प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को भागलपुर जिले को करीब 40 हजार करोड़ रुपये की ऊर्जा और रेलवे परियोजनाओं की सौगात दी। पूर्णिया एयरपोर्ट टर्मिनल के उद्घाटन स्थल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पीएम मोदी ने भागलपुर के पीरपैंती में निजी क्षेत्र के 2400 मेगावाट क्षमता वाले अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्रोजेक्ट और विक्रमशिला-कटरिया रेल पुल सह मार्ग का वर्चुअल शिलान्यास किया। इस मौके पर जिले के तमाम आला अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। गौरतलब है कि यह कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट पांच साल में बनकर तैयार होगा। करीब 29 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना उत्तर भारत का सबसे बड़ा निवेश है, जिस पर देश की सबसे बड़ी निजी कंपनी काम कर रही है।
विक्रमशिला-कटरिया रेल लाइन से होगा बिहार-झारखंड को फायदा
पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत विक्रमशिला-कटरिया रेल लाइन 26.23 किमी लंबी होगी। इस परियोजना पर लगभग 2178.38 करोड़ रुपये की लागत आएगी और चयनित एजेंसी को चार साल का समय दिया जाएगा। इसे वर्ष 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रोजेक्ट के तहत कहलगांव के बटेश्वर स्थान से गंगा पर सड़क पुल और विक्रमशिला से कटरिया के बीच 4 किमी लंबा रेल लाइन बनाया जाएगा। इसके बनने से ट्रेनें विक्रमशिला से कटरिया होते हुए नवगछिया तक जाएंगी। इससे करीब 3 घंटे का समय बचेगा। यह रेल पुल बनने के बाद बिहार-झारखंड इलाके की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। सीमांचल के पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज जिलों से रांची तक रेल सफर आसान हो जाएगा। इससे लगभग 10 लाख रेल यात्रियों को सुविधा मिलेगी।
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शिलान्यास समारोह में रही बड़ी मौजूदगी
पीरपैंती में आयोजित शिलान्यास समारोह में भागलपुर सांसद अजय कुमार मंडल, पीरपैंती विधायक ललन कुमार, कहलगांव विधायक पवन कुमार यादव, बिहार सरकार के ऊर्जा सचिव मनोज कुमार सिंह, बिहार विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक महेंद्र कुमार, भागलपुर प्रमंडलीय आयुक्त हिमांशु कुमार राय, जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हृदय कांत, अडानी पावर लिमिटेड के सीईओ नरेश गोयल समेत कई वरीय अधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल रहे।
निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा निवेश: ऊर्जा सचिव
बिहार के ऊर्जा सचिव मनोज कुमार सिंह ने बताया कि पीरपैंती थर्मल पावर परियोजना बिहार में निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा निवेश है और पूर्वी भारत का एकमात्र विद्युत संयंत्र होगा। राज्य सरकार और अडानी पावर लिमिटेड के बीच हुए एकरनामे के अनुसार इस परियोजना पर लगभग 29 हजार करोड़ रुपये की लागत आएगी।
उन्होंने बताया कि परियोजना में 800 मेगावाट क्षमता की तीन इकाइयां लगाई जाएंगी। रिकार्ड समय में इसकी एक यूनिट वर्ष 2028 तक चालू करने का लक्ष्य है। इस संयंत्र के लिए कोयले का स्रोत झारखंड के गोड्डा जिले की ईसीएल राजमहल खदान होगी, जबकि पानी का स्रोत पीरपैंती के पास स्थित गंगा नदी होगी। देश के कोयला आधारित थर्मल पावर प्रोजेक्ट्स में शामिल पीरपैंती अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल विद्युत परियोजना पूर्वी भारत का सबसे बड़ा विद्युत उत्पादन केंद्र बनने जा रही है। यहां से उत्पादित बिजली की आपूर्ति न केवल बिहार बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी की जाएगी।