Bihar: मृतक के बड़े भाई दिनेश मंडल के अनुसार, प्रमोद मंडल बीते कई दिनों से दिन-रात पुनरीक्षण कार्य में लगे हुए थे। काम की प्रगति को लेकर कहलगांव डीसीएलआर कार्यालय से उन्हें फोन आया था, जिसमें उनके कार्य की धीमी गति पर नाराजगी जताई गई और समय पर कार्य पूरा नहीं होने पर निलंबन की चेतावनी दी गई।
पीरपैंती विधानसभा क्षेत्र के खवासपुर गांव निवासी और बूथ संख्या-170 के बीएलओ प्रमोद मंडल (46 वर्ष) की शुक्रवार को हृदयगति रुकने से मौत हो गई। वे मध्य विद्यालय मोहनपुर में पदस्थापित शिक्षक थे। परिजनों का कहना है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य का अत्यधिक दबाव और निलंबन की चेतावनी इस दुखद मौत का कारण बनी।
रात-दिन काम, ऊपर से निलंबन की चेतावनी
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मृतक के बड़े भाई दिनेश मंडल के अनुसार, प्रमोद मंडल बीते कई दिनों से दिन-रात पुनरीक्षण कार्य में लगे हुए थे। काम की प्रगति को लेकर कहलगांव डीसीएलआर कार्यालय से उन्हें फोन आया था, जिसमें उनके कार्य की धीमी गति पर नाराजगी जताई गई और समय पर कार्य पूरा नहीं होने पर निलंबन की चेतावनी दी गई। शुक्रवार को वे इसी मानसिक दबाव में घर लौटे थे। घर पहुंचते ही अचानक उन्हें दिल का दौरा पड़ा। परिजन उन्हें आनन-फानन में पीरपैंती रेफरल अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मौत की खबर सुनते ही घर में कोहराम मच गया। पत्नी सरिता कुमारी और तीनों बच्चे लक्षित राज, हर्ष राज और ऋषि राज का रो-रोकर बुरा हाल है।
परिजनों का आरोप है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य का अत्यधिक दबाव ही प्रमोद की मौत का कारण बना। यह घटना एक बार फिर सरकारी कार्यों, खासकर निर्वाचन ड्यूटी जैसे अतिरिक्त कार्यों में लगे शिक्षकों और कर्मचारियों पर पड़ रहे मानसिक व शारीरिक बोझ को उजागर करती है। बताया जा रहा है कि प्रमोद मंडल व्यवहार में बेहद शांत, मिलनसार और कर्तव्यनिष्ठ व्यक्ति थे।
सरकारी नौकरी की मांग
शोकाकुल परिजनों ने सरकार से मांग की है कि प्रमोद की पत्नी को अनुकंपा आधारित सरकारी नौकरी दी जाए, जिससे परिवार का पालन-पोषण हो सके। घटना की जानकारी मिलते ही पीरपैंती बीडीओ अभिमन्यु कुमार, प्रमुख रश्मि कुमारी समेत कई अधिकारी मृतक के घर पहुंचे और परिजनों को सांत्वना दी। अधिकारियों ने परिजनों को भरोसा दिलाया कि वे वरीय अधिकारियों से इस संबंध में बात करेंगे।
ज्ञात हो कि मतदाता सूची विशेष पुनरीक्षण कार्यक्रम को लेकर बीएलओ पर काम का भारी दबाव है। लापरवाही बरतने पर वेतन रोकने और निलंबन की कार्रवाई की खबरें भी आ रही हैं। प्रमोद मंडल की मौत ने इस गंभीर मुद्दे की ओर फिर से ध्यान आकर्षित किया है।