सिर्फ आंकड़ेबाजी, राजनीति का मतलब आंकड़ेबाजी नहीं होता है। आंकड़ों से यदि राजनीति होती तो जितने भी लड़के कंप्यूटर पर काम करते हैं, चार्टड अकाउंटेंट सब, आंकड़े जुटाने वाले अभी एमपी- एमएलए होते। सिर्फ पैसों के बल पर भी राजनीति नहीं होती है। उक्त बातें गुरुवार को सहरसा स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए पूर्व सांसद आनंद मोहन ने कही। प्रशांत किशोर का बिना नाम लिए उन्होंने कहा कि मैने देखा जो किस तरह शिविरों की तरह शहर बसाए गए, पोर्टेबल सुलभ शौचालय, पोर्टेबल शहर घुमाएं जा रहे है। युवाओं को बाइक देकर दैनिक मजदूर की तरह एक राजनीति का नया ट्रेंड बिहार में शुरू किया गया है।
कहीं कोई विकल्प नहीं है
पूर्व सांसद आनंद मोहन ने कहा कि बिहार सोशलिस्ट ओर गांधीवादियों का बिहार रहा है। गांधी जी का फोटो लेकर राजनीति के नाम पर प्रदर्शन करना बिहार की राजनीति के लिए शुभ संकेत नहीं है। जो लोग विकल्प का ख्वाब पालते हैं मै कहना चाहता हूं जो विकल्प देने आए थे इस बिहार में। उपेन्द्र कुशवाहा भी निकले थे, पप्पू यादव भी निकले थे, चिराग पासवान भी निकले थे, नागमणि भी निकले थे, ओवैसी भी निकले थे। यह सारे लोग जिनका मैंने नाम गिनाया, इनके सामने तो इसमें से कोई ऐसा नहीं होंगे जिनका यह दसवां अंश भी होंगे। राजनीति में, जनाधार में या किसी भी मामले में दसांश हो। बिहार में अभी मतदाता दो ध्रुव एनडीए और महागठबंधन में बंटे हैं। कहीं कोई विकल्प नहीं है। 2025 तक तो कोई नहीं है। आगे आगे देखिए होता है क्या। लोकतंत्र में सबको प्रयास करने का अधिकार है। लोग निकले है वास्ता लेकर।
एनडीए पर कोई असर नहीं पड़ेगा
आनंद मोहन ने कहा कि चार सीट पर हुए उपचुनाव को लेकर उन्होंने कहा कि इस चुनाव के हार जीत से सरकार के सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि ये चारों सीट यदि एनडीए जीत लेती है तो यह सरकार बना लेगी। एनडीए ऑलरेडी सरकार में है। इसके परिणाम से एनडीए पर कोई असर नहीं पड़ेगा। लेकिन यह चुनाव 2025 का स्वरूप तय करेगा। उन्होंने कहा कि चार में से तीन सीट तो महागठबंधन का छोड़ा हुआ सीट है। सिर्फ इमामगंज ही एनडीए का था। उन्होंने कहा कि 23 को सब कुछ सामने आ जाएगा।