भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव भुपेंदर यादव ने राजग में खटपट की अटकलों को विराम देते हुए कहा है कि भाजपा, जदयू और लोजपा नीतीश कुमार के नेतृत्व में मिलकर बिहार विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे। पार्टी की अहम बैठक के बाद उन्होंने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व ने राजग घटक दलों से बात करने के लिए प्रतिनिधियों को नियुक्त कर दिया है। हम बृहस्पतिवार तक इस प्रक्रिया को पूरा कर लेंगे।
दरअसल ऐसी रिपोर्ट आ रही थी कि सीट बंटवारे को लेकर राजग में भ्रम की स्थिति है। इससे पहले मंगलवार को लोजपा के राष्ट्रीय महासचिव शाहनावाज अहमद कैफी ने पार्टी अध्यक्ष चिराग पासवान को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की मांग की थी, जिसको लेकर अटकलों को बल मिला था।
कुशवाहा को एक और झटका प्रमुख सहयोगी ने छोड़ा साथ
बिहार चुनाव से पहले राजग से ठुकराए और महागठबंधन से त्याग दिए गए पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा को बुधवार को एक और झटका लगा। दरअसल मायावती की बसपा के साथ कुशवाहा द्वारा गठबंधन करने से नाराज आरएलएसपी के प्रमुख नेता और कुशवाहा के सहयोगी माधव आनंद ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया।
आरएलएसपी के राष्ट्रीय महासचिव और मुख्य प्रवक्ता आनंद ने सभी पदों सहित पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने बेमेल गठबंधन कर खुद को खत्म करने का जोखिम लिया है। आनंद ने कहा, मैं किसी व्यक्तिगत कड़वाहट के कारण पार्टी नहीं छोड़ रहा हूं।
मैं 2017 में पार्टी में शामिल हुआ था और तब से लगातार इसको पोषित किया है, लेकिन दुर्भाग्यवश आरएलएसपी ने जो राह चुनी है, वह केवल इसे नष्ट करेगी। ऐसे हालात में बिहार में राजनीतिक बदलाव लाने का मेरा लक्ष्य पूरा नहीं होगा।
सुशांत सिह राजपूत के पिता केके सिंह ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनके आवास पर मुलाकात की। चुनावी समय में इस मुलाकात के कई मायने निकाले जा रहे हैं। हलांकि सुशांत के पिता केके सिंह ने इसे शिष्टाचार भेंट बताया। इस मुलाकात के दौरान सुशांत के पिता के अलावा, उनके बहनोई और बहन भी मौजूद रहीं। मुंबई पुलिस की जांच पर संदेह जताते हुए सुशांत सिंह राजपूत के पिता केके सिंह ने पटना में एफआईआर दर्ज कराई थी।
इस मामले की जांच के लिए जब बिहार पुलिस मुंबई पहुंची तब बड़ा बवाल हुआ था। अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध मौत का मामला बिहार में सियासी मुद्दा बन चुका है। इस मामले में महाराष्ट्र पुलिस के खिलाफ बिहार के तत्कालीन डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने इस मामले में सीबीआई जांच तक पहुंचाया जो खुद जदयू में शामिल हो चुके हैं। इसलिए इस मुलाकात के राजनीतिक मायने-मतलब भी निकाले जा रहे हैं।