पप्पू यादव और लालू प्रसाद यादव के साथ तेजस्वी यादव
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पप्पू यादव को नहीं मिला था आशीर्वाद
याद कीजिए पप्पू यादव जब कांग्रेस में शामिल होने जा रहे थे, तब उससे एक दिन पहले वह लालू प्रसाद यादव से जाकर मिले थे। पप्पू यादव ने उस समय मीडिया में यह कहा था कि लालू प्रसाद हमारे गार्जियन हैं और मैं उनसे आशीर्वाद लेने गया था। यह सच है कि पप्पू यादव का लालू प्रसाद यादव से मिलने के पीछे का कारण यही था कि वह उनसे आशीर्वाद लेना चाहते थे। एक तरह से वह एक समझौता करना चाहते थे कि राष्ट्रीय जनता दल उन्हें कांग्रेस में शामिल होने में परेशान ना करे लेकिन वह आशीर्वाद पप्पू यादव को लालू प्रसाद यादव से नहीं मिला।
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लोक सभा चुनाव में राजद ने खड़ा किया था अपना उम्मीदवार
अब आप वह दिन भी याद कीजिए बाद लोकसभा चुनाव का समय था और कन्हैया कुमार लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए बेगूसराय में कम्युनिस्ट पार्टी से उम्मीदवार बने थे। उस समय राष्ट्रीय जनता दल ने बेगूसराय से तनवीर हसन को अपना उम्मीदवार बनाकर खड़ा कर दिया था। नतीजतन कन्हैया कुमार ना घर के रहे न घाट के। बेगूसराय से एनडीए के उम्मीदवार गिरिराज सिंह भारी बहुमत से जीत गये, जबकि कन्हैया कुमार को जीताने के लिए देशभर के नेता और क्रांतिकारी बेगूसराय में जुटे थे और सब ने मिलकर उनका पुरजोर प्रचार-प्रसार किया था। उस समय कन्हैया कुमार की हार राष्ट्रीय जनता दल के कारण ही हुई थी।
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राहुल गाँधी के साथ कन्हैया कुमार पलायन यात्रा में
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कन्हैया कुमार की यात्रा अचानक हो गई बंद
अब वह दिन भी याद कर लीजिए जब कन्हैया कुमार विधानसभा चुनाव से पहले बिहार में यात्रा पर निकले थे। उस समय यह चर्चा तेज हो गई कि बिहार में मुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा। इस चर्चा के तेज होते ही कन्हैया कुमार की यात्रा को अचानक स्थगित करवा कर को उन्हें वापस दिल्ली बुलवा लिया गया। मुख्यमंत्री फेस को लेकर यह चर्चा खूब होने लगी थी कि महागठबंधन में मुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा? क्या कन्हैया कुमार फिर वापस बिहार आ सकते हैं? इस चर्चा के तेज होते ही अचानक अचानक कन्हैया कुमार की बिहार यात्रा को ठंढ़े बसते में डाल दिया गया, जबकि उसी यात्रा में राहुल गांधी खुद शामिल भी हुए थे। राजनीतिक जानकारी का स्पष्ट रूप से कहना है कि जब-जब महागठबंधन में सीएम फेस की बात होती है तब-तब तेजस्वी यादव यादव अकेले रहें, इस बात की पूरी कोशिश की जाती है।
कन्हैया और पप्पू यादव इस वजह से गाड़ी पर नहीं दिखे
अब आज की बात करते हैं जब बुधवार की सुबह बिहार बंद का आंदोलन शुरू हुआ तब सिर्फ तेजस्वी यादव का ही चेहरा सामने रहे इसके लिए उस खास गाड़ी, जिस पर तेजस्वी यादव, राहुल गांधी, डी राजा, दीपांकर भट्टाचार्य सहित कुछ नेता सवार हुए, उस गाड़ी पर से पप्पू यादव और कन्हैया कुमार को उतार दिया गया। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पप्पू यादव के खुद का अपना जनाधार है। पप्पू यादव जब भी अपना जनाधार बनाते हैं, उस स्थिति में लालू प्रसाद यादव तेजस्वी यादव के लिए पप्पू यादव को रोकने की पुरजोर कोशिश करते हैं। याद कीजिये वह समय जब लोक सब हा चुनाव में पप्पू यादव को कांग्रेस ने पप्पू यादव को पूर्णिया से टिकट नहीं दिया, तब लालू प्रसाद यादव ने पप्पू यादव को रोकने के लिए बीमा भारती को अपना उम्मीदवार बनाकर पप्पू यादव का प्रतिद्वंदी बना दिया। लेकिन पप्पू यादव का अपना जनादेश होने के कारण वह लोक सभा चुनाव में सबको पछ्दते हुए आगे निकल गये।
बिहार बंद की भीड़ में राहुल गाँधी
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जानिए क्या है वजह
इस संबंध में चाणक्य इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलीटिकल राइट्स एंड रिसर्च के अध्यक्ष सुनील कुमार सिन्हा बताते हैं कि आज गाड़ी पर पप्पू यादव और कन्हैया कुमार को इस वजह से नहीं चढ़ाया गया क्यों कि आज के बिहार बंद कार्यक्रम में तेजस्वी यादव का चेहरा सबसे आगे रह सके। इस महफिल को कन्हैया कुमार और पप्पू यादव ना लूट लें, इसलिए कन्हैया कुमार और पप्पू यादव के लिए स्पष्ट आदेश था कि बाकी लोग गाड़ी पर सवार हों, लेकिन पप्पू यादव और कन्हैया कुमार गाड़ी पर सवार ना हो सके। यह आज साफ दिख रहा था क्योंकि न तो पप्पू यादव आज के लिए कोई नया चेहरा हैं और न कन्हैया कुमार नया चेहरा हैं। इन दोनों को गाड़ी पर चढ़ने से रोका जाना यह साफ तौर पर दिख रहा था कि बिहार की इस राजनीति में तेजस्वी यादव अकेला चेहरा रह सकें, इसका पूरा ख्याल रखा गया।