सोशल मीडिया पर आज फादर्स डे मनाया जा रहा है वहीं दूसरी तरफ बिहार की एक खबर ऐसी भी है जिसमें एक पिता ने ऑनलाइन कपड़ा खरीदने के लिए बेटे को रुपया नहीं दे पाया तो बेटे ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना पर स्थानीय पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया। मामला भागलपुर जिले के बरारी थाना क्षेत्र अंतर्गत छोटी खंजरपुर की है।
2500 रुपए नहीं मिलने पर दे दी जान
परिजनों का कहना है कि दोपहर में कुरियर से बेटे ने अपने लिए ऑनलाइन कपड़ा मंगवाया था जिसके लिए अंकित ने 2500 रुपए की मांग की। पैसा नहीं रहने के कारण छविनाथ राम ने रुपया देने में अपनी असमर्थता जताई। दफ्तर से काम खत्म करके छविनाथ राम जब शाम में अपने घर पहुंचे तो अंकित के बारे में पूछा। अंकित की मां ने कहा कि वह गुस्से में है और दोपहर का खाना भी उसने नहीं खाया है। छविनाथ अंकित को मनाने के लिए उसके कमरे के पास गए तो दरवाजा अंदर से बंद था। फिर उन्होंने दरवाजा खटखटाया लेकिन अन्दर से कोई रिस्पांस नहीं मिला। तब उन्होंने अपने बेटे के नम्बर पर कॉल किया लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुआ। तब अंकित के दोस्त ने भी कॉल किया लेकिन उसका कॉल भी रिसीव नहीं हुआ। अब उन्हें किसी अनहोनी का डर होने लगा। फिर गार्ड की मदद से खंती से दरवाजा तोड़ा तो देखा कि अंकित पंखे से झूल रहा है। उसने गमछे का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। आननफानन में फंदा खोलकर मायागंज अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
एक सप्ताह पहले भी ऑनलाइन कपड़ा लौटाने से था नाराज
गौरतलब हो कि अंकित एक बार अपने कपड़े का ऑनलाइन खरीदारी करने के लिए 1 सप्ताह पहले भी कहा था जिसका कपड़ा घर पर आ भी गया था लेकिन पेमेंट नहीं देने के चलते उसे लौटना पड़ गया था। इस वजह से वह इस बात को लेकर डिप्रेशन में चला गया था और अपने पिता से बार-बार कहता था कि बेटियों के लिए आप सब कुछ करते हैं लेकिन मेरे लिए कुछ भी नहीं।
बेटे को बनाना चाहते थे इंजीनियर
छविनाथ ने बताया कि उन्हें तीन बेटियां है और राहुल एकलौता था। बड़ी बेटी जम्मू में, दूसरी बेटी चंडीगढ़ में और छोटी बेटी भागलपुर में ही रहकर पढ़ाई कर रही है जबकि अंकित इस बार इंटर की परीक्षा पास किया था। वह अंकित को अपने तरह इंजीनियर बनाना चाहते थे। वह मूल रूप से सुल्तानगंज में प्रखंड कार्यालय के समीप का रहने वाले हैं। पिता छविनाथ अपने बेटे अंकित के इस तरह के कदम उठाने से काफी मायूस है । पिता का कहना है मैंने यह कभी नहीं सोचा था कि मेरा बेटा कपड़े नहीं दिलाने के चलते इतना बड़ा कदम उठा लेगा।