जन-सुराज यात्रा पर निकले चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (PK) तमिलनाडु हिंसा पर अफवाह-बनाम-हकीकत की लड़ाई में पूरी ताकत के साथ कूद पड़े हैं। शुक्रवार को ट्वीट के जरिए उन्होंने एक वीडियो जारी किया। उन्होंने दावा किया कि इस वीडियो में वहां की 'नाम तमिलर काची' पार्टी के प्रमुख सेंथामिझन सीमान हिंदीभाषियों के खिलाफ हिंसा के लिए लोगों को भड़का रहे हैं।
तेजस्वी को झूठा कहा था, वीडियो जारी करना था
शुक्रवार को ही बिहार सरकार की चार सदस्यों वाली जांच टीम ने तमिलनाडु में बिहारी मजदूरों के साथ अप्रिय घटना नहीं होने और वहां का माहौल सौहार्दपूर्ण होने की अपनी
रिपोर्ट मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सौंपी है। इस रिपोर्ट में लिखा गया है कि तमिलनाडु में बिहारियों या हिंदीभाषियों के साथ कोई हिंसा नहीं हुई है। रिपोर्ट में सारे वीडियो को अफवाह बताया गया है। पीके ने कुछ दिनों पहले ऐसे वीडियो को अफवाह कहने पर उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को आड़े हाथ लिया था। उन्होंने कहा था कि तेजस्वी झूठ बोल रहे हैं कि तमिलनाडु में बिहारियों के खिलाफ कोई खराब माहौल नहीं है। उन्होंने तमिलनाडु में बिहारियों के खिलाफ हो रही हिंसा को लेकर खुलासा करने वाला दो वीडियो जारी करने की बात कही थी। शुक्रवार को उनमें से एक जारी किया।
कब, क्यों, कितना, कहां तक उठा था बवाल, जानें
दरअसल, जमुई के एक युवक की धारदार हथियार से तमिलनाडु में हत्या और दूसरे युवक की सुसाइड बताई जा रही मौत का मामला सामने आने पर कई तरह के सवाल तो उठे, मगर हंगामा नहीं हुआ। इसके बाद कुछ लोगों ने साजिशन 10-12 बिहारियों की तमिलनाडु में हत्या किए जाने की अफवाह उड़ा दी। अफवाहों को ताकत देने के लिए फर्जी वीडियो बना-बनाकर डाले गए। बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान यह फर्जी केस सामने आए। जमुई के जिस युवक की हत्या और जिसकी आत्महत्या की बात थी, उसपर हंगामा नहीं हुआ। बाद में जो मास किलिंग की अफवाहें उड़ाई गईं, उसे विपक्षी दलों ने बड़ा मुद्दा बना दिया। हंगामा तब और बढ़ा गया, जब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के जन्मदिन में बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के जाने की तस्वीरें सामने आईं। विपक्ष ने इस मुद्दे को गरमा दिया।
तेजस्वी के स्टैंड से अलग मुख्यमंत्री ने जांच टीम भेजी
तेजस्वी ने तमिलनाडु हिंसा को अफवाह बताया तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हंगामा देखकर पहले तमिलनाडु सरकार को संदेशा भिजवाया और फिर वहां जांच टीम भेज दी। इस बीच, अफवाह फैलाने वालों पर कार्रवाई भी शुरू हो गई। बिहार में दर्ज हुए केस में अबतक चार में से
दो की गिरफ्तारी हो चुकी है। बाकी दो फरार हैं। अफवाह फैलाने में बिहार सरकार ने दो मीडिया घरानों (अमर उजाला नहीं) को भी तलब किया है, क्योंकि इन्होंने 10-12 मौतों की अफवाहों और फर्जी वीडियो को खबरों में जगह दी थी।