बिहार विधानसभा चुनाव जैसे जैसे नजदीक आते जा रहे हैं नेताओं की जुबान से जहर बुझे तीर निकलने शुरू हो गए हैं। एमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी के बिहार के सीमांचल इलाके से चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद से जिस बात की आशंका जताई जा रही थी उसके आसार दिखने शुरू हो गए हैं।
ओवैसी के छोटे भाई और हैदराबाद से विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी ने रविवार को बिहार के किशनगंज में आयोजित चुनावी रैली में विरोधियों के खिलाफ जमकर अमर्यादित और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया।
खासकर प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ मुखर रुख अपनाते हए उन्हें गुजरात दंगों का गुनहगार बताते हुए शैतान और जालिम तक कह डाला। गुजरात दंगों के बहाने ओवैसी ने लोगों की भावनाओं को उकसाने के लिए खूब भड़काऊ शब्दों का इस्तेमाल किया।
कहा, कल्याण सिंह को मिला मस्जिद तुड़वाने का ईनाम
महिलाओं और बच्चों के साथ जुल्म की बात कहते हुए ओवैसी ने यहां तक कह डाला कि यह सब नरेन्द्र मोदी के कहने पर हुआ। ओवैसी ने कांग्रेस को भी नहीं बख्शा कहा, कांग्रेस ने जानबूझकर एक शैतान और जालिम को देश का वजीरे आजम बनने दिया।
जब उत्तर प्रदेश में बाबरी मस्जिद ढहाई गई तब भी केन्द्र में कांग्रेस की सरकार थी लेकिन गुनहगारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। ओवैसी ने कहा भाजपा ने उस दौरान यूपी के मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह को भी बाबरी मस्जिद ढहाने का ईनाम दिया है।
जो उस मामले में आरोपी हैं उन्हें राज्यपाल बनाया जा रहा है। जहर बुझे इन शब्दों पर जैसे जैसे तालियां बजती ओवैसी की जुबान और तीखी होती जाती। लगभग आधे घंटे के भाषण में उन्होंने भाजपा और कांग्रेस को ही निशाने पर रखा।
मुस्लिम बहुत सीमांचल से चुनाव लड़ेगी एमआईएम
गौरतलब है कि हैदराबाद के सांसद और अकबरुद्दीन ओवैसी के बड़े भाई असदुद्दीन ओवैसी बिहार के सीमांचल इलाकों में चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं। उनके बयान के बाद से ही बिहार चुनाव में वोटों के ध्रुवीकरण की आशंका बढ़ गई है।
क्योंकि ओवैसी बंधुओं की पहचान उनके भड़काऊ और विवादित भाषणों को लेकर रही है। आमतौर पर वे भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ही निशाने पर रखते हैं। रविवार को किशनगंज में दिया गया अकबरुद्दीन का यह बयान भी उसी की एक कड़ी माना जा रहा है।
बिहार के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों की लगभग दो दर्जन सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छा रखने वाले ओवैसी का पूरा ध्यान मुस्लिम वोटरों को अपने पाले में करने पर है। ऐसे में इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि जैसे जैसे चुनाव आगे बढ़ेगा इस तरह के शब्दों और भाषा का प्रयोग और बढ़ सकता है।