भागलपुर जिले के कहलगांव और पीरपैंती प्रखंड के बाढ़ प्रभावित पंचायतों में इस बार बाढ़ राहत राशि (जीआर राशि) में बड़े पैमाने पर लूट-खसोट का मामला सामने आया है। प्रभावित पंचायतों के मुखिया, पंचायत सचिव और अंचल कार्यालय के डाटा ऑपरेटर की मिलीभगत से सरकार द्वारा जारी जीआर राशि का धड़ल्ले से बंदरबांट किया गया है।
यह कैसी विडंबना है कि जिन परिवारों के घर बाढ़ से प्रभावित हुए, उनके खाते में राहत राशि नहीं पहुँची। वहीं जिनके मकानों तक बाढ़ का पानी कभी पहुँचा ही नहीं, उन अपात्र लोगों के खाते में आसानी से सात-सात हजार रुपए भेज दिए गए। सरकारी व्यवस्था को सेंध लगाने वाले कर्मियों के इस कारनामे से वास्तविक बाढ़ पीड़ित परिवार सरकारी सहायता से वंचित रह गए हैं।
पात्र लाभुक अब प्रखंड और अंचल कार्यालय का चक्कर लगाने को विवश हैं। बीते कुछ दिनों से लगातार जीआर राशि की मांग को लेकर ये परिवार दफ्तरों में प्रदर्शन और नारेबाजी कर रहे हैं। जब अधिकारियों ने उनकी बातों को अनसुना कर दिया तो हताश होकर बाढ़ पीड़ितों ने सड़क जाम किया। प्रशासन ने उल्टे इनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर दी। कहलगांव अंचलाधिकारी द्वारा धरना दे रहे लोगों से कहा गया कि वे साक्ष्य और कागजात जमा करें। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जिन अपात्र लोगों ने न तो कोई साक्ष्य दिया और न ही भौतिक सत्यापन कराया, उनके खाते में सात हजार की राशि आखिर कैसे पहुँच गई।
बाढ़ प्रभावित परिवारों की इस बदहाली के बीच जिले में तीसरी बार गंगा का जलस्तर बढ़ने से फिर से कई पंचायतों में पानी घुस गया है। लोग बेघर होकर सड़क और रेल ट्रैक किनारे शरण लेने को मजबूर हैं। परिवारों के साथ ये लोग दर्द भरा जीवन जी रहे हैं और कोई तारणहार उनकी सुध नहीं ले रहा।
भागलपुर जिले के कुल 11 प्रखंड बाढ़ से प्रभावित हुए थे। इनमें कहलगांव और पीरपैंती प्रखंड की करीब एक दर्जन पंचायतें गंभीर रूप से प्रभावित रहीं। कहलगांव प्रखंड की सात पंचायतें पूरी तरह और चार पंचायतें आंशिक रूप से डूबीं। मुख्यमंत्री द्वारा 20 अगस्त को बाढ़ प्रभावित परिवारों के खातों में डीबीटी के जरिए अनुग्रह अनुदान राशि भेजी गई थी। भागलपुर जिले के कहलगांव प्रखंड में 16,656 परिवारों सहित कुल 11 प्रखंडों के लिए 83.95 करोड़ रुपए जारी किए गए। लेकिन सरकारी सिस्टम में पहले से ही सेंध लगाने की तैयारी कर ली गई थी।
2024 और 2025 की बाढ़ पीड़ितों की सूची में भी गड़बड़ी
जनप्रतिनिधियों और डाटा ऑपरेटरों ने अपात्र लोगों से दो से तीन हजार रुपए की वसूली कर उनके खाते में सात हजार की राहत राशि भेज दी। इस मिलीभगत से पात्र लाभुकों को अब तक कोई मदद नहीं मिल पाई। 2024 और 2025 की बाढ़ पीड़ितों की सूची में भी गड़बड़ी सामने आई है। आरोप है कि मृतकों के नाम हटाकर दूसरे लोगों के नाम जोड़ दिए गए, नई सूची को पुराने से मिलान तक नहीं किया गया। कई जगहों पर एक पंचायत के लोगों का नाम दूसरे पंचायत की सूची में डाल दिया गया। शिक्षक और जनप्रतिनिधियों के परिवार तक ने अपने नाम से राशि का लाभ उठा लिया।
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सूत्रों के अनुसार कहलगांव और पीरपैंती प्रखंड में करीब 55 से 60 फीसदी ऐसे परिवारों को राशि दी गई जिनके घर ऊंचे इलाके में हैं और जिन तक बाढ़ का पानी कभी पहुँचा ही नहीं। कहीं-कहीं संयुक्त परिवार के तीन-चार सदस्यों के खातों में राशि आ गई, तो कहीं पति-पत्नी दोनों को सात-सात हजार रुपए मिल गए। जिन्होंने बीचौलिए को पैसा नहीं दिया, वे वास्तविक बाढ़ पीड़ित अब भी राहत से वंचित हैं।
भोलसर और घोघा पंचायतों में सबसे अधिक गड़बड़ी
कहलगांव अंचल के भोलसर और घोघा पंचायतों में सबसे अधिक गड़बड़ी हुई है। यहां लगभग 60 फीसदी अपात्र परिवारों को जीआर राशि दी गई। भोलसर पंचायत के सभी 17 वार्डों में मनमाने ढंग से नाम जोड़कर राशि का बंदरबांट हुआ। कुलकुलिया, पकडतलला, त्रिमुहान और मौनी टोला गांव में यह खेल ज्यादा चला। अमर उजाला के पास उन अपात्र लोगों की सूची मौजूद है जिन्होंने अंचल कर्मियों की मिलीभगत से यह राशि ली। इसके अलावा घोघा, प्रशस्तडीह, कोदवार, जानीडीह और पक्कीसराय में भी कमोबेश यही स्थिति रही।
इसी महीने पकडतल्ला और पक्कीसराय गांव के सैकड़ों बाढ़ पीड़ित परिवारों ने जीआर राशि की मांग को लेकर कहलगांव सीओ कार्यालय का घेराव किया था। जब उनकी मांग नहीं सुनी गई तो अगले ही दिन उन्होंने कहलगांव-भागलपुर एनएच-80 को तीन-चार घंटे के लिए जाम कर दिया। इसके बावजूद अधिकारी केवल टालमटोल करते रहे।
अमर उजाला के पास भोलसर पंचायत के अपात्र लाभुकों की एक विस्तृत सूची भी है, जिसमें कई स्थानीय नेता, जनप्रतिनिधि और उनके परिजन शामिल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए ताकि दोषियों पर कार्रवाई हो और वास्तविक बाढ़ पीड़ितों को उनका हक मिल सके। हालांकि इस मामले में भागलपुर के डीएम डा. नवल किशोर चौधरी ने बताया कि अगर किसी पंचायत में राशि को लेकर गड़बड़ी हुई है, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी।
| 1 |
नित्यानंद मिश्रा |
पिता प्रेमानंद मिश्रा |
भोलसर, वार्ड नं 2 |
| 2 |
दीपक कुमार सिंह |
पिता कमलेश्वर सिंह |
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| 3 |
माला सिंह |
पति संजय सिंह (जदयू नेता) |
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| 4 |
मनोरंजन सिंह |
पिता राम कुमार सिंह |
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| 5 |
निरंजन सिंह |
पिता स्व हरेंद्र सिंह |
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| 6 |
नीतेश कुमार सिंह |
पिता प्रदुम्नन सिंह |
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| 7 |
गोकुल नंद मिश्रा |
पिता तारण मिश्रा |
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| 8 |
अर्चना मिश्रा |
पति जितेन्द्र मिश्रा |
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| 9 |
ललिता मिश्रा |
पति विधा शंकर मिश्रा |
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| 10 |
आशा मिश्रा |
पति पंचानंद मिश्रा |
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| 11 |
रेखा मिश्रा |
पति कृष्णानंद मिश्रा |
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| 12 |
पंकज मिश्रा |
पिता प्रेमानंद मिश्रा |
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| 13 |
पिंकी मिश्रा |
पति पंकज मिश्रा (दोनों पति पत्नी) |
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| 14 |
रमेश चौधरी |
पिता महेंद्र चौधरी |
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| 15 |
जयकांत चौधरी |
पिता नंदलाल चौधरी |
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| 16 |
मनोज भगत |
पिता नंदकिशोर भगत |
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| 17 |
रिंकी कुमारी |
पिता कुंदन कुमार |
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| 18 |
लालू चौधरी |
पिता स्व महेंद्र प्रसाद चौधरी |
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| 19 |
रंजन कुमार रंजन |
पिता प्रेमानंद मिश्रा |
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| 20 |
विवेकानंद सिंह |
पिता महेंद्र सिंह |
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| 21 |
प्रीति कुमारी |
पति राजेश कुमार |
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| 22 |
मनोज कुमार सिंह |
वार्ड सदस्य |
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| 23 |
अमूल चौधरी |
पिता महेंद्र प्रसाद चौधरी |
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| 24 |
अर्चना देवी |
पति जितेन्द्र सिंह (किसान सलाहकार) |
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| 25 |
अजय मिश्रा |
पिता दीनानाथ मिश्रा |