद्यालय के दो परीक्षार्थी टॉप 5 और 10 परीक्षार्थी टॉप 10 में आए हैं। बोर्ड ने 37 दिन में 16 लाख छात्रों का रिजल्ट का रिजल्ट जारी किया है। इस टॉपर्स सूची को फाइनल करने के लिए 250 से ज्यादा ऐसे परीक्षार्थियों को बिहार बोर्ड ने वेरीफिकेशन के लिए बुलाया था, जो प्राप्तांकों के मामले में आगे थे।

विज्ञापन



इनमें से ही पूछे गए थे प्रश्न। - फोटो : अमर उजाला
हैंड राइटिंग का भौतिक सत्यापन
टॉपर घोषित करने से पहले सबसे ज्यादा नंबर लाने वाले पूरे बिहार के परीक्षार्थियों को बिहार बोर्ड में रविवार तक वेरीफिकेशन के लिए बोर्ड मुख्यालय में बुलाया गया था। इसमें कोई फर्जी टॉपर नहीं बन जाए, इसके लिए मैट्रिक परीक्षार्थी की उत्तर पुस्तिकाओं से हैंड राइटिंग का भौतिक सत्यापन किया गया।

इनमें से ही पूछे गए थे प्रश्न। - फोटो : अमर उजाला
परीक्षार्थी कॉन्फिडेंट है या नहीं, इसकी भी जांच की गई
यह भी देखा गया कि जवाब देते समय क्लियरिटी है या नहीं, मतलब कन्फ्यूजन या अंदाजन तो नहीं है। इसके साथ ही यह भी देखा गया कि परीक्षार्थी कॉन्फिडेंट है या नहीं, मतलब अगर मीडिया के सामने पड़ा तो हिचकिचाएगा तो नहीं।

इनमें से ही पूछे गए थे प्रश्न। - फोटो : अमर उजाला
पसंदीदा विषय के बारे में भी बोलने के लिए कहा गया
मैट्रिक परीक्षार्थियों के लिए आसान थे, हालांकि कुछ फंसाने वाले भी थे। खासकर हिंदी में पूछे गए वैज्ञानिक या गणितीय टर्म को लेकर परीक्षार्थी फंसे भी। कई परीक्षार्थियों से उनके जीवन का लक्ष्य भी पूछा गया तो कई से उनके जिले या पसंदीदा विषय के बारे में भी बोलने के लिए कहा गया।

इनमें से ही पूछे गए थे प्रश्न। - फोटो : अमर उजाला
सर्वाधिक प्राप्तांक वाले सभी टॉप 1 में
टॉपर्स की सूची बनाने के बाद यह देखा जाता है कि सर्वाधिक नंबर वाले कितने परीक्षार्थी हैं। उन सभी को टॉप 1 में रखा गया। उसके बाद जिन सभी का प्राप्तांक हुआ, उन्हें सेकंड टॉपर के रूप में घोषित किया गया। इसी तरह बाद वालों की भी सूची इसी तरह बनाई गई। 

इनमें से ही पूछे गए थे प्रश्न। - फोटो : अमर उजाला
 रैंडम आधार पर पूछे गए थे सवाल 
‘अमर उजाला’ ने वेरीफिकेशन के लिए आए परीक्षार्थियों से मिलकर जाना कि उनसे कैसे और क्या सवाल पूछे गए। तीन दिनों तक सुबह 8 बजे से दोपहर बाद तीन बजे तक करीब सवाल सौ परीक्षार्थियों से बात की गई। जब सवाल रिपीट होने लगे, तब नोट करना बंद किया गया। सामने आया कि करीब 100 सवाल घुमा-फिरा या रैंडम आधार पर पूछे गए थे।

इनमें से ही पूछे गए थे प्रश्न। - फोटो : अमर उजाला
सिमुलतला आवासीय विद्यालय से भी टॉपर
मैट्रिक में 20 से ज्यादा बच्चे सिमुलतला आवासीय विद्यालय से आए थे। इनमें दो-तीन को छोड़ बाकी लड़कियां थी। वैसे, पूरे वेरीफिकेशन के दौरान लड़कियों की तादाद सबसे ज्यादा थी। 

इनमें से ही पूछे गए थे प्रश्न। - फोटो : अमर उजाला
हर विषय से पूछे गए थे सवाल
मैट्रिक में छात्रों को हर विषय पढ़ना होता है, इसलिए टॉपर चुनने के लिए भी परीक्षार्थियों से लगभग हर विषय से सवाल पूछे गए। किसी से हिंदी की लाइन को संस्कृत में बदलने कहा गया तो किसी को अंग्रेजी में। इसी तरह किसी से साइंस का सवाल पूछने के बाद इतिहार से जुड़ी जानकारी पूछ ली गई। अलग सवालों के पीछे परीक्षार्थी की ओवरऑल जानकारी का पता लगाना था।

 

इनमें से ही पूछे गए थे प्रश्न। - फोटो : अमर उजाला
कोर्स से ही पूछे से गए थे सवाल
परीक्षार्थियों ने वेरीफिकेशन के बाद बताया कि वह किसी दबाव में नहीं थे और आसानी से जवाब देकर आए हैं। ज्यादातर लड़कियों ने कहा कि उन्हें सभी सवालों के जवाब आते थे, क्योंकि यह कोर्स से ही थे।

इनमें से ही पूछे गए थे प्रश्न। - फोटो : अमर उजाला
वेरीफिकेशन के बगैर टॉपर घोषित करने की परंपरा खत्म
बिहार बोर्ड ने टॉपर्स घोटाले से बचने के लिए रिजल्ट में टॉपर घोषित करने के पहले परीक्षार्थियों के भौतिक सत्यापन की यह प्रक्रिया अपनाई है। इसलिए रिजल्ट की घोषणा से पहले टॉपर को बुलाया जाता है। इसलिए बोर्ड ने वेरीफिकेशन के बगैर टॉपर घोषित करने की परंपरा ही खत्म कर दी। कुछ साल पहले बोर्ड के रिजल्ट के बाद एक इंटर टॉपर के कारण पूरे देश में बिहार बोर्ड की बहुत ज्यादा बेइज्जती हो गई थी, जब उसने विषय का ही नाम गलत बता दिया था और स्पेलिंग भी गलत बता रही थी। 
विज्ञापन

इनमें से ही पूछे गए थे प्रश्न। - फोटो : अमर उजाला
टॉपर्स लिस्ट वालों की भी बढ़ी रही धड़कन
मैट्रिक परीक्षा परिणाम को लेकर हर परीक्षार्थी के साथ अभिभावकों की भी धड़कनें बढ़ी हुई थीं, लेकिन टॉपर्स सूची के वेरीफिकेशन के लिए बुलाए गए परीक्षार्थियों के अंदर रोमांच मिश्रित डर था। कितने परीक्षार्थियों को टॉपर्स वेरीफिकेशन के लिए बुलाया गया और उनमें से कौन बनेगा टॉपर, यह किसी को पता नहीं चला। किसी को उनका प्राप्तांक नहीं बताया गया था, इसलिए इन परीक्षार्थियों की भी धड़कनें बढ़ी रहीं। टॉपर्स सूची की घोषणा के पहले भी 'अमर उजाला' ने बताया था कि टॉपर्स बनाने के लिए इस बार बोर्ड ने क्या किया है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें